हाथ से लिखा करोड़ों का टैक्सी बिल, PMO पहुंचा उच्चतर शिक्षा अभियान में करप्शन का मामला

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक मंत्रालय ने बीते साल ही इस मामले को पीएमओ के संज्ञान में लाया था. मंत्रालय ने ईशिता रॉय और TISS ने बेंकटेश कुमार के खिलाफ प्राथमिक जांच भी शुरू की थी. फिलहाल यह जांच प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है.

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ( HRD Ministry) ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को विभागीय शिकायत में अपने एक पूर्व संयुक्त सचिव और टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) के एक प्रोफेसर की वित्तीय अनियमितता की बात बताई है. यह मामला राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA) के जरिए राज्यों में संचालित योजनाओं में सामने आई है.

बीते साल TISS के ऑडिट में RUSA फंड के 23 लाख रुपये के कथित तौर पर निजी यात्राओं में खर्च किये जाने का मामला सामने आया था. ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि 1991 बैच के केरल कैडर की आईएएस अफसर ईशीता रॉय और उनके बच्चों ने देश और विदेश की निजी यात्राओं के दौरान ये खर्च किए थे. रॉय मंत्रालय के संयुक्त सचिव और RUSA के नेशनल मिशन डायरेक्टर रहते हुए इन यात्राओं पर गई थीं.

सात महीने पहले ईशिता रॉय ने मंत्रालय छोड़ा था. फिलहाल वह केरल की फिशरीज विभाग में प्रिंसिपल सेक्रेट्री के पद पर कार्यरत हैं. ऑडिट में खुलासा हुआ है कि RUSA के नेशनल कॉर्डिनेटर बी वेंकटेश कुमार ने कथित तौर पर योजना के फंड से 2.02 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता को अंजाम दिया था. उन्होंने 1.26 करोड़ रुपये के खर्च दिखाने के लिए हाथ से लिखे टैक्सी बिल जमा किए थे.

कुमार को हटाने के बाद सबने साधी चुप्पी

TISS के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड लेबर स्टडीज के अंतर्गत सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एंड गवर्नेंस के चेयरपर्सन वेंकटेश कुमार को 27 जुलाई, 2019 को RUSA के नेशनल कॉर्डिनेटर पद से हटा दिया गया था. इंस्टिट्यूट ने उन्हें अगस्त, 2019 में शो-कॉज नोटिस भी दिया गया था. उनकी जगह योजनाओं का काम देखने के लिए यूजीसी की पूर्व संयुक्त सचिव सुनीता सिवाच को नेशनल कॉर्डिनेटर बनाया गया था.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक मंत्रालय ने बीते साल ही इस मामले को पीएमओ के संज्ञान में लाया था. मंत्रालय ने ईशिता रॉय और TISS ने बेंकटेश कुमार के खिलाफ प्राथमिक जांच भी शुरू की थी. फिलहाल यह जांच प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है. TISS के रजिस्ट्रार पी बालामुरुगन ने इस मामले में चुप्पी साधे रखी है. वहीं रॉय और कुमार भी इन मामलों में कोई जवाब नहीं दे रहे.

अभियान के लिए हर साल 1500 करोड़ देती है केंद्र सरकार

केंद्र सरकार की ओर से RUSA स्कीम को अक्टूबर, 2013 में लॉन्च किया गया था. इसके तहत राज्यों में उच्चतर शिक्षा को बढ़ावा दिया जाने की योजना थी. अभियान के तहत राज्यों की यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को एक्सिलेंस बढ़ाने के लिए आर्थिक मदद दी जाती है. साल 2016-17 से इस योजना के तहत केंद्र हर साल 1500 करोड़ रुपये उपलब्ध करवा रही है.

साल 2013 के नवंबर महीने से TISS इस अभियान को अमल में लाने वाली एजेंसी थी. सरकार के साथ इसके MoU के मुताबिक इंस्टिट्यूट को सारे खर्च और रिबंर्समेंट क्लेम की रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपी जाती है. साल 2013 में इसके लिए वेंकटेश कुमार को RUSA के नेशनल कॉर्डिनेटर पद पर नियुक्त किया गया था. इनके कथित भ्रष्टाचार को मंत्रालय में रॉय के संयुक्त सचिव रहने के दौरान ही अंजाम दिया गया था.

TISS के डाइरेक्टर ने मंत्रालय से की ऑडिट करवाने की मांग

जुलाई, 2019 में मंत्रालय और TISS की बैठक में इंस्टिट्यूट के डाइरेक्टर ने फंड के खर्च में अनियमितता के मामले को उठाया था और इसके लिए पूरी ऑडिट किए जाने की मांग की थी. नेशनल कॉर्डिनेटर को देश-विदेश में सेमिनार या कॉन्फ्रेंस करने सहित विभिन्न मामलों को पूरा किए जाने का काम दिया गया था. उनके कार्यकाल में उन्होंने दिल्ली और विदेश में अपने रहने के खर्च को तौर पर 2.02 करोड़ रुपये का एडवांस निकाला था. इसके लिए जमा किए गए कागजात शक के घेरे में आ गए.

उन्होंने टैक्सी बिल के लिए हाथ से लिखे 1,76, 996 अमेरिकी डॉलर यानी करीब 1.2 करोड़ खर्च के कागज जमा किए. इनमें 2,300 डॉलर यानी करीब 1.6 लाख रुपये का खर्च उन्होंने दो दिन के दौरे में सैन फ्रांसिस्को और पेंसेल्विनिया जाने और आने के दौरान किया खर्च शामिल है. ऑडिट के दौरान यह शक के घेरे में आ गया. लगभग 10 हजार किलोमीटर की इन यात्राओं में आना-जाना तो उड़ानों के जरिए हुआ तो फिर टैक्सी में इतना खर्च कैसे हो सकता है. कुमार की दूसरी विदेश यात्राओं में हुए खर्च के कई कागजात संदिग्ध बताए जा रहे हैं.

रॉय और कुमार ने वापस किया खर्च का हिस्सा

सितंबर, 2019 में TISS ने मंत्रालय को बताया कि कुमार ने रॉय और उनके दो बच्चों की यात्राओं पर 23 लाख रुपये के खर्च का बिल जमा किया. बताया जा रहा है कि देश और विदेश की यात्रा की तारीखों में रॉय छुट्टी पर थीं. इन कागजातों में रॉय के बेटे और बेटी की विदेशी और घरेलू यात्राओं पर हुए खर्च को भी शामिल किया गया है और उन्हें मंत्रालय के रिसोर्स पर्सन के तौर पर दिखाया गया है.

ऑडिट के खुलासे के बाद कुमार ने अगस्त और सितंबर, 2019 में कुल 2.02 करोड़ रुपये में 51 लाख रुपये वापस जमा करवा दिए. वहीं रॉय ने कुमार को 6,47,284 रुपये लौटाए. इस रकम को TISS को सौंप दिए गए. रॉय ने अपने बच्चों के एडमिशन के लिए की गई यात्रा बताया. बच्चों पर हुए खर्च के तौर पर 70,116 रुपये भी रॉय ने लौटाए हैं.

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