जटा फैलाये, भस्म लगाए ये है विद्वानों का अखाड़ा

प्रयागराज

कुंभ के इस दिव्य धार्मिक माहौल में अखाड़ों की माया किसी से छिपी नहीं रह सकती. यहां सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र अखाड़ों के साधु ही होते हैं. आज हम आपको उस अखाड़े के बारे में बताएंगे, जिसके करीब आधे से ज्यादा साधुओं ने उच्च शिक्षा हासिल की है. यह है निरंजन अखाड़ा, जिसकी स्थापना विक्रम संवत 960 में हुई. रिपोर्ट्स की माने तो इस अखाड़े के पढ़े लिखे साधुओं की लिस्ट में संस्कृत में पारंगत, कानून के जानकार और प्रोफेसर शामिल हैं. इस अखाड़े के कई संन्यासी तो यूजीसी नेट क्लीयर कर चुके हैं जबकि कई पीएचडी भी हैं.

नेट, पीएचडी आम बात
अखाड़े के बनारस, हरिद्वार, उज्जैन, बगलामुखी आदि जगहों में आश्रम हैं. रिपोर्टों के मुताबिक़ इस अखाड़े के स्वामी आनंदगिरी नेट क्लीयर कर चुके हैं और वो बनारस से पीएचडी कर रहे हैं. महेशानंद गिरी जहां भूगोल के प्रोफेसर हैं वहीं पूर्णनाद गिरि कानून और संस्कृत के बेहतरीन जानकार हैं. आनंद गिरि तो आईआईएम शिलॉन्ग और आईआईटी खड़गपुर में व्याख्यान दे चुके हैं.

चल रहे स्कूल, कॉलेज भी
अखाड़े में 150 में से 100 महामंडलेश्वर और डेढ़ हजार में से तक़रीबन ग्यारह सौ संत महंत अच्छी डिग्रीधारी और पढ़े लिखे हैं. अखाड़ा परिषद के मुताबिक़ प्रयागराज और वाराणसी में हमारे पांच स्कूल चल रहे हैं. इनकी सारी व्यवस्था हमारे इन्हीं पढ़े लिखे संतों के ही हवाले हैं, जो अच्छे तरीके से अपने काम को अंजाम दे रहे हैं. हरिद्वार में भी एक संस्कृत कॉलेज है.

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