हल्दीराम के मालिक का सिंगापुर में निधन, इलेक्ट्रिक इंसिनरेटर के जरिए हुआ अंतिम संस्कार

दरअसल सिंगापुर के कानून के मुताबिक वहां हिंदू रीति-रिवाजों के हिसाब से दाह संस्कार नहीं किया जाता है. ऐसे में परिवार को इस बात पर राजी होना पड़ा

हल्दीराम भुजियावाला (प्रतीक फूड प्रोडक्ट्स) के मालिक महेश अग्रवाल का सिंगापुर में निधन हो गया है. वह लिवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. पिछले तीन महीनों से उनका सिंगापुर के अस्पताल में इलाज चल रहा था. मौजूदा हालात के चलते अग्रवाल के शव को भारत नहीं लाया जा सकता था, ऐसे में उनके परिवार को सिंगापुर में ही इलेक्ट्रिक इंसिनरेटर (electric incinerator) के जरिए दाह संस्कार करने पर राजी होना पड़ा.

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दरअसल सिंगापुर के कानून के मुताबिक वहां हिंदू रीति-रिवाजों के हिसाब से दाह संस्कार नहीं किया जाता है. ऐसे में परिवार को इस बात पर राजी होना पड़ा. सिंगापुर में महेश अग्रवाल की पत्नी मीना और बेटी अवनी मौजूद थीं. अब वह वापस लौटना चाहती हैं, लेकिन लॉकडाउन की वजह से उन्हें दिक्कत हो रही है.

सिंगापुर में फंसे अन्य भारतीयों की तरह ही दोनों मां-बेटी ने भी एम्बैसी का ऑनलाइन फॉर्म भरा है. बताया जा रहा है कि सिंगापुर में मंगलवार को लॉकडाउन का ऐलान किया जा सकता है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिंगापुर में मौजूद भारतीयों को सूचित किया गया है कि उन्हें वापस लाने के लिए एक विमान का इंतजाम किया जा रहा है, जो बुधवार देर रात उन्हें लेकर आएगा. हालांकि इस खबर के चलते अब वहां संघर्ष के हालात बन चुके हैं.

अवनी का कहना है कि वह पिता को नहीं बचा सकी, लेकिन कोलकाता में जो उनका बिजनेस है, उसे बचाने के लिए वापस आना जरूरी है. बता दें कि महेश अग्रवाल का एक बेटा और तीन बेटियां हैं. बड़ा बेटा प्रतीक कोलकाता में है, बड़ी बेटी आंचल सैन फ्रांसिस्को में वैज्ञानिक है, जबकि छोटी बेटी अंतरा डरहम यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही है.

महेश अग्रवाल को लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारी थी, जिसके बाद वह जनवरी में ट्रांसप्लांट के लिए सिंगापुर चले गए थे. उनकी सर्जरी भी सफल हुई, लेकिन इसके बाद इंफेक्शन हो गया और उन्हें ICU में शिफ्ट कर दिया गया. परिवार को बताया गया कि इंफेक्शन से मौत हुई है इसलिए उनके अंतिम संस्कार को लेकर रिस्क नहीं लिया जा सकता.

अवनी ने कहा, “हमें इस बात पर राजी होना पड़ा. उनका इस तरह से जाना दिल दुखा देने वाला था. लेकिन हम कुछ और कर भी नहीं सकते थे.” जानकारी के मुताबिक राख को अलग से रख लिया गया है और वापस लौटते समय कलश परिवार को सौंप दिया जाएगा. अवनी ने आगे बताया कि उन्हें पता चला कि 15 अप्रैल तक सभी फ्लाइट्स पर रोक लगा दी गई है. ऐसे में हम कोलकाता कैसे जाएं. उन्होंने कहा कि वह अपने सभी रिश्तेदारों से कह रही हैं कि वह मंत्रियों और अधिकारियों से संपर्क करें.

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