Haryana Election: राहुल गांधी की दूसरी रैली में भी क्यों नहीं पहुंचे भूपेंद्र सिंह हुड्डा?

भूपेंद्र हुड्डा पिछले पांच साल से हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष बनना चाहते थे लेकिन राहुल गांधी के अध्यक्ष रहते ये मुमकिन नहीं हो पाया.

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा राहुल गांधी की दूसरी रैली में भी नहीं पहुंचे या फिर राहुल गांधी नहीं चाहते हुड्डा के साथ मंच साझा करना? हरियाणा के विधानसभा चुनाव में शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने दक्षिण हरियाणा के महेंद्रगढ़ में दूसरी रैली की.

इससे पहले राहुल गांधी ने मेवात के नूह में रैली को संबोधित किया था. लेकिन हुड्डा वहां भी मंच से नदारद थे, हां दीपेंद्र हुड्डा जरूर मौजूद थे. लेकिन फिर भी पार्टी के अंदर ये सुगबुगाहट है कि आखिर हुड्डा राहुल गांधी की रैली के मंच से नदारद क्यों है?

सोनिया गांधी को संबोधित करनी थी रैली
दरअसल, महेंद्रगढ़ की इस रैली को कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी को संबोधित करना था, लेकिन उनकी तबियत खराब होने के कारण राहुल गांधी को इस रैली में भेजा गया. क्या यह महज इत्तेफाक है कि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा राहुल गांधी की दूसरी रैली में भी नहीं पहुंचे?

इससे पहले जब सोनिया गांधी को रैली को संबोधित करना था तो भूपेंद्र हुड्डा का इस रैली में शामिल होना पक्का माना जा रहा था. हुड्डा का नाम भी 18 अक्टूबर की रैली के लिए जारी किया गया था. इसमें विस्तार से लिखा गया था कि भूपेंद्र हुड्डा सोनीपत से हेलीकॉप्टर से उड़ेंगे और महेंद्रगढ़ लैंड करेंगे.

हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष बनना चाहते थे हुड्डा
दरअसल, भूपेंद्र हुड्डा पिछले पांच साल से हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष बनना चाहते थे लेकिन राहुल गांधी के अध्यक्ष रहते ये मुमकिन नहीं हो पाया. लेकिन जैसे ही राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया और सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बनीं तो भूपेंद्र हुड्डा को विधायक दल का नेता बनाया गया. साथ ही इलेक्शन मैनेजमेंट कमेटी की जिम्मेदारी भी दी गई.

गुलाम नबी आजाद ने एक तरह से उन्हें पूरे चुनाव की कमान सौंप दी. लेकिन राहुल गांधी जब अध्यक्ष थे तो हरियाणा के प्रभारी महासचिव कमलनाथ रहे हों या फिर अशोक गहलोत दोनों की तमाम कोशिशों के बाद भी राहुल गांधी ने अशोक तंवर को हरियाणा के अध्यक्ष पद से नहीं हटाया.

विधायक दल के नेता को लेकर भी विवाद
राहुल गांधी उस वक्त भी हुड्डा को विधायक दल का नेता बनाने पर राजी थे लेकिन हुड्डा कभी भी तैयार नहीं हुए. जब अशोक गहलोत कांग्रेस पार्टी के संगठन महासचिव थे तब उन्होंने राहुल गांधी और भूपेंद्र हुड्डा को दिल्ली के ताज मानसिंह होटल में लंच भी करवाया था. ताकि कोई समाधान निकल सके लेकिन पिछले पांच साल में राहुल गांधी और भूपेंद्र हुड्डा के बीच कोई भी निर्णायक बैठक नहीं हो पाई.

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