CJI पर आरोप लगाने वाली महिला की जमानत याचिका पर 24 अप्रैल को होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में जूनियर सहायक के तौर पर काम करने वाली एक 35 वर्षीय महिला ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय के 22 जजों को ख़त लिखकर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर कथित यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई पर सनसनीखेज आरोप लगाने वाली उनकी पूर्व जूनियर असिस्टेंट की जमानत रद्द करने के लिए दिल्ली पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट से गुहार लगाई जिसकी सुनवाई 24 अप्रैल को होगी.

दरअसल, चीफ़ जस्टिस की पूर्व जूनियर अस्सिटेंट ने कथित यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं, आरोप लगाने वाली महिला ने सुप्रीम कोर्ट के 22 जजों को एक चिट्ठी भेजी है, जिसमें चीफ जस्टिस गोगोई पर कथित यौन उत्पीड़न करने, इसके लिए राज़ी न होने पर नौकरी से हटाने और बाद में उन्हें और उनके परिवार को अलग- अलग तरह से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं.

छुट्टी के बावजूद खुला कोर्ट

मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुप्रीम कोर्ट की अवकाश होने के बावजूद स्पेशल कोर्ट बैठी और मामले पर सुनवाई की. दूसरी तरफ चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई पर कथित यौन उत्पीडन का आरोप लगाने वाली महिला के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने धोखाधड़ी के मामले में जमानत पर चल रही महिला की जमानत रद्द करने के लिए पटियाला हाउस कोर्ट का रुख किया है.

क्या है पूरा मामला ?

दिल्ली पुलिस की अर्जी में कहा गया है कि 3 मार्च, 2019 को महिला के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक धमकी और आपराधिक साजिश रचने जैसे कई संगीन आरोपों की शिकायत मिलने पर तिलक मार्ग थाने में मामला दर्ज किया गया था.

महिला के खिलाफ शिकायत हरियाणा के रहने वाले नवीन कुमार ने दी थी, नवीन कुमार का आरोप है कि जून 2017 में नौकरी के सिलसिले में एक कॉमन फ्रेंड के जरिए उसकी आरोपी महिला से मुलाकात हुई थी, मुलाकात के दौरान आरोपी महिला ने उसे बताया कि वो सुप्रीम कोर्ट के एक जज की पीए है, और उसका पति पुलिस अधिकारी है.

उसकी अच्छी जान-पहचान है और वो सुप्रीम कोर्ट में नौकरी लगवा सकती है. लेकिन नौकरी के एवज में 10 लाख रुपए देने होंगे, नौकरी के लालच में नवीन ने अपने कॉमन फ्रेंड की मौजूदगी में कथित आरोपी महिला को 50 हजार रूपए नकद एडवांस दे दिए, पुलिस के मुताबिक नवीन का दावा है कि पैसों का लेन-देन कोर्ट परिसर में ही हुआ.

लेकिन पैसे मिलने के तीन महीने बाद भी नवीन को नौकरी के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली, वो एक बार फिर अपने दोस्त के आरोपी महिला से मिलने सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जहां महिला ने उसे बताया कि अभी उसकी नौकरी लगने में थोड़ा वक्त और लगेगा, साथ ही हिदायत दी कि उसे मिलने के लिए कोर्ट में नहीं आना चाहिए अगर वो ऐसा करता है तो उसे झूठे केस में फंसा दिया जाएगा.

धमकी मिलने के बाद और पैसा वापस नहीं मिलने पर नवीन ने तिलक मार्ग थाने में शिकायत दर्ज कराई, पुलिस ने आईपीसी की धारा 420/506 और 120 B के तहत मामला दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी.

पुलिस ने 10 मार्च को आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया और 11 मार्च को न्यायिक हिरासत में भेज दिया, लेकिन 12 मार्च, 2019 को पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा महिला को जमानत दे दी गई, इसी बीच मामले की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई, शिकायतकर्ता ने क्राइम ब्रांच के डीसीपी को बताया कि उसे आरोपी महिला और उसके साथियों द्वारा डराया धमकाया जा रहा है, जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने आरोपी महिला की जमानत रद्द करवाने के लिए पटियाला हाउस कोर्ट में अर्जी दी.

क्या हुआ कोर्ट में ?
पटियाला हाउस कोर्ट के मुख्य महानगर दंडाधिकारी मनीष खुराना की अदालत ने क्राइम ब्रांच की याचिका पर शनिवार को सुनवाई के दौरान मामले में अगली सुनवाई 24 अप्रैल तय की है.

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