Video: ब्‍लैकमनी के ‘प्रवीण’ से बीजेपी को परहेज क्‍यों नहीं?

स्टिंग में कैद होने के अगले ही दिन बीजेपी ज्‍वॉइन करने वाले प्रवीण कुमार निषाद 2018 में गोरखपुर उपचुनाव में सपा के टिकट पर लड़े थे.

गोरखपुर: 2019 लोकसभा चुनाव में कैंडिडेट के लिए कैंपेन पर खर्च की अधिकतम लिमिट 70 लाख तय की गई है. चुनाव आयोग की इस गाइडलाइन का उम्‍मीदवार कितना पालन करते हैं? यही जानने के लिए टीवी9भारतवर्ष ने ‘ऑपरेशन भारतवर्ष’ नाम से 18 सांसदों समेत कुल 21 नेताओं का स्टिंग किया.

इस स्टिंग में यूं तो कई सांसद बेनकाब हुए, लेकिन एक नाम ऐसा रहा, जो स्टिंग के वक्‍त सपा में था, लेकिन अगले दिन उसने बीजेपी ज्‍वॉइन कर ली. स्टिंग में कैद होने के बाद बीजेपी ज्‍वॉइन करने वाले इस सांसद का नाम है- प्रवीण कुमार निषाद.

प्रवीण निषाद 2018 गोरखपुर उपचुनाव में सपा के टिकट पर लड़े और बीजेपी उम्‍मीदवार को हराकर यूपी की राजनीति में लहरा रहे भगवा परचम को सीधे चुनौती दे डाली थी. जिस गोरखपुर में तीन दशकों से बीजेपी नहीं हारी थी, वहां प्रवीण निषाद ने जीत का झंडा फहराया था.

कुल मिलाकर प्रवीण कुमार निषाद का बीजेपी में जाना और उनके पिता संजय निषाद की पार्टी का एनडीए में शामिल होना, वोट बैंक के लिहाज से तो योगी आदित्‍यनाथ और अमित शाह के लिए फायदेमंद लग रहा है. लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि जो नेता एक दिन पहले ही स्टिंग में करोड़ों की बातें करता हुआ कैद हुआ है, उसे अगले ही दिन बीजेपी के शीर्ष नेतृत्‍व को पार्टी में शामिल करने में कोई दिक्‍कत क्‍यों नहीं हुई?
स्टिंग में बेनकाब नेता बीजेपी में क्‍यों?   

कालेधन के मुद्दे को लेकर 2014 लोकसभा चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी ने जनता से बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन यहां जो नेता ‘ऑपरेशन भारतवर्ष’ में कालेधन के सहारे चुनाव लड़ने की बात कर रहा है, उसे पार्टी में लेने से पहले किसी को कोई संकोच नहीं हुआ?

-यह बात सही है कि ‘ऑपरेशन भारतवर्ष’ के अंडरकवर कैमरे में प्रवीण कुमार निषाद के कैद होने की बात बीजेपी ने नजरअंदाज कर दी, लेकिन जनता ने तो टीवी9भारतवर्ष पर अपने नेता को करोड़ों की बात करते हुए देखा है.

-स्टिंग में फंसे अपने-अपने नेताओं के बारे में करीब-करीब हर राजनीतिक कन्‍नी काटता दिख रहा है, ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्‍या कालाधन के खिलाफ जो बड़ी-बड़ी बातें होती हैं, वे सिर्फ भाषणों तक सीमित ही हैं?

-स्टिंग में करोड़ों की बातें करने वाले प्रवीण कुमार निषाद खुद तो बीजेपी में शामिल हो ही गए हैं, बल्कि उनके पिता संजय निषाद की पार्टी भी एनडीए में शामिल हो गई है. चर्चा है कि निषाद पार्टी को 2019 लोकसभा चुनाव में दो लोकसभा सीटें दी जा सकती हैं- गोरखपुर, जौनपुर.

-मतलब प्रवीण कुमार और उनके पिता दोनों इस बार लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं. संजय निषाद जब सपा-बसपा गठबंधन में थे, तब उन्‍हें महाराजगंज से टिकट मिलने की अटकलें लगाई जा रही थीं.

जानें, प्रवीण कुमार निषाद का वो सच, जिसे बीजेपी ने नजरअंदाज कर दिया 

-TV 9 भारतवर्ष के खुफिया कैमरे में कैद हुए यूपी की हॉट सीट गोरखपुर के सांसद प्रवीण निषाद अंडरकवर रिपोर्टर्स को बताने लगे कि 2018 के उपचुनाव में कैसे उन्होंने दोनों हाथों से करोड़ों का कालाधन लुटाया था?

-निषाद ये खुलासा भी किया कि इस बार भी लोकसभा चुनाव में करोड़ों का ब्लैकमनी दोनों हाथों से लुटाएंगे.

-अंडरकवर रिपोर्टर ने पैसा फंड फंड कराने के बदले में प्रोटेक्शन की मांग की. इस पर प्रवीण निषाद ने कहा कि काम हो जाएगा, बताइए आप ज़मीन किधर देख रहे हैं, अगर उसमें कोई हमारी मदद चाहिए तो कितनी? इस पर अंडरकवर रिपोर्टर ने कहा करीब 10 एकड़ ज़मीन चाहिए. प्रवीण निषाद ने कहा हम पूरी प्रोटेक्शन देंगे.

-अंडरकवर रिपोर्टर ने जब गोरखपुर चुनाव में होने वाले खर्च के बारे में पूछा तो निषाद ने बताया कि लगभग 5-6 करोड़ रुपये खर्च होते हैं. फंडिंग के सवाल पर निषाद ने कहा कि जितनी फंडिंग आप करा सकते हैं, उतनी करा दीजिए, जिस पर निषाद ने कहा कि जितनी ज्यादा से ज्यादा हो सके उतनी करा दीजिए क्योंकि हमारे पास 2 लोकसभा सीट हैं.