ब्याज समेत पेंशन और 50 हजार जुर्माना दें हरियाणा रोडवेज के जीएम, 28 साल बाद विधवा को हाईकोर्ट से मिला इंसाफ

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट (High Court) ने कहा कि 28 साल तक विधवा को बकाया पेंशन के अधिकार से वंचित रखा गया. राज्य को याचिकार्ता को 1991 से लंबित राशि का भुगतान ब्याज के साथ करना होगा.

हरियाणा रोजवेज के महाप्रबंधक अमरिंदर सिंह को मृतक कर्मचारी की विधवा की बकाया पेंशन के बीच में बाधक बनना महंगा पड़ गया. हरियाणा चंडीगढ़ हाईकोर्ट (High Court) ने अमरिंदर सिंह पर पचास हजार का जुर्माना लगाते हुए उनके खिलाफ अवमानना का केस चलाने का आदेश दिया. इसके साथ ही जुर्माने की राशि अमरिंदर सिंह को अपनी जेब से भरनी होगी. हाईकोर्ट (High Court) के जज हरसिमरन सिंह सेठी ने जुर्माने के साथ ही राज्य की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया.

विधवा (Wido) रामरती पिछले 28 साल से अपने मृतक पति की बकाया पेंशन का इंतजार कर रही थी, 1991 में पति की मौत के बाद महिला को बकाया पेंशन का लाभ नहीं मिला. रामरती ने 2017 में हाईकोर्ट में मुकदमा भी दर्ज किया था. हाईकोर्ट ने रोडवेज विभाग को तीन महीने के भीतर याचिकाकर्ता को पूरी राशि का ब्याज समेत भुगतान करने का निर्देश दिया था, लेकिन तीन महीने पूरे होने के बाद रोजवेज महाप्रबंधक ने पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी, हालांकि कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि जानबूझकर कोर्ट के आदेश की अवहेलना की गई है.

28 साल तक विधवा को नहीं मिला इंसाफ-हाईकोर्ट

हाईकोर्ट (High Court) ने कहा कि राज्य ने 28 साल तक महिला को उसके पेंशन के अधिकार से वंचित रखा गया. विधवा रामरति ने अपने पति की पेंशन के लिए लंबा संघर्ष किया, राज्य के खिलाफ कानूनी लड़ाई जीतने के बाद भी पीड़ित महिला को न्याय नहीं मिला. इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य को याचिकार्ता को 1991 से लंबित राशि का भुगतान ब्याज के साथ करने का निर्देश दिया.

जज सेठी ने कहा कि एक दशक से भी पहले रामरति ने एक याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने अपने पति की मृत्यु के बाद उनके बेटे के लिए कंपनसेशन की अपील की थी. सितंबर 2010 में कोर्ट ने उनके बेटे को कंपनसेशन देने का निर्देश दिया, जिसके बाद वह पेंशन लाभ के लिए फिर से अदालत चली गई.

‘विधवा को दी जाए 1991-2017 तक की बकाया पेंशन’

कोर्ट (Court) में सुनवाई के दौरान राज्य ने पीड़ित महिला को उसके पति द्वारा दी गई सेवाओं के लिए 1991 से जनवरी 2017 तक पेंशन लाभ देने का फैसला किया. इसके साथ ही एक समीक्षा याचिका दायर की, जिसमें दावा किया गया कि ब्याज के साथ पेंशन लाभ के अनुदान की समीक्षा की जानी चाहिए.

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