दिल्ली पुलिस ने महिला को ससुराल से निकाला, हाईकोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार

महिला की ओर से अधिवक्ता विजय अग्रवाल और नमन जोशी ने मांग की कि दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के जिन कर्मियों ने महिला को नियमों की अनदेखी करते हुए घर से निकाला है उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए.

delhi hight court
दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने सोमवार को एक महिला को उसके ससुराल से जबरन हटाने के लिए दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई. हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि निर्धारित अवधि समाप्त होने से पहले महिला को बेदखल करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. न्यायमूर्ति नवीन चावला की एकल पीठ ने ससुराल में महिला को वापस कब्जा बहाली का भी निर्देश दिया.

महिला द्वारा दायर की गई याचिका के मुताबिक, जिला मजिस्ट्रेट (दक्षिण) ने 18 सितंबर को उसके निष्कासन के लिए एक आदेश पारित किया था, जिसके बारे में याचिकाकर्ता को 19 सितंबर की शाम को सूचित किया गया था.

याचिका में कहा गया है कि इससे पहले कि याचिकाकर्ता दिल्ली मेंटीनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सीटीजन रूल्स, 2016 के द्वारा दिए गए अधिकार के तहत 30-दिन की अवधि के भीतर अपील कर पाती, दिल्ली पुलिस ने उसे 20 सितंबर को उसके घर जबरन बेदखल कर दिया. वह भी ऐसे समय में जब महामारी फैली है.

दिल्ली पुलिस पर कार्रवाई की मांग

महिला की ओर से अधिवक्ता विजय अग्रवाल और नमन जोशी ने मांग की कि दिल्ली पुलिस के जिन कर्मियों ने महिला को नियमों की अनदेखी करते हुए घर से निकाला है उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए.

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याचिका में यह भी कह गया है कि 18 सितंबर का आदेश घर को 30 दिनों में खाली करने के लिए कहता है. लेकिन इससे पहले कि महिला इस मामले में आगे अपील कर पाती उसे दिल्ली पुलिस के कई अधिकारियों का सामना करना पड़ा, जिनमें महिलाएं भी हैं. इनके द्वारा याचिकाकर्ता को उसके दो बच्चों, दो नौकर और दो कुत्तों के साथ जबरन उसके ससुराल से निकाल दिया गया.

कोर्ट में चलाया गया वीडियो क्लिप

अग्रवाल ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल के साथ घोर अन्याय हुआ है, क्योंकि उन्हें दिल्ली पुलिस के हाथों गैरकानूनी और अनुचित व्यवहार का सामना करना पड़ा. उन्होंने महिला को जबरन बेदखल करने के दौरान का एक वीडियो क्लिप भी कोर्ट में चलाया.

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उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता को दिल्ली पुलिस ने हड़बड़ी में और गैरकानूनी तरीके से निकाला. दिल्ली पुलिस के 10-15 कर्मी मास्क भी लगाए हुए थे.

वकील ने कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम मामले में तहत उनके मुवक्किल के पक्ष में पहले से ही आदेश था. उन्होंने घरेलू हिंसा अधिनियम के संरक्षण और माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के संरक्षण अधिनियम 2007 के बीच संघर्ष की ओर इशारा किया, और तर्क दिया कि दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्णय हैं कि ऐसे मामलों मे समान रूप से सामंजस्य स्थापित किया जाना चाहिए, लेकिन जिला मजिस्ट्रेट ने इस पर विचार नहीं किया.

फिर न मिले कब्जा

दिल्ली पुलिस की ओर से उपस्थित वकील ने कहा कि यह कार्रवाई घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत मजिस्ट्रेट द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों के संदर्भ में की गई थी. दिल्ली पुलिस वरिष्ठ नागरिक को किसी भी दुस्साहस से बचाने को अपना कर्तव्य समझती है.

महिला के ससुर और सास की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि, क्योंकि अब बहू को परिसर से बाहर निकाल दिया गया है, उसे वापस परिसर में लौटने का आदेश नहीं दिया जाना चाहिए. दोनों पक्षों के बीच कई विवाद हैं और इस कारण से उनके मुवक्किल के जान-माल को खतरा हो सकता है.

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