History of Lord Shiva's disciples Jangam baba, भगवान शिव की जांघ से हुई है इनकी उत्पत्ति,  दान सिर्फ टल्ली में
History of Lord Shiva's disciples Jangam baba, भगवान शिव की जांघ से हुई है इनकी उत्पत्ति,  दान सिर्फ टल्ली में

भगवान शिव की जांघ से हुई है इनकी उत्पत्ति, दान सिर्फ टल्ली में

History of Lord Shiva's disciples Jangam baba, भगवान शिव की जांघ से हुई है इनकी उत्पत्ति,  दान सिर्फ टल्ली में

प्रयागराज

अक्सर आपने देखा होगा कि श्रद्धालु साधु-संतों को दान-भिक्षा देते हैं लेकिन क्या आपने कभी ऐसे साधु देखे हैं जो सिर्फ दूसरे साधुओं से ही दान-भिक्षा लेते हों प्रयागराज में संगम तट पर लगा अर्ध कुम्भ अपनी अलौकिकता के चरम पर है और यही इसकी खूबसूरती भी है, जो सालों बाद लोगों को देखने को मिलती है. सभी संस्कृतियों का संगम कहे जाने वाले इस मेले में साधु और तमाम अखाड़े श्रद्धालुओं को अपनी तरफ आकर्षित कर रहे हैं. और इन्हीं अखाड़ों में ‘जंगम बाबाओं’ को देख लोग आश्चर्य से पूछ रहे हैं कि ये सबसे अलग दिखने वाले साधु आखिर कौन हैं?

जंगम साधु शैव संप्रदाय से जुड़े होते हैं, जो सिर्फ शिवजी की पूजा अर्चना करते हैं और केवल साधु-संतों से ही दान भिक्षा लेते हैं. ये देशभर में दूसरे अखाड़ों के साधुओं से ही दान लेते हैं और इस दान के सहारे ही जीवन जीते हैं. कुंभ के दौरान पूरे 13 अखाड़े एक जगह मौजूद हैं, ऐसे में ये जंगम साधु सभी 13 अखाड़ों में जाकर भिक्षा मांगते देखे जा सकते हैं.

दान सिर्फ टल्ली में

सिर पर दशनामी पगड़ी, तांबे-पीतल के बने गुलदान में मोर पंखों का गुच्छा, कुछ ऐसी ही होती है जंगम साधुओं की वेशभूषा. इन साधुओं की भिक्षा मांगने की अपनी खास शैली है. ये अखाड़ों में साधु-संतों को शिव भक्ति से जुड़े भजन और शिव पुराण सुनाते हैं. हाथ में खझड़ी, मजीरा, घंटियां लिए साधुओं का दल अपनी धुन में मस्त चलता रहता है. और जब कोई साधु दान देता है तो हाथ में थामी टल्ली ( घंटीनुमा यंत्र) को उलटकर उसमें दान स्वीकार करते हैं. ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव ने जंगम साधुओं से कहा था कि कभी भी माया को हाथ में नहीं लेना, इसलिए दान को हाथ में ना लेकर टल्ली में लेते हैं.

ऐसे हुई उत्पत्ति

जंगम साधुओं का नाम ‘जांघ’ से पड़ा है. माना जाता है कि इन साधुओं की उत्पत्ति शिव जी की जांघ से हुई थी. कहा जाता है कि जब शिव-पार्वती का विवाह हो रहा था तो भगवान शिव ने पहले विष्णु और फिर ब्रह्माजी को विवाह कराने हेतु दक्षिणा देनी चाही तो दोनों ने उसे स्वीकार नहीं किया. तब भगवान शिव ने अपनी जांघ काटकर जंगम साधुओं को उत्पन्न किया और फिर इन साधुओं ने ही महादेव से दक्षिणा लेकर शिव-पार्वती विवाह में गीत गाए और बाकी रस्में पूरी कराईं.

हर परिवार से एक

मेले में इन बाबाओं के एक दल में 10-12 सदस्य दिखाई देते हैं. ऐसे दर्जनों दल यहां आए हुए हैं. देशभर में इन साधुओं की आबादी 5 से 6 हज़ार के बीच है और सिर्फ जंगम साधु का बेटा ही जंगम साधु बन सकता है. पूछने पर एक जंगम साधु ने बताया कि हर पीढ़ी में हर जंगम परिवार से एक सदस्य साधु बनता है, जिससे इनका कुनबा सदियों से बढ़ता चला आ रहा है.

History of Lord Shiva's disciples Jangam baba, भगवान शिव की जांघ से हुई है इनकी उत्पत्ति,  दान सिर्फ टल्ली में
History of Lord Shiva's disciples Jangam baba, भगवान शिव की जांघ से हुई है इनकी उत्पत्ति,  दान सिर्फ टल्ली में

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