राहुल गांधी, शिवसेना को अच्छे लगने लगे क्योंकि रास्ते की परवाह की तो मंजिल बुरा मान जाएगी

इस ट्वीट पर शिवसेना को कड़ी प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ रहा है. ट्विटर यूजर्स उन्हें सत्ता का भूखा बता रहे हैं.

महाराष्ट्र में सत्ता पाना ही क्या शिवसेना की मंज़िल है और इसे पाने के लिए पार्टी कोई भी रास्ता लेने को तैयार है? शिवसेना सांसद संजय राउत के ताज़ा बयान से तो कुछ ऐसा ही लगता है. राउत ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, ‘रास्ते की परवाह करूंगा तो मंज़िल बुरा मान जाएगी.’

इस ट्वीट पर शिवसेना को कड़ी प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ रहा है. ट्विटर यूजर्स उन्हें सत्ता का भूखा बता रहे हैं.

कुछ लोगों ने बाला साहब ठाकरे का एक वीडियो साझा किया है जिसमें वो कांग्रेस की बुराई करते नज़र आ रहे है.

शिवसेना को महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यिारी की तरफ से रविवार को सरकार बनाने का न्योता मिला है. उनसे पूछा गया है कि क्या वो सरकार बनाएंगे? अगर हां तो कैसे?

शिवसेना को सोमवार शाम साढ़े सात बजे तक जवाब देना है. जिसके बाद मोदी कैबिनेट में शिवसेना के इकलौते मंत्री अरविंद सावंत ने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

दरअसल महाराष्ट्र में पवार के नेतृत्व वाली पार्टी ने शर्त रखी थी कि शिवसेना को पहले बीजेपी-नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से बाहर निकलना होगा, फिर उसको समर्थन देने पर कोई चर्चा होगी.

ऐसे में अरविंद सावंत के इस्तीफे की पेशकश के बाद महाराष्ट्र में सरकार बनने का रास्ता साफ होता दिख रहा है.

इससे पहले शिवसेना के मुखपत्र सामना में, अयोध्या के बहाने राहुल गांधी की तारीफ करना शिवसेना की बदलती राजनीतिक सोच को दिखा रही है.

सामना में लिखा है, ‘अब सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या में मस्जिद के लिए जो 5 एकड़ जमीन दी है उस पर बननेवाली मस्जिद की पहचान बाबर के नाम पर नहीं होनी चाहिए. इस देश में कई मुसलमान संत और नेता हुए. उनके नाम पर इस नए प्रार्थनास्थल का निर्माण करें, यही राष्ट्रीय कार्य सिद्ध होगा. बाबर का निशान पहले शिवसैनिकों ने मिटाया अब राष्ट्रवादी मुसलमान मिटाएं. कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने अत्यंत शालीनता से इस निर्णय का स्वागत किया है. अयोध्या का निर्णय देश की सर्वोच्च न्यायालय ने दिया है उस निर्णय का सम्मान करेंगे, ऐसा राहुल गांधी ने कहा है. यह सामंजस्यपन है. ऐसा सामंजस्य ओवैसी जैसे नेता को दिखाने में कोई हर्ज नहीं था.’

वहीं ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) पर निशाना साधते हुए लिखा, ” ‘पांच एकड़ जमीन की खैरात नहीं चाहिए.’ ऐसा वे भाषण में कहते हैं. हमलावर बाबर के नाम पर पांच एकड़ जमीन की खैरात देने की दिलदारी सिर्फ हिंदुस्तान ही दिखा सकता है. यह श्रद्धा की सत्य पर विजय है, ऐसी बांग भी ओवैसी देते हैं. यह श्रद्धा का ही निर्णय है तथा ओवैसी के तथाकथित सत्य का मकबरा अफगानिस्तान में पड़ा है. हिंदुओं की श्रद्धा और विश्वास के कारण श्री प्रभु राम का जन्म अयोध्या में हुआ यह सर्वोच्च न्यायालय ने स्वीकार किया. पुरातत्व विभाग के तमाम दावे कोर्ट ने स्वीकार किए. मंदिर ध्वस्त करके मस्जिद का निर्माण किया गया था, ऐसा पुरातत्व विभाग सिद्ध नहीं कर पाया. यह सत्य है. लेकिन मस्जिद अयोध्या में खाली जगह पर बनाई गई थी, इसी तरह मस्जिद के नीचे की संरचना इस्लामिक नहीं थी बल्कि हिंदू थी इसे न्यायालय ने स्वीकार किया. कोई नमाज पढ़ता था इसका प्रमाण नहीं है, बल्कि 1856 से पहले उस विवादित भूखंड पर एक चबूतरा था और उस पर हिंदुओं द्वारा नियमित पूजा की जाती थी. इसे न्यायालय ने सबूत के तौर पर देखा है. अयोध्या के राजा राम थे तथा प्रभु राम को कोर्ट ने एक तरह से मान लिया है. राम के पक्ष में देश खड़ा हुआ. आज देश जीत गया है और अयोध्या में श्रीराम का आगमन हो गया. राम अयोध्या पहुंचे तब दिवाली मनाई गई थी. आज राम को उनका जन्मस्थान एक बार फिर मिल गया है इसलिए देव दीपावली मनाएंगे!”

सामने में आगे लिखा, ‘मुसलमान शांति रखें, ऐसा जब हम कहते हैं तब हिंदुओं को भी संयम बरतना चाहिए और विजयी उन्माद न दिखाएं, ऐसी भी हम अपेक्षा रखते हैं. इस समस्या के कारण लगातार रक्तरंजित संघर्ष हुआ. हिंदू-मुसलमान इन दोनों पक्षों के सैकड़ों लोगों ने अपनी जान गंवाई. आज यह सब रुकना चाहिए. भूतकाल भूल जाओ, दोनों पक्ष उज्ज्वल भविष्य का विचार करें. एक बड़ा कालखंड इस संघर्ष में बीत गया. अयोध्या निर्विवाद रूप से प्रभु श्री राम की ही है. यह अधोरेखित होने के बावजूद विदेशी हमलावर बाबर के कारण ये सब हुआ. ये बाबर कौन था? उसका हिंदुस्थान से क्या संबंध था? ये सवाल फिलहाल धर्मांध मुसलमानों को खुद से पूछना चाहिए था? बाबर अफगानिस्तान से यहां हमलावर की हैसियत से आया था और हिंदू संस्कृति का विध्वंस करता रहा. इसी दौरान उसने राम जन्मभूमि का भी विध्वंस किया. यहां कुछ लोगों ने बाबर के नाम पर मस्जिद बना ली. अर्थात इसी बाबर का जो मकबरा आज अफगानिस्तान में है उस मकबरे की अवस्था बेहद दयनीय है. उस बाबर की मस्जिद के लिए यहां मुसलमान विवाद करते हैं ये आश्चर्यजनक है. बाबर कोई मुल्ला, मौलवी या सूफी संत नहीं था. वो एक रक्तपिपासु हमलावर था इसलिए उसके नाम पर किसी धार्मिक स्थल का निर्माण जिसने किया होगा वो शैतान ही होगा. बाबरी मस्जिद मतलब अजमेर शरीफ दरगाह नहीं है.’