कृषि कानूनों पर सरकार के साथ बैठक बेनतीजा, किसान संगठनों का आरोप-हमारे साथ हुआ छल

किसानों ने कहा कि वह कानूनों का विरोध करते रहेंगे. आगे की रणनीति चंडीगढ़ में तय की जाएगी. बताया जा रहा है कि करीब 7 किसान संगठनों के प्रतिनिधि इस मीटिंग में शामिल होने के लिए पहुंचे थे.

असंतुष्ट किसानों के साथ सरकार की बैठक बेनतीजा (File Photo)

संसद में हाल ही में पास हुए किसान कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत में प्रदर्शन जारी है. इस बीच पंजाब के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय कृषि सचिव से बुधवार को मुलाकात की. बैठक के बाद किसानों ने कृषि मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन भी किया. मीटिंग में शामिल होने वाले किसान संगठनों ने दावा किया है कि बैठक के नाम पर उनके साथ छल किया गया है. किसानों ने कहा है कि वादा केन्द्रीय कृषि मंत्री के साथ बैठक का किया गया था, जबकि सचिव से इस दौरान मिलवाया गया.

किसानों ने कहा कि वह कानूनों का विरोध करते रहेंगे. आगे की रणनीति चंडीगढ़ में तय की जाएगी. बताया जा रहा है कि करीब 7 किसान संगठनों के प्रतिनिधि इस मीटिंग में शामिल होने के लिए पहुंचे थे. केंद्र और किसानों के बीच ये बैठक बेनतीजा रही. किसानों ने कहा कि सिर्फ कानून के बारे में जानकारी दी गई. जबकि ये नहीं कहा गया कि उन चीज़ों को कानून से हटाया जाएगा या नहीं जिनको लेकर विरोध हो रहा है.

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29 संगठनों को दिया गया था बातचीत का न्योता

पंजाब (Punjab) के 29 किसान संगठनों (Farm Union) को 14 अक्टूबर को केंद्र सरकार की तरफ से नए कृषि कानूनों (New Farm Law) पर बातचीत का न्योता दिया गया था, इनमें से कुछ संगठन तो बातचीत के लिए राज़ी हुए थे, जबकि कुछ संगठनों ने किसी भी तरह की बैठक से इंकार कर दिया था.

केंद्र सरकार (Central Government) से बातचीत से एक दिन पहले 13 अक्टूबर को किसान यूनियन जालंधर (Jalandhar) में देश भगत यादगर हॉल में बातचीत के लिए इकट्ठा हुए थे.

केंद्र का किसान संगठनों को बातचीत का न्योता

कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने इससे पहले किसान यूनियनों के प्रतिनिधियों से एक संवाद में कहा था कि पंजाब में कुछ मुद्दों पर किसान विरोध कर रहे हैं, भारत सरकार हमेशा ही कृषि से जुड़े मुद्दों पर बहुत गंभीर रही है, इसलिए केंद्र सरकार आपके साथ बातचीत करना चाहती है.

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कानून बनने के बाद से लग़ातार हो रहा विरोध

केंद्र ने जब से कृषि से जुड़े तीन कानूनों को पास किया है तब से किसानों के असंतुष्ट संगठन और कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल लग़ातार इनका विरोध कर रहे हैं. नए कृषि कानूनों में फसलों की मंडी से बाहर बिक्री की छूट, निजी खेती को बढ़ावा देने समेत कई सुधार लाए गए हैं.

हालांकि कृषि संगठन और विपक्षी दल इन्हें किसान विरोधी करार दे रहे हैं. आरोप लगाया जा रहा है कि इन कानूनों के ज़रिए मंडी व्यवस्था को खत्म करने की केंद्र सरकार की योजना है. वहीं एमएसपी खत्म होने का डर भी किसान संगठनों को सता रहा है. राहुत गांधी ने हाल ही में खेत बचाओ रैली का तीन दिन तक पंजाब में आयोजन किया था. वो सड़क पर उतरकर इन कानूनों का विरोध कर रहे हैं.

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