पहली बार नहीं सस्पेंड हुए सांसद, पहले भी कई सांसदों को करना पड़ा है सस्पेंशन का सामना

सांसदों के आचरण के आधार पर संसद से निलंबन कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार राज्यसभा सांसदों के निलंबन के बाद भी संसद भवन से बाहर नहीं जा रहे ये इस तरह की पहली घटना है.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 9:27 pm, Mon, 21 September 20

किसान बिल पर राज्य सभा में हंगामा, तोड़फोड़ और असंसदीय आचरण के आरोप में विपक्षी दलों के 8 सांसदों का निलंबन हुआ है. हालांकि वो सभी सांसद अब भी अपने निलंबन के विरोध में संसद परिसर में गांधी मूर्ति के सामने विरोध प्रदर्शन में धरने पर बैठ गए हैं.

ये पहला मौका नहीं है जब राज्य सभा सांसदों का निलंबन हुआ हो. इससे पहले भी करीब 10 बार राज्य सभा के सांसदों का निलंबन हो चुका है. इससे पहले राज्य सभा में UPA शासनकाल में महिला विधेयक पर हंगामा, तोड़फोड़ और असंसदीय आचरण के लिए 9 मार्च 2010 को सात सांसदों को निलंबित किया गया था.

एक नजर डालते हैं राज्यसभा में अबतक हुए सांसदों के निलंबन के इतिहास पर-

  • 3 सितंबर 1962 में गोडे मुराहरी को सस्पेंड किया गया था
  • 10 सितंबर 1966 को गोडे मुराहरी को दुबारा और भूपेश गुप्ता को सस्पेंड किया गया था
  • 25 जुलाई 1966 को गोडे मुराहरी को तीसरी बार और राज नारायण को सस्पेंड किया गया था
  • 16 नवंबर 1966 को बीएन मंडल को 10 दिन के लिए सस्पेंड किया गया था
  • 14 दिसंबर 1967 को राज नारायण को दोबारा सस्पेंड किया गया था
  • 12 अगस्त 1972 को राज नारायण को तीसरी बार सस्पेंड किया गया था
  • 24 जुलाई 1974 को राज नारायण को चौथी बार सस्पेंशन का मुंह देखना पड़ा था
  • 29 जुलाई 1987 को पुट्टापगा राधाकृष्ण को सस्पेंड किया गया था
  • वर्ष 2005 में एक स्टिंग ऑपरेशन में फंसे डॉ छत्रपाल सिंह लोधा को सस्पेंड किया गया था
  • 9 मार्च 2010 को 8 सांसदों- कमाल अख्तर, वीरपाल सिंह यादव, एजाज अली, साबिर अली, सुभाष यादव, आमिर आलम खान और नंदकिशोर यादव को सस्पेंशन का मुंह देखना पड़ा था।

बहरहाल सांसदों के आचरण के आधार पर संसद से निलंबन कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार राज्यसभा सांसदों के निलंबन के बाद भी संसद भवन से बाहर नहीं जा रहे ये इस तरह की पहली घटना है.