सिखों की सर्वोच्च संस्था अकाल तख्त के जत्थेदार ने किया खालिस्तान की मांग का समर्थन

ज्ञानी हरप्रीत सिंह (Gyani Harpreet Singh) ने कहा, “ये बात सही है कि सिख एक अलग धर्म है, एक कौम है और एक अलग नेशन है. हम बस यही चाहते हैं कि हमें ऐसा माहौल मिले जिसमें हमारा धर्म, हमारी धार्मिक परंपराएं, मान्यताएं, धार्मिक ग्रंथ और हम सुरक्षित हों.”

  • मोहित मल्होत्रा
  • Publish Date - 9:27 pm, Mon, 14 September 20

सिखों की सर्वोच्च संस्था अकाल तख्त (Akal Takht) के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह (Gyani Harpreet Singh) ने खालिस्तान (Khalistan) के समर्थन में और देश के खिलाफ बयान दिया है. उन्होंने पंजाब के भटिंडा के तलवंडी साबो में एक धार्मिक कार्यक्रम में बोलते हुए यह बयान दिया. ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा, “1984 के बाद सिख समुदाय को कई धाराओं में बांट दिया गया और ये सब उन लोगों ने किया जिन्हें लगता था कि सिख धर्म से देश की अखंडता को खतरा है. हालांकि सिखों ने कभी हिंदुस्तान के टुकड़े करने के बारे में नहीं सोचा और 1947 में हमने हिंदुस्तान में रहने की ही हामी भर दी थी.”

उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद थी कि यहां रहने के लिए हमें सम्मानजनक माहौल मिलेगा. हम हमारा धर्म, मान्यताएं और धार्मिक ग्रंथ सुरक्षित रहेंगे लेकिन अब ना हम सुरक्षित रहे, ना हमारा धर्म और ना ही हमारे धार्मिक ग्रंथ.

‘जब हमारा सब कुछ खतरे में पड़ गया है तो…’

ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा, “जब हमारा सब कुछ खतरे में पड़ गया है तो हमें मजबूरी में अलग ‘कौमी घर-अलग देश’ की मांग की है, कि हमें अलग देश चाहिए. लेकिन हमारी इस आवाज को हिंदुस्तान में अलग तरह से दिखाया गया और हमें कभी मुजरिम तो कभी आतंकवादी और कभी वामपंथी बना कर दिखाया गया.”

‘हमारे इतिहास पर खड़े किए जा रहे सवाल’

उन्होंने कहा कि ये बात सही है कि सिख एक अलग धर्म है, एक कौम है और एक अलग नेशन है. हम बस यही चाहते हैं कि हमें ऐसा माहौल मिले जिसमें हमारा धर्म, हमारी धार्मिक परंपराएं, मान्यताएं, धार्मिक ग्रंथ और हम सुरक्षित हों लेकिन इसके उलट अब हमारे इतिहास को ही अलग तरह से यहां पेश किया जा रहा है और हमारे इतिहास पर ही सवाल खड़े किए जा रहे हैं.”