सरकार ने राफेल मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर किया नया हलफनामा

सुप्रीम कोर्ट में राफेल मामले को लेकर एक याचिका दायर की थी जिसमें कहा गया था कि कैग की रिपोर्ट में जो जानकारी दी गई वह गलत है.

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने राफेल मसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में नया हलफनामा दायर किया है. केंद्र सरकार ने कहा है कि कैग रिपोर्ट से संबंधित गलतियों का फैसले पर कोई असर नही पड़ता. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के फैसले को कई और कारणों से सही ठहराया.

दरअसल याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण, यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी उसमें कहा गया था कि कैग में जो जानकारी दी गई वह गलत है. सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि कैग की रिपोर्ट में जो भी जानकारी दी गई वो सही है.

सरकार ने यह हलफनामा रक्षा मंत्रालय की ओर से पेश किया और बताया, सरकार की तरफ से कोई भी गलत जानकारी सुप्रीम कोर्ट को नहीं दी गई. इस मामले में पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई नहीं होनी चाहिए.

सरकार का कहना है कि “सुप्रीम कोर्ट ने राफेल निर्णय लेने की प्रक्रिया और मूल्य निर्धारण को पहले ही मंजूरी दे दी है. राफेल एकमात्र मामला नहीं है जहां संप्रभु गारंटी के साथ किया गया है. रूसी संघ और अमेरिका के साथ पिछले सुरक्षा समझौतों में भी आश्वासन पत्र थे.

सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने कभी भी गलत दस्तावेज जमा नही करें. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया राफेल को फिर से नहीं खोला जा सकता.” सुप्रीम कोर्ट कल मामले की सुनवाई करेगा.

इससे पहले शनिवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इसी मामले में एक नया हलफनामा दाखिल किया था. केंद्र ने गोपनीय दस्तावेज के खुलासे से देश की संप्रभुता पर खतरा बताया था और इस याचिका खारिज करने की मांग की थी.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिसंबर को फ्रांस से 36 राफेल फाइटर प्लेन खरीद प्रक्रिया की जांच का आदेश देने से मना कर दिया था. इस आदेश के खिलाफ पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी.

सुप्रीम कोर्ट 10 अप्रैल दोबारा सुनवाई करने के लिए राजी हुआ था. तब मुख्‍य न्‍यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने लीक हुए दस्तावेजों को वैध माना था. सरकार ने दलील दी थी कि इन दस्तावेजों को खारिज किया जाना चाहिए.

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने देश की सुरक्षा का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण की याचिका खारिज करने की मांग की थी. दलील दी गई थी कि तीनों याचिकाओं में जिन दस्तावेजों का प्रयोग हुआ है, उस पर सरकार का विशेषाधिकार है. लिहाजा उन दस्तावेजों को याचिका से हटाया जाना चाहिए. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को नहीं माना था.

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