विदेशी चंदे की कालाबाजारी रोकने के लिए लोकसभा में विधेयक पास, जानें इसकी अहम बातें

विदेशी अंशदान विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2020 सोमवार को लोकसभा (Loksabha) से पास हो गया. सरकार का दावा है कि इससे विदेशी चंदे (Foreign fund) के दुरुपयोग को रोका जा सकेगा.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 7:50 pm, Mon, 21 September 20

विदेशी चंदे (Foreign Funds) का दुरुपयोग रोकने के लिए सरकार ने सोमवार को बड़ा कदम उठाया. लोकसभा ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA ACT) में संशोधन से जुड़े विधेयक को चर्चा के बाद पारित कर दिया. सरकार के अनुसार नए संशोधनों से विदेशी चंदे के उपयोग में पारदर्शिता लाई जा सकेगी.

सरकार की ओर से विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि स्पष्ट तौर पर ये विधेयक किसी NGO या किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है.

सदन से पारित विधेयक के मुताबिक

-विदेशी चंदा पाने वाले NGO के अधिकारियों के लिए आधार नंबर देना अनिवार्य होगा.

-नए प्रावधानों के मुताबिक लोक सेवकों के विदेशी चंदा लेने पर रोक लगाई गई है. साथ ही सरकारी अनुदान से चलने वाले निगमों और निकायों के कर्मचारी भी अब विदेशी चंदा नहीं ले सकेंगे.

-अब विदेशी चंदा पाने वाले संगठन अपना फंड किसी और को ट्रांसफर नहीं कर सकेंगे.

-विदेशी चंदे का दुरुपयोग करने वाले संगठनों पर कार्रवाई करने के लिए केंद्र सरकार को और सक्षम बनाया गया है.

-FCRA पंजीकृत संगठन यदि किसी स्थिति में अपना प्रमाण पत्र सरेंडर करना चाहते हैं तो सरकार उसके लिए अनुमति दे सकेगी.

-विदेशी सहायता में से अब सिर्फ़ 20 फ़ीसदी राशि प्रशासनिक कार्यों के लिए खर्च की जा सकती है. पहले इसकी सीमा 50 फ़ीसदी तक थी.

-केंद्र की ओर से तय किए गए और नई दिल्ली स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में खोले गए खाते के जरिए ही NGO विदेशी चंदा ले सकेंगे.

हालांकि NGO नई दिल्ली के खाते से अपने दूसरे खातों में फंड भेज सकते हैं लेकिन उसमें सिर्फ़ विदेशी चंदा से संबंधित राशि जमा या निकासी होगी.

बड़े पैमाने पर हो रही थीं गड़बड़ियां

सरकार के मुताबिक साल 2010 से 2019 के बीच NGO को आने वाले विदेशी चंदा दो गुना बढ़ गए हैं. एक तरफ बड़ी संख्या में NGO ने अपना लेखा-जोखा सरकार के सामने पेश नहीं किया तो दूसरी ओर फंड का दुरुपयोग भी किया. इसी के चलते 19,000 से ज्यादा NGO के पंजीकरण का प्रमाणपत्र रद्द करना पड़ा.

सरकार के मुताबिक इतना ही नहीं विदेशी चंदे का दुरुपयोग करने वाले दर्जनों NGO के खिलाफ अपराधिक मामले भी चल रहे हैं. नए संशोधनों से विदेशी चंदे का दुरुपयोग करने वाले NGO या ऐसे लोगों पर शिकंजा तो कसेगा ही साथ ही विदेशी चंदे के उपयोग में पारदर्शिता भी आएगी।