IT प्रोफेशनल्स के लिए बुरी खबर, अमेरिका ने बढ़ाई H-1B वीजा की एप्लीकेशन फीस

अमेरिका में ट्रंप सरकार आने के बाद H-1B वीजा नियमों को लेकर की जा रही सख्ती की वजह से भारत और दूसरे देशों के आईटी प्रोफेशनल्स को मुसीबतें झेलनी पड़ रही हैं.

भारतीयों और दूसरे देश के लोगों के लिए अमेरिका में काम करना अब महंगा हो गया है. अमेरिका में H-1B वीजा के लिए एप्लीकेशन फीस बढ़ा दी गई है, जिसके मुताबिक लोगों को अब 10 डॉलर यानी 700 रुपये ज्यादा देने होंगे.

USCIS (U.S. Citizenship and Immigration Services) के मुताबिक बढ़ाई गई फीस से H-1B वीजा के लिए सलेक्शन प्रोसेस को आवेदन करने वालों और एजेंसी के लिए इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्रेशन के लिए उपयोगी साबित होगा. USCIS के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर केन कुसिनेली का कहना है कि इससे इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्रेशन सिस्टम को आधुनिक बनाने, फर्जीवाड़ा रोकने और जांच प्रक्रिया को मजबूत बनाया जा सकेगा.

गौरतलब है कि इन दिनों अमेरिका की तरफ से भारतीयों के H-1B वीजा खारिज किए जाने में बढ़ोतरी हुई है ऐसे में ट्रंप सरकार का ये फैसला सामने आया है. अमेरिकी थिंक टैंक नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी के सर्वे के अनुसार 2015 में 6 फीसदी वीजा रद्द किए गए थे और वर्तमान वित्त वर्ष में ये आंकड़ा 24 फीसदी पर पहुंच गया है.

क्या है H-1B वीजा?

H-1B वीजा गैर-प्रवासी वीजा है, जोकि अमेरिका की कंपनियों में विदेशी लोगों को काम करने के लिए टेम्प्रेरी नौकरी देने की परमिशन देता है. इसके लिए किसी खास फील्ड में एक्स्पर्टीज और ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट होना जरूरी है. ये वीजा 6 साल तक वैलिड होता है.

अमेरिका में ट्रंप सरकार आने के बाद H-1B वीजा नियमों को लेकर की जा रही सख्ती की वजह से भारत और दूसरे देशों के आईटी प्रोफेशनल्स को मुसीबतें झेलनी पड़ रही हैं.