कोर्ट ने कर्नाटक सरकार से पूछा- दूसरी जयंतियां मनाने में जब ऐतराज नहीं तो फिर टीपू जयंती पर क्यों?

कोर्ट ने कहा कि आप जनवरी के तीसरे हफ्ते तक बताएं कि दूसरी जयंतियों को मनाने में जब कोई ऐतराज नहीं है तो फिर टीपू सुल्तान की जयंती पर क्यों?

कर्नाटक हाई कोर्ट ने टीपू सुल्तान जयंती नहीं मनाने पर राज्य के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को फटकार लगाई है. कोर्ट ने टीपू जयंती सरकारी खर्चे पर न मनाने के उनके फैसले पर पुनर्विचार करने का आदेश दिया. साथ ही कोर्ट ने हिदायत भी दी कि फैसले ऐसे नहीं लिए जाने चाहिए कि वे एकतरफा लगें.

कर्नाटक के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अभय श्रीनिवास ओका और न्यायाधीश एसआर कृष्ण कुमार की खंडपीठ ने येदियुरप्पा सरकार को निर्देश दिया कि वह टीपू जयंती सरकारी खर्चे पर मनाने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करे. साथ ही जो लोग निजी तौर पर मनाएं उन पर किसी तरह की रोक लगाने का आदेश जारी न किया जाए.

‘बगैर किसी सलाह-मशविरा के लिया निर्णय’
सीएम येदियुरप्पा ने 30 जुलाई को कर्नाटक में टीपू जयंती सरकारी तौर पर मनाने पर रोक लगा दी थी. कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा कि मंत्रिमंडल ने इस पर अपना फैसला नहीं लिया. यानी बगैर किसी सलाह-मशविरा के एक दिन में यह निर्णय लिया गया. फैसला ऐसा नहीं होना चाहिए कि वह एकतरफा लगे.

कोर्ट ने कहा कि आप जनवरी के तीसरे हफ्ते तक बताएं कि दूसरी जयंतियों को मनाने में जब कोई ऐतराज नहीं है तो फिर टीपू सुल्तान की जयंती पर क्यों? इसके साथ ही हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश देते हुए कहा, जो लोग टीपू सुल्‍तान की जयंती राज्‍य में मना रहे हैं, सरकार को उनकी सुरक्षा के लिए कदम उठाने चाहिए.

गौरतलब है कि बीजेपी विधायक एम अपाचू रंजन ने इसे लेकर बेसिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार को एक पत्र लिखा था. इसमें उन्होंने 18वीं सदी में मैसूर पर राज करने वाले शासक टीपू सुल्तान को कन्नड़ विरोधी करार दिया था.

‘इतिहास की किताबों में टीपू का महिमामंडन’
उन्होंने लिखा, “इतिहास की किताबों में टीपू सुल्तान का महिमामंडन किया गया है. हमने किताबों में जो इतिहास पढ़ा है, वह पूरा नहीं है. ये पूरी तरह सत्य भी नहीं है. हमें सबसे पहले अब तक टीपू सुल्तान का जो महिमामंडन किया गया है, उसे रोकना होगा. टीपू सुल्तान कभी भी स्वतंत्रता के लिए नहीं लड़ा.”

बीजेपी सरकार ने सत्ता में आने तीन दिन बाद ही टीपू सुल्तान जयंती को न मनाने का फैसला लिया था. इस फैसले पर कर्नाटक में बहुत बवाल मचा था. इससे पहले की कांग्रेस सरकार टीपू सुल्तान की जयंती 10 नवंबर को मनाती थी.

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