दो तिहाई कानून को अपराध की श्रेणी से हटाने की तैयारी, छोटी कंपनियों को होगा बड़ा फायदा

अगर कोई कंपनी नियमों की अनदेखी करते हुए पाया जाता है तो उसकी फंडिंग या रजिस्टर्ड ऑफ़िस के ट्रांसफर पर रोक लगा दी जाएगी.

केंद्र सरकार शीतकालीन सत्र में छोटे कंपनियों को फ़ायदा पहुंचाने के लिए एक अहम बिल लाने जा रही है. इस बिल के तहत कई सेक्शन को अपराध की श्रेणी से हटा दिया जाएगा. यानी की उसमें जेल का प्रावधान नहीं होगा. इस बिल के पास होने से 11लाख़ रजिस्टर्ड कंपनियों में से उन 8 लाख़ कंपनियों को फ़ायदा पहुंचेगा, जिनकी सलाना 2 करोड़ रुपये का टर्नओवर है. या उनका पेड अप कैपिटल 50 लाख़ के ऊपर हो.

क्या है यह बिल

केंद्र सरकार दो तिहाई बिलों को अपराध की श्रेणी से हटाने वाली है. जिसके तहत कुल 66 में से 44 सेक्शन में कंपनियों को राहत मिलेगी. इस बदलाव के तहत छोटी कंपनियों को हल्की पेनाल्टी भरनी होगी. यानि कि कोई कंपनी अगर इन 44 सेक्शन्स के तहत दोषी पायी जाती है तो वह पेनाल्टी भर कर बच सकती है.

इस बिल पर कॉरपोरेट अफेयर्स सेकेट्री इनजेटी श्रीनिवास की अध्यक्षता में कंपनी लॉ कमिटी (कंपनी कानून समिति) फ़िलहाल चर्चा कर रही है. इस चर्चा में नियमों की अनदेखी करने वाली कंपनियों को जेल की सज़ा दिए बिना सुधार लाने के तरीकों पर बात होगी.

उदाहरण के तौर पर अगर कोई कंपनी नियमों की अनदेखी करते हुए पाया जाता है तो उसकी फंडिंग या रजिस्टर्ड ऑफ़िस के ट्रांसफर पर रोक लगा दी जाएगी.

इस कमिटी में कोटक महिंद्रा बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर उदय कोटक और वकील श्रदुल श्रॉफ भी सदस्य हैं. इन्हें उम्मीद है कि अगले कुछ हफ़्तों में यह रिपोर्ट तैयार हो जाएगी. सरकार इस बिल को शीतकालीन सत्र में सदन के सामने रखेगी.