ट्रैफिक चालान पर बंटे केंद्र और राज्य, बीजेपी शासित इन राज्यों ने भी नहीं किया लागू

बिना लाइसेंस के गाड़ी चलाने पर पहले पांच सौ रुपये तक जुर्माना था. यह अब 5000 रुपये होगा.

नई दिल्ली: लोग सड़क पर गाड़ी चलाते हुए ट्रैफिक नियमों का पालन करें, ये बेहद ज़रूरी है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इसी नियत से ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने की राशि लगभग दस गुना बढ़ा दिया है. सड़क परिवहन और यातायात मंत्री नितिन गडकरी ने जुर्माने की राशि बढ़ाने को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट किया है.

उन्होंने कहा कि ‘भारी जुर्माने का मकसद लोगों की जान बचाना है न कि राजस्व बढ़ाना. क्या सड़कों पर होने वाली डेढ़ लाख़ मौतों को लेकर चिंता नहीं करनी चाहिए. जुर्माना लोगों की जान से ज़्यादा अहम नहीं है. हादसे कम करना और लोगों की जान बचाना राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों की ज़िम्मेदारी है. सरकार ने इस विषय पर संसद में सब से चर्चा करने के बाद ही इसे लागू किया है.’

बता दें कि यह क़ानून पूरे देश में 1 सितंबर को लागू किया गया था लेकिन 11 दिनों के अंदर ही कई राज्यों में इसे हटा दिया गया या जुर्माने की राशि कम कर दी गई. इस क़ानून को लागू नहीं करने वालों में से ज़्यादातर राज्य बीजेपी शासित है. इसके पीछे राज्यों की दलील है कि नए नियन आम लोगों की जेब पर भारी पड़ते दिख रहे हैं.

सबसे पहले गुजरात में यातायात नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना राशि को 1,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक कम किया गया है.

गुजरात के बाद अब कई अन्य बीजेपी शासित राज्य जिनमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तराखंड और गोवा शामिल हैं, भी नियमों में कुछ ढील देने पर विचार कर रहे हैं.

1. गुजरात– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह दोनों गुजरात से आते हैं. दोनों के गृह राज्य गुजरात ने इस क़ानून के तहत दंड की राशि में भारी कटौती की. गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने जुर्माने की राशि में लगभग 90 फीसदी कटौती का ऐलान किया है.
हालांकि सूत्र बताते हैं कि केंद्र सरकार के फ़ैसले में तब्दीली को लेकर पार्टी नेतृत्व गुजरात के सीएम विजय रूपाणी से जवाब तलब कर सकती है.

2. महाराष्ट्र– महाराष्ट्र में कुछ ही दिनों में चुनाव होने वाला है. ऐसे में फडनवीस सरकार कठोर यातायात नियम लागू कर लोगों की नाराज़गी मोल नहीं लेना चाहती है. उन्होंने केंद्रीय परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को चिट्ठी लिखी है.

महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री दिवाकर रावते ने केंद्र से जुर्माना कम करने को कहा है. प्रदेश सरकार ने पत्र में कहा है कि लोग इतना जुर्माना नहीं भर सकते. जब तक हमें जवाब नहीं मिलेगा, तब तक हम इंतजार करेंगे और नया जुर्माना लागू नहीं करेंगे.

सरकार की ओर से लिखी गई चिट्ठी में इस बात का जिक्र किया गया है कि भारी-भरकम जुर्माना राज्य के लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला है. केंद्र सरकार से इस चिट्ठी में अपील की गई है कि सरकार मोटर व्हीकल एक्ट में जरूरी बदलाव करे.

3. उत्तराखंड– उत्तराखंड सरकार ने नए मोटर व्हीकल एक्ट में आंशिक संशोधन किया है. राज्य सरकार ने केंद्र के नए मोटर व्हीकल एक्ट के कुछ नियमों की जुर्माना राशि में करीब 50 फीसदी तक की कटौती की है. वहीं कुछ नियमों में जुर्माना राशि में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

4. गोवा– बीजेपी नेतृत्व वाली गोवा सरकार ने नैतिकता का हवाला देते हुए बदले गए जुर्माने की राशि लागू करने से मना कर दिया है. गोवा सरकार में परविहन मंत्री मॉविन गोदिन्हों का कहना है कि सरकार पहले सड़कों की मरम्मत कराना चाहती है. जब तक राज्य की सड़क गड्ढ़ा मुक्त नहीं होती है नया जुर्माना राशि लागू नहीं होगा. उन्होंने कहा कि सरकार दिसंबर तक सभी सड़कों की मरम्मत कराएगी, उसके बाद ही संशोधित मोटर वाहन क़ानून लागू करेगी.

5. हरियाणा– हरियाणा में इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाला है. राज्य के मुखिया मनोहर लाल खट्टर ने नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू करने से इनकार करते हुए कहा कि पहले पूरे हरियाणा में ट्रैफिक नियमों के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा.

6. झारखंड– महाराष्ट्र और हरियाणा की तरह झारखंड में भी कुछ महीने में चुनाव होने वाला है. यहां भी राज्य में नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू नहीं हुआ है. राज्य सरकार ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद जुर्माना राशि में कटौती के संकेत दिए हैं.

इसके अलावा राजस्थान, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और दिल्ली जैसे राज्यों में इस राशि को या तो कम किया गया है इसपर विचार किया जा रहा है.

जुर्माने की रकम दस गुना बढ़ी

बता दें कि एक सिंतबर से मोटर व्हीकल एक्ट नए बदलाव के साथ पूरे देश में लागू किया गया था. ऐसे कई अपराध हैं जिनके लिए जुर्माने की रकम बढ़ा दी गई है. बिना लाइसेंस के गाड़ी चलाने पर पहले पांच सौ रुपये तक जुर्माना था. यह अब 5000 रुपये होगा. ओवरस्पीडिंग के लिए पहले चार सौ रुपये तक जुर्माना था, अब यह हल्के वाहनों के लिए एक से दो हजार रुपये होगा जबकि मध्यम और भारी वाहनों के लिए दो हजार से चार हजार रुपये.

खतरनाक ड्राइविंग में पहली बार पकड़े जाने पर छह महीने तक की सजा और एक हजार तक का जुर्माना होता था. इसे अब बढ़ाकर छह महीने से एक साल तक की सजा और एक हजार से पांच हजार रुपये तक का जुर्माना कर दिया गया है.