जल संकट पर बोले राज्यसभा सांसद, चेन्नई में सोना से महंगा है पानी

पिछले साल नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा था कि भारत में जल-संकट की भयावहता को नहीं समझा जा रहा है.

नई दिल्ली: तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई पिछले कुछ समय से गंभीर जल संकट से गुजर रहा है. बुधवार को राज्यसभा में यह कहते हुए मुद्दा उठाया गया कि राज्य में सोना से महंगा पानी हो गया है.

राज्यसभा में पानी के मुद्दे पर चर्चा के दौरान माकपा (मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी) सांसद टीके रंगराजन ने कहा कि चेन्नई देश का पहला सूखा राज्य बन जाएगा. जैसा कि सेंट्रल वाटर कमीशन की रिपोर्ट में कहा गया है कि तमिलनाडु में इस साल 13 जून तक बारिश में 41% की कमी आई है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘चेन्नई की जनता अब पूरी तरह से वाटर टैंकर, निगम और निजी टैंकरों पर निर्भर है. एक टैंकर की क़ीमत यहां पर एक ग्राम सोना से ज़्यादा हो गया है. अब चेन्नई में सोना पानी के मुक़ाबले ज़्यादा सस्ता हो गया है. यही सच है.’

रंगराजन ने आगे कहा, ‘पानी की किल्लत इतनी बढ़ चुकी है कि आईटी सेक्टर ने अपने कर्मचारियों को घर से काम करने के निर्देश दिए हैं. चेन्नई की अधिकांश रेस्टोरेंट बंद हो चुके हैं. इसलिए चेन्नई को बचाने की जिम्मेदारी पड़ोसी प्रदेशों की भी है.’

वहीं सीपीआई सांसद डी राजा ने कहा, ‘चेन्नई में लोग पानी की किल्लत झेल रहे हैं. तमिलनाडु में जिस तरह जल संकट गहराता जा रहा है लोगों की व्याकुलता बढ़ती ही जा रही है. केंद्र को अब इस मुद्दे के समाधान निकाले जाने के बारे में सोचना चाहिए.’
उन्होंने आगे कहा, ‘अब समय आ गया है कि सरकार नदियों को आपस में जोड़ने की दिशा में सोचना शुरू करे.’

वहीं शिवसेना सांसद अनिल देसाई ने कहा, ‘वर्तमान जल संकट इस बात का संकेत है कि अगला युद्ध पानी के लिए होगा.’

उन्होंने आगे कहा, ‘यही स्थिति महाराष्ट्र में भी बनती दिखाई दे रही है. हालांकि वहां प्रदेश सरकार इस मामले से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है.’

राजद सांसद मनोज कुमार झा ने कहा, ‘एक ऐसा प्रावधान लाए जाने की जरूरत है जो पानी के दुरुपयोग करने वाले को गिरफ्तार करने की अनुमति देता हो.’

नीति आयोग ने जल-संकट को जल्द समझने की जरूरत पर दिया ज़ोर

पिछले साल नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा था कि भारत में जल-संकट की भयावहता को नहीं समझा जा रहा है, जबकि 2030 तक देश के 10 बड़े नगरों में भारी जल संकट छाने वाला है. उन्होंने यमुना को मृत नदी बताया.

उन्होंने कहा कि समग्र जल प्रबंधन सूचकांक पर नीति आयोग की रिपोर्ट बताती है कि 60 करोड़ लोग पानी की कमी वाले क्षेत्र में रहते हैं और 2030 तक देश में पानी की मांग दोगुनी हो जाएगी.