आखिर क्यों महेंद्र सिंह धोनी समेत आम्रपाली होम बायर्स ने लगाई प्रधानमंत्री से मदद की गुहार?

धोनी पहले शख्स नहीं हैं जो आम्रपाली ग्रुप के खिलाफ अदालत गए हैं, इससे पहले हजारों बायर्स भी कंपनी पर ठगी का आरोप लगाया है.

नई दिल्ली: घर का सपना देख आम्रपाली बिल्डर के हाथों अपने जीवन भर की जमा पूंजी लुटा चुके 46 हजार पीड़ित होम बायर्स ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाई है. 28 मार्च को लिखे पत्र में होम बायर्स ने लिखा है कि आम्रपाली ग्रुप के हाथों ठगे जाने के बाद होम बायर्स ने नोएडा- ग्रेटर नोएडा ऑथोरिटी और यूपी सरकार के संबंधित विभागों से गुहार लगाई है, शहरी आवास विकास मंत्री और यूपी के सीएम को ज्ञापन दिया, लेकिन समस्या का कोई हल नहीं निकला, जिसके बाद हम सुप्रीम कोर्ट का रुख करने के लिए मजबूर हुए, सुप्रीम कोर्ट ने हम पीड़ितों की शिकायत पर क‌ई अहम कदम उठाएं हैं, मसलन अधूरे पड़े प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का जिम्मा NBCC को देना, फॉरेंसिक ऑडिटर्स की नियुक्ति, आम्रपाली बिल्डर की संपत्तियों की बिक्री द्वारा रकम हासिल करने के लिए DRT की सहायता, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इन तमाम निर्देशों के बावजूद अधूरे पड़े प्रोजेक्ट्स के निर्माण कार्य में सबसे बड़ी दिक्कत फंड की कमी है.

फंड की कमी का दिया बहाना
करीब 46 हजार फ्लेट्स के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए NBCC को तकरीबन 8500 करोड़ रुपए चाहिए, NBCC के मुताबिक अगर शुरुआत में कम-से-कम 250 करोड़ रुपए की राशि भी मिल जाती है तो निर्माण कार्य शुरू हो सकता है और बाद में अभी तक बिना बिकी संपत्ति को बेचकर फंड जुटाया जा सकता है, हालांकि सरकार ने एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया है जिसने पिछले साल 18 जून को नोएडा और ग्रेटर नोएडा के होम बायर्स की दिक्कतों के समाधान के लिए रिपोर्ट भी पेश की है, लेकिन ऐसा लगता है कि ये शिफारिशें महज कागजों तक ही सीमित रह गई हैं और बैंक और किसी ऑथोरिटी ने कोई फंड मुहैया नहीं कराया है, ये अपने आप में बड़ी दुखद और निराशा जनक स्थिति है कि देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा इस मामले को गंभीरता से लिए जाने और NBCC को इसमें शामिल किए जाने के बावजूद बिना पर्याप्त फंड के कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है, ऐसे में इस दुखद स्थिति को देखते हुए बायर्स आपसे ( प्रधानमंत्री ) से गुजारिश करते हैं कि सरकारी नीति के मुताबिक रिजर्व बैंक, बैंकों और दूसरी ऑथोरिटी को निर्देश दें कि वो फिलहाल के लिए फंड मुहैया कराएं ताकि आम्रपाली प्रोजेक्ट्स का काम जल्द से जल्द पूरा हो सके.

महेंद्र सिंह धोनी भी आम्रपाली के खिलाफ पहुंची सुप्रीम कोर्ट
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने भी अपनी बकाया राशि ना मिलने पर आम्रपाली समूह के खिलाफ सुप्रीम में अर्जी दाखिल की है, धौनी ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि साल 2009 से 2015 के बीच वो आम्रपाली ग्रुप के ब्रांड एंबेसडर रहे, लेकिन 2016 में कंपनी से अलग होने के बाद उनकी बकाया तकरीबन 40 करोड़ रुपए का भुगतान आम्रपाली ग्रुप ने नहीं किया, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट मामले में हस्तक्षेप कर उनकी बकाया राशि का भुगतान कराने में मदद करें

कैसे डूबे बायर्स के पैसे ?
देशभर के 40 हजार से ज्यादा होम बायर्स के 3000 हजार करोड़ से ज्यादा की रकम आम्रपाली बिल्डर ग्रुप ने कैसे डुबो दी? इसका पता लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर, 2018 को फॉरेंसिक ऑडिटर्स की नियुक्ति की थी, ऑडिटर्स की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए. रिपोर्ट की मानें तो आम्रपाली ग्रुप के वित्तिय संकट और तबाही के कगार पर पहुंचने का सबसे बड़ा कारण हजारों निवेशकों के साथ 3000 करोड़ रुपये की हेराफेरी ही थी. रिपोर्ट में साफ कहा गया कि निवेशकों के पैसों का इस्तेमाल कंपनी के निदेशकों, अधिकारियों और उनके रिश्तेदारों ने अपने निजी लाभ के लिए किया था. आम्रपाली ग्रुप ने फंड्स की हेराफेरी के लिए 100 से ज्यादा फर्जी कंपनियां बनाईं और फर्जी कंपनियां चपरासी के नाम पर भी खोली गईं थीं.

रिपोर्ट पर गंभीरता दिखाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप से निवेशकों का पैसा वसूलने और अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए ग्रुप की संपतिया नीलाम करने का आदेश दिया, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश देकर आम्रपाली ग्रुप के सीएमडी अनिल शर्मा और दो डायरेक्टर्स जेल भेज दिया.