हरियाणा चुनाव: अंबाला के इतिहास में पहली बार, चुनावी मैदान में ये ट्रांसजेंडर कैंडिडेट

ट्रांसजेंडर मॉडल लतिका दास हरियाणा की अंबाला कैंट सीट पर चुनाव लड़ रही हैं. वह बीजेपी के दिग्गज नेता और हरियाणा सरकार में मंत्री अनिल विज को चुनौती दे रहीं हैं.

हरियाणा विधानसभा चुनाव-2019 के चुनावी मैदान में कई सारे नए-नए चेहरे आपको दिखाई देगें, जहां इन्हीं नए चेहरों में एक और नया चेहरा आपको दिखने वाला है, वो चेहरा है एक ट्रांसजेंडर मॉडल का. ट्रांसजेंडर मॉडल लतिका दास हरियाणा की अंबाला कैंट सीट पर चुनाव लड़ रही हैं. लतिका दास को भारतीय जन सम्मान पार्टी ने टिकट दिया है.

वह बीजेपी के दिग्गज नेता और हरियाणा सरकार में मंत्री अनिल विज को चुनौती दे रहीं हैं. वहीं अंबाला कैंट सीट पर यह पहला मौका है, जब कोई ट्रांसजेंडर (किन्नर) इस सीट की सत्ता को हासिल करने उतरा है. लतिका दास चुनाव को लेकर इन दिनों प्रचार में ताबड़तोड़ तरीके से जुटी हुई हैं.

विरोधियों को टक्कर देने को तैयार

अंबाला के इतिहास में पहला मौका है, जब भारतीय जन सम्मान पार्टी (BJSP) ने छावनी विधान सभा से एक ट्रांसजेंडर कैंडिडेट (किन्नर) को चुनाव मैदान में उतरा है. BJSP के उम्मीदवार लतिका दास अपने विरोधियों को टक्कर देने को तैयार हैं. वे अंबाला छावनी में सियासी पार्टियों द्वारा दरकिनार किए जाने वाले किन्नर समाज का भला करना चाहती हैं, उनके मन में इसी बात का दर्द है कि उनके समाज के लोग ही उन्हें समर्थन नहीं दे रहे हैं.

समाज को सुधारना चाहती हैं

वैसे तो देश में और भी किन्नर समाज से लोग राजनीति में आ चुके हैं, लेकिन लतिका दास का कहना है कि वे एक पढ़ी लिखीं पेशे से मॉडल हैं और वे अपने समाज के लोगों की तरह ताली बजाकर, बधाई लेकर गुजर बसर करने की जगह अपनी मेहनत के बूते आगे बढ़कर अपने समाज को सुधारना चाहती हैं.

हक की लड़ाई लड़ना चाहती हैं

लतिका का कहना है कि वे समाज में फैले युवाओं में नशे को छुड़ाने का काम करेंगी. वे समाज में फैली बुराई को मिटाना चाहतीं हैं. पूरी तरह समाज सेवा में रहकर गरीब, किसान, बेरोजगार, मजदूर और अन्य लोगों के हक की लड़ाई लड़ना चाहती हैं. लेकिन उन्हें इस बात का अफसोस है कि जिस समाज से वे हैं और उनके कल्याण के लिए काम करना चाहतीं हैं वो समाज ही उसको सपोर्ट नहीं कर रहा है.

बीजेपी से अनिल विज मैदान में

वहीं BJP के 5 बार विधायक और मौजूदा स्वास्थ मंत्री इस बार फिर मैदान में है. हरियाणा बीजेपी में अनिज विज एक क़द्दावर और तेज़ तरार नेता के तौर पर जाने जाते है. अनिल विज के तेज़ तर्रार स्वभाव के चलते ही उनके विरोधी उनके सामने घुटने टेकते हैं. हरियाणा की खट्टर सरकार बनने पर विज को खेल और स्वास्थ्य विभाग सौंपा गया. विज हमेशा से अंबाला केंट से चुनाव लडते हैं.

लगातार जीत हांसिल की

अंबाला विधानसभा की पांच सीटें बेशक घटकर चार रह गईं, लेकिन आजाद उम्मीदवार को अंबाला के मतदाताओं ने मात्र अंबाला छावनी सीट से ही जीत का तोहफा दिया. छावनी सीट से अनिल विज दो बार बतौर आजाद उम्मीदवार जीतकर विधानसभा तक पहुंचे.

विज ने 1990 में पहली बार चुनाव लड़ा था. उसके बाद वर्ष 1990, 1996, 2000 में लगातार जीत हासिल की. हालांकि इसके बाद 2004 का चुनाव हार गए, लेकिन 2009 में बतौर आजाद और वर्ष 2014 में बीजेपी के टिकट पर जीत हांसिल की. पिछले ३० साल से विज हर रोज़ सुबह सदर बाज़ार में लोकल लोगों के साथ चाय पीने आते हैं.

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