कश्मीर में इस तरह होगी शांति बहाल, ये है मोदी सरकार का मास्टर प्लान

12 दिनों के बाद राज्य में लैंडलाइन सेवा शुरू कर दी गई. फिलहाल केवल 50 प्रतिशत लैंडलाइन ही अभी काम कर रहे हैं और बाकियों को चालू करने में थोड़ा सा समय लगेगा.

पिछले कुछ समय से जम्मू एवं कश्मीर का माहौल तनावपूर्ण रहा है. राज्य से आर्टिकल 370 हटाए जाने के केंद्र सरकार के फैसले से पहले ही घाटी में सेना की तैनाती बढ़ा दी गई थी और इंटरनेट, लैंडलाइन और कई अन्य सेवाएं बंद कर दी गई थीं. फिलहाल जम्मू एवं कश्मीर के हालात अब धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं.

राज्य में किसी भी प्रकार की हिंसा न हो पाए, इसके लिए एहतियातन सरकार ने सेवाएं रोक दी थीं. 12 दिनों के बाद राज्य में लैंडलाइन सेवा शुरू कर दी गई. फिलहाल केवल 50 प्रतिशत लैंडलाइन ही अभी काम कर रहे हैं और बाकियों को चालू करने में थोड़ा सा समय लगेगा. राज्य में किसी भी प्रकार की हिंसा न हो पाए, इसके लिए एहतियातन सरकार ने सेवाएं रोक दी थीं.

वहीं सरकार ने राज्य में सामान्य स्थिति होने के बाद हिंसक घटनाओं को रोकने के लिए रणनीति तैयार की है. घाटी में चार समूहों को नियंत्रित करने की रणनीति बनाई गई है, जिनमें अलगाववादी, आतंकी, धार्मिक नेता और पत्थरबाज शामिल हैं.

पत्थरबाजों पर कड़ी निगरानी

घाटी में पत्थरबाजों का ग्रुप काफी सक्रिय है. आए दिन वहां से पत्थरबाजों द्वारा भारतीय सेना पर पथराव करने की खबरें सामने आती रहती है. पत्थरबाजों में सबसे ज्यादा किशोर शामिल होते हैं. इन्हें सुधारने के लिए एक कम्यूनिटी बॉन्ड बनाने का प्लान तैयार किया गया है. इसमें उन लोगों को शामिल किया जाएगा, जिसमें 20 परिवारों के सदस्य और उनके साथी शामिल होंगे. उनसे बॉन्ड में लिखवाया जाएगा कि उनके परिवार के किशोर किसी भी प्रकार की हिंसक गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे.

आतंकवादियों पर कार्रवाई करने के लिए सेना को खुली छूट

आतंकवादियों पर काबू पाने के लिए भारतीय सेना को खुली छूट दी जा रही है. एलओसी पर सुरक्षा बढ़ाई जाएगी, ताकि पाकिस्तान की तरफ से आतंकी भारत में घुस कर अपनी नापाक हरकतों को अंजाम न दे सकें.

अलगाववादी नेताओं पर पैनी नजर

राज्य में हालातों के धीरे-धीरे सामान्य होने के बाद सरकार की नजर क्षेत्रीय नेताओं पर रहेगी, जो कि हिंसा भड़काने वाले भाषण दे सकते हैं. राज्य प्रशासन जिन नेताओं पर अपनी पैनी नजर रखेगी उनमें अलगाववादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेंस के नेता और राज्य के प्रमुख राजनेता शामिल हैं.

धर्मगुरुओं पर रोक

राज्य प्रशासन ने प्रभावशाली धार्मिक नेताओं पर पूर्ण रूप से रोक लगाने की तैयारी कर ली है. वहीं अगर जरूरत पड़ी तो उन धार्मिक गरुओं को प्रशासन गिरफ्तार भी किया जा सकता है.

 

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