गन्ना किसानों को मोदी सरकार की बड़ी सौगात, सीधे बैंक खातों में जाएगी 6,268 करोड़ की सब्सिडी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCA) की बैठक में वर्ष 2019-20 (अक्टूबर-सितंबर) के लिए चीनी निर्यात सब्सिडी को मंजूरी प्रदान की गई.

केंद्र सरकार ने बुधवार को चीनी मिलों को आगामी पेराई सीजन 2019-20 (अक्टूबर-सितंबर) में निर्यात के लिए 6,268 करोड़ रुपए सब्सिडी देने का एलान किया. केंद्र सरकार ने अधिकतम स्वीकृत निर्यात परिमाण (MAEQ) के तहत चीनी उत्पादन और विपणन वर्ष 2019-20 में 60 लाख टन चीनी निर्यात पर सब्सिडी देने का फैसला किया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCA) की बैठक में वर्ष 2019-20 (अक्टूबर-सितंबर) के लिए चीनी निर्यात सब्सिडी को मंजूरी प्रदान की गई. CCA ने चीनी मिलों को 10,448 रुपए प्रति टन की दर से चीनी निर्यात सब्सिडी देने का फैसला किया, जिस पर कुल खर्च 6,268 रुपए आएगा.

केंद्र सरकार ने अधिकतम स्वीकृत निर्यात परिमाण (MAEQ) के तहत चीनी उत्पादन और विपणन वर्ष 2019-20 में 60 लाख टन चीनी निर्यात पर सब्सिडी देने का फैसला किया है. चीनी के इस परिमाण पर विपणन लागत में चीनी का रखरखाव, अपग्रेडिंग और अन्य प्रोसेसिंग लागत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय और देसी परिवहन एवं भाड़ा पर होने वाला खर्च शामिल होगा.

मंत्रिमंडल की बैठक की जानकारी देते हुए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन और सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने एक प्रेसवार्ता में बताया कि सरकार ने 60 लाख टन चीनी के निर्यात पर 6,268 रुपए की सब्सिडी देने का फैसला किया है. उन्होंने बताया कि देश में कुल 162 लाख टन चीनी का स्टॉक है, जिसमें से 40 लाख टन चीनी बफर स्टॉक में है. उन्होंने कहा कि आगामी सीजन में 60 लाख टन चीनी का निर्यात करने का लक्ष्य रखा गया है.

चीनी निर्यात पर मिलने वाली यह सब्सिडी मिलों की तरफ से गन्नों की कीमतों के बकाए एवज में सीधे किसानों के खाते में जमा की जाएगी. पिछले साल सरकार ने न्यूनतम सांकेतिक निर्यात कोटा (MAEQ) के तहत चीनी मिलों के लिए 50 लाख टन चीनी निर्यात का कोटा निर्धारित किया था. सरकार ने एक बयान में कहा कि चीनी मिलों को दी जाने वाली यह निर्यात सब्सिडी विश्व व्यापार संगठन (WTO) के कृषि पर समझौता (AOA) के अनुच्छेद 9.1 (D) और (E) के प्रावधानों के अनुरूप है. इस तरह इसमें WTO के नियमों का पालन हो रहा है.

गौरतलब है कि आस्ट्रेलिया, ब्राजील और ग्वाटेमाला ने भारत के पूर्व निर्यात सब्सिडी कार्यक्रम के विरोध में WTO में शिकायत करते हुए इसे व्यापारिक नियमों का उल्लंघन बताया था. सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक 2017-18 और 2018-19 में उत्पादन ज्यादा होने के कारण सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न उपायों के बावजूद 2019-20 के सीजन में ओपनिंग स्टॉक करीब 142 लाख टन रहेगा और सीजन के आखिर में चीनी का स्टॉक 162 लाख टन रहने का अनुमान है.

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