गोरापन-गंजापन-लंबाई बढ़ाने वाले झूठे विज्ञापन देने पर जाना पड़ेगा जेल, 50 लाख का जुर्माना भी

ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज बिल 2020 में कहा गया है कि पहली बार शर्तों का उल्लंघन करने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और 2 साल तक की सजा हो सकती है.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 5:40 pm, Thu, 6 February 20

केंद्र सरकार ने ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 में बदलाव करने का प्रस्ताव रखा है. सरकार ने इसके लिए ड्राफ्ट बिल तैयार कर लिया है.

ऑनलाइन मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित बिल में प्रावधान है कि त्वचा का गोरापन, बहरापन, लंबाई में वृद्धि, बाल झड़ना या मोटापा जैसी चीजों का इलाज करने का दावा करने वाले प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों पर रोक लगेगी.

बिल के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना और 5 साल तक की जेल हो सकती है.

ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज बिल 2020 में कहा गया है कि पहली बार शर्तों का उल्लंघन करने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और 2 साल तक की सजा हो सकती है. दूसरी बार ऐसा करने पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना और 5 साल तक की जेल हो सकती है.

मौजूदा कानून के मुताबिक, पहली बार प्रावधानों का उल्लंघन करने पर 6 महीने की जेल आर्थिक जुर्माने के साथ या उसके बगैर हो सकती है. दूसरी बार ऐसा करने पर एक साल तक की सजा हो सकती है.

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, बदलते समय और तकनीक को ध्यान में रखते हुए एक्ट में बदलाव करने का फैसला लिया गया है.

प्रस्तावित बिल में विज्ञापन की परिभाषा में बदलाव करने की मांग रखी गई है. विज्ञापन के दायरे में आने वाली चीजों को बढ़ा दिया गया है.

मंत्रालय ने बिल में यह प्रस्ताव रखा है कि दवाओं का विज्ञापन बंद हो जाना चाहिए. साथ ही 78 ऐसा बीमारियों की पहचान की गई है जिन्हें ठीक करने का दावा करने वाले प्रोडक्ट के विज्ञापन पर रोक होगी. जबकि मौजूद कानून में ऐसी 54 बीमारियों को चिह्नित किया गया है.

मंत्रालय ने इस बिल को लेकर आम लोगों से उनके सुझाव भी मांगे हैं. मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि 45 दिनों के अंदर सुझाव भेजे जा सकते हैं.

ये भी पढ़ें-

CAA पर लोकसभा में बोले पीएम मोदी – कांग्रेस का असली चेहरा सामने आ गया

पीएम मोदी के ‘ट्यूबलाइट अटैक’ पर राहुल का जवाब, इकोनॉमी और रोजगार पर दो मिनट बोल देते