कुलभूषण जाधव जैसा होता भारतीय इंजीनियर का हाल, सुरक्षा एजेंसियों ने जाल में फंसने से बचाया

ISI का प्‍लान था कि अफगानिस्‍तान में काम करने वाले भारतीय इंजीनियर को संयुक्‍त राष्‍ट्र में एक आतंकी समूह से जुड़ा दिखाया जाए.

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता ने देश को ग्‍लोबल मंच पर शर्मिंदा होने से बचा लिया. एक भारतीय इंजीनियर को फंसा कर, पाकिस्‍तान ने संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा में भारत को आंतकवाद से जोड़ने का प्‍लान बनाया था. हालांकि 7 सितंबर को, उस इंजीनियर को एजेंसियों ने अफगानिस्‍तान से निकाल लिया और पाकिस्‍तान का यह ‘नापाक’ मिशन फेल हो गया.

चीन को इस प्‍लान का पूरा समर्थन था. हिंदुस्‍तान टाइम्‍स में भारतीय अधिकारियों के हवाले से छपी रिपोर्ट के मुताबिक, इस्‍लामाबाद की कोशिश थी कि इसके जरिए भारत और आतंक को जोड़कर दिखाया जाए. साथ ही भारत को ऐसे समय में शर्मिंदा किया जाए जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका में ही हैं और 27 सितंबर को UNGA को संबोधित करेंगे.

भारतीय इंजीनियर को फंसाने के लिए रची गई गहरी साजिश

अफगानिस्‍तान में KEC इंटरनेशनल के लिए काम करने वाले भारतीय इंजीनियर वेणुमाधव डोंगरा को एक आतंकी समूह से जुड़ा दिखाया जाना था. माना जाता है कि यह आतंकी समूह 2015 में पाकिस्‍तान एयरबेस पर हमले में शामिल था, जिसमें 29 लोग मारे गए थे.

भारतीय इंजीनियर को फंसाने की साजिश पाकिस्‍तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) ने रची. प्‍लान ये था कि अफगानिस्‍तान में काम कर रहे इंजीनियर को संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 सैंक्‍शंस कमेटी में लिस्‍टेड कराया जाए. भारतीय डिप्‍लोमेट्स को इस बात की भनक तक नहीं थी क्‍योंकि भारत इस कमेटी का सदस्‍य नहीं है.

डोंगरा अब भारत आ चुके हैं, मगर KEC के छह कर्मचारी अभी भी तालिबान के कब्‍जे में हैं. अगर डोंगरा को वहां से नहीं निकाला गया होता तो शायद उन्‍हें ISI अफगानिस्‍तान से अगवा कर चुकी होती. ठीक वैसे ही जैसे कुलभूषण जाधव को ईरान से अगवा किया गया था. इस्‍लामाबाद ने 2018 में दावा किया था कि जाधव को बलूचिस्‍तान से अरेस्‍ट किया गया था. जाधव पर पाक ने जासूसी और आतंकवाद का आरोप लगाया था.

डोंगरा का पहला प्रोजेक्‍ट अफगानिस्‍तान में ही था और वह अब पूरा हो चुका है. भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, ISI ने डोंगरा की आतंकी गतिविधियों को लेकर पूरी कहानी का डॉजियर भी तैयार कर लिया था. उसे कई पाकिस्‍तान-विरोधी समूहों का फायनेंसर और हथियारों का सप्‍लायर दिखाया जाना था.

पेशावर में 11 मार्च की तारीख में डोंगरा के खिलाफ एक फर्जी केस दर्ज कराय गया. डोंगरा पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्‍तान से टूटे तारिक गीदर ग्रुप को हथियार/विस्‍फोटक सप्‍लाई करने का आरोप लगाया गया था. इस समूह को पेशावर आर्मी स्‍कूल पर हुए हमले का जिम्‍मेदार ठहराया जाता है.

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