हरियाणा: सड़कों पर अन्नदाता, केंद्र सरकार के तीन अध्यादेश के खिलाफ ‘किसान बचाओ, मंडी बचाओ’ प्रदर्शन

कुरुक्षेत्र के पीपली की अनाज मंडी में चल रहे इस प्रदर्शन को 'किसान बचाओ, मंडी बचाओ' का नाम दिया है. केंद्र के जिन तीन अध्यादेशों के खिलाफ किसान प्रदर्शन (Farmer Protest) कर रहे हैं, उन्हें 5 जून को तैयार कर लिया गया था.

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में केंद्र सरकार के तीन अध्यादेशों के खिलाफ किसान सड़क पर उतर आए हैं. गुरुवार को इन नाराज किसानों ने दिल्ली-चंडीगढ़ नेशनल हाइवे भी जाम कर दिया था, जिसके बाद पुलिस और किसानों के बीच काफी झड़प भी हुई थी. बावजूद इसके किसान अब भी अपनी मांगों पर डटे हैं.

कुरुक्षेत्र के पीपली की अनाज मंडी में चल रहे इस प्रदर्शन को ‘किसान बचाओ, मंडी बचाओ’ का नाम दिया है. केंद्र के जिन तीन अध्यादेशों के खिलाफ किसान प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें 5 जून को तैयार कर लिया गया था और अब सरकार इन अध्यादेशों को संसद में पेश करने वाली है.

कौनसे हैं वो तीन अध्यादेश?

इन तीन अध्यादेशों में केंद्र सरकार ने फसलों की खरीद के लिए नए नियम तय किए हैं, जिससे किसान नाराज हैं.

  • सबसे पहला है किसान उत्पाद, व्यापार और वाणिज्य अध्यादेश 2020, जिसके मुताबिक, पुराने नियमों के अनुसार, अब तक हर व्यापारी केवल मंडी के जरिए ही किसान की फसलों के खरीद सकता था, लेकिन अगर यह कानून पास हो जाता है, तो इसके बाद व्यापारी मंडी से बाहर भी किसान से फसल खरीद सकता है.
  • दूसरा है आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश. इसमें अनाज, दालों, खाद्य तेल (Edible oil), प्याज, आलू को जरूरी वस्तु अधिनियम से बाहर करके इनकी स्टॉक सीमा खत्म कर दी गई है.
  • इन दोनों के अलावा केंद्र सरकार मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अध्यादेश, 2020 पर ‘किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौते को भी मंजूरी दी है. इसमें सरकार ने कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग को बढ़ावा देने की भी नीति पर काम शुरू किया है.

यही वे तीन अध्यादेश हैं, जिन्हें लेकर किसान में रोष है और प्रदर्शन कर रहे हैं. इस प्रदर्शन में किसानों के साथ कुछ व्यापारी, आढ़ती और मजूदर भी हैं.

किसानों की नाराजगी का मुख्य कारण

ज्यादतर किसानों की नाराजगी पहले अध्यादेश को लेकर है, क्योंकि किसानों का मानना है कि सरकार इसके जरिए उस सिस्टम को खत्म करना चाहती है, जिससे मंडियों में उन्हें फसल बेचने पर न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल जाता था. इस प्रदर्शन में भारतीय किसान संघ और दूसरे किसान संगठनों ने हिस्सा लिया. भारतीय किसान संघ आरएसएस की इकाई है.

किसानों का यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय आया, जब सरकार सोमवार से शुरू होने जा रहे मानसून सत्र में इन तीनों अध्यादेश को पास कराना चाहती है. इसी के चलते अब कुरुक्षेत्र के पीपली सहित आस के सभी इलाकों में पुलिस सुरक्षा बढ़ा दी है और दूसरे इलाकों से आने वाले किसानों और आढ़तियों को पीपली अनाज मंडी नहीं जाने दिया जा रहा है.

“एक देश, एक कृषि बाजार का सपना होगा साकार”

मालूम हो कि केंद्रीय कैबिनेट में सरकार इन फैसलों मंजूरी दिए जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि अब अन्नदाता देश में कहीं भी अपनी उपज को बेच सकेंगे और एक देश, एक कृषि बाजार का सपना साकार होगा.

पीएम मोदी ने ट्वीट कर लिखा, “आज की केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कई बड़े और महत्वपूर्ण निर्णय किए गए. फसलों की खरीद-बिक्री को लेकर सभी बंदिशों को हटा दिया गया है, जिससे किसानों की दशकों पुरानी मांग पूरी हुई है. अब अन्नदाता देश में कहीं भी अपनी उपज को बेचने के लिए स्वतंत्र होगा.”

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