कैबिनेट समितियों का क्‍या है काम? जानिए क्‍यों हर सरकार करती है इनका गठन

अधिकतर कैबिनेट समितियां अस्‍थायी होती हैं यानी सरकार बदलने के साथ ही इसके सदस्‍य भी बदल जाते हैं.

नई दिल्‍ली: केंद्र सरकार ने 8 कैबिनेट समितियों का गठन कर दिया है. इस बार ‘निवेश’ और ‘रोजगार और कौशल विकास’ नाम से दो नई समितियां बनाई गई हैं. आखिर ये कैबिनेट समितियां क्‍यों बनाई जाती हैं और इनका काम क्‍या होता है, आइए जानते हैं.

क्‍यों बनती हैं कैबिनेट समितियां?

गवर्नमेंट ऑफि इंडिया ट्रांजेक्‍शन ऑफ बिजनेस रूल्‍स, 1961 के हिसाब से देश की कार्यपालिका काम करती है. काम-काज सुचारू ढंग से चले, इसके लिए प्रधानमंत्री विभिन्‍न समितियों का गठन कर सकते हैं.

प्रधानमंत्री के पास यह अधिकार होता है कि वह समितियों की संख्‍या में कमी या बढ़ोतरी कर सकते हैं. प्रधानमंत्री के पास यह भी अधिकार होता है कि वह कैबिनेट के इतर भी सांसदों को समितियों में शामिल कर सकते हैं.

कैबिनेट समितियां अस्‍थायी होती हैं यानी सरकार बदलने के साथ ही इसके सदस्‍य भी बदल जाते हैं. मंत्रियों की एड-हॉक समितियां बनाने का भी प्रावधान है. इनका गठन किसी विशेष मुद्दे पर चर्चा के लिए कैबिनेट या प्रधानमंत्री द्वारा किया जाता है.

नियम के अनुसार, अगर कोई विषय ऐसा है जिसके लिए एक से ज्‍यादा विभागों की सहमति चाहिए तो फैसला कैबिनेट समितियां करतीं हैं. कैबिनेट समितियों का काम नीतिगत मुद्दों पर चर्चा करना और उन्‍हें अंतिम रूप देना है. इनके विषय राजनीति, सुरक्षा, अर्थव्‍यवस्था से लेकर नियुक्तियों तक हो सकते हैं.

किसने बनाई कितनी समितियां?

प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समय ‘राजनीतिक’ और ‘आर्थिक’ दो ही कैबिनेट समितियां बनाई गई थीं. बाद में इसमें तीन- सुरक्षा, आवास और नियुक्तियां समितियां और जोड़ी गईं. पीवी नरसिम्‍हा राव के प्रधानमंत्री रहते 13 कैबिनेट समितियां बनाई गई थीं.

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय 12 कैबिनेट समितियां हुआ करती थीं. मोदी जब प्रधानमंत्री बने तो उन्‍होंने अधिकांश समितियों को खत्‍म कर दिया और छह समितियां बरकरार रखीं- सुरक्षा, अर्थव्‍यवस्‍था, राजनीतिक मामले, संसदीय मामले, नियुक्तियां और आवास.

क्‍या काम करती हैं प्रमुख समितियां?

नियुक्तियां: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता वाली इस कैबिनेट समिति को सबसे महत्‍वपूर्ण माना जाता है. ऐसा इसलिए क्‍योंकि यह समिति देश के महत्‍वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां करती है. तीनों सेनाओं के प्रमुख, मिलिट्री ऑपरेशंस के महानिदेशक, सभी वायु और सेना कमानों के प्रमुख, डिफेंस इंटेलिजेंस एजंसी के महानिदेशक, रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार, ऑर्डिनेंस फैक्‍ट्री के महानिदेशक, रिजर्व बैंक के गवर्नर, रेलवे बोर्ड्स के चेयरमैन और सदस्‍यों, सरकारी उपक्रमों के मुख्‍य सतर्कता अधिकारियों और केंद्रीय सचिवालय के संयुक्‍त सचिवों की नियुक्तियां यह कैबिनेट समिति करती है.

सुरक्षा: कानून-व्‍यवस्‍था, आंतरिक सुरक्षा और नीतिगत मामले देखना इस समिति का काम है. यह कैबिनेट समिति राष्‍ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आर्थिक और राजनैतिक मामलों पर भी चर्चा करती है. 1,000 करोड़ रुपये से ज्‍यादा के रक्षा खर्च के सभी मामलों को यह समिति देखती है. इसके अलावा रक्षा उत्‍पादन, रिसर्च और सुरक्षा से जुड़े उपकरणों की खरीद पर भी सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति फैसले करती है.

आर्थिक मामले: यह समिति आर्थिक ट्रेंड्स, समस्‍याओं और संभावनाओं पर विचार करती है ताकि एक ‘सुसंगत और एकीकृत आर्थिक नीति विकसित’ की जा सके. यह समिति कृषि उत्‍पादों और जरूरी चीजें के दाम तय करने पर फैसला लेती है. 1,000 करोड़ रुपये से ज्‍यादा के निवेश के प्रस्‍तावों पर यही समिति विचार करती है.

आवास: यह कैबिनेट समिति सरकारी आवासों के आवंटन से जुड़े नियम तय करती है. यह अयोग्‍य व्‍यक्तियों और संस्‍थाओं के लिए सरकारी आवास के आवंटन और किरायेदारी से जुड़े फैसले कर सकती है. यह समिति केंद्रीय सरकार के कार्यालयों को दिल्‍ली से बाहर शिफ्ट करने के प्रस्‍तावों पर भी चर्चा करती है.

संसदीय मामले: यह समिति संसद सत्रों की तारीखें तय करती है और संसद के भीतर सरकारी काम-काज पर नजर रखती है. सदन में कौन सा बिल और प्रस्‍ताव पेश होना है, उसका फैसला भी यह समिति करती है.

रोजगार और कौशल विकास: इस समिति का काम कौशल विकास से जुड़ी सभी नीतियों, कार्यक्रमों, योजनाओं और पहलों के लिए निर्देश देना होगा. यह पैनल रोजगार में बढोतरी, वर्कफोर्स हिस्‍सेदारी बढ़ाने, विभिन्‍न क्षेत्रों में कौशल की जरूरत और उपलब्‍धता के बीच अंतर दूर करने के लिए भी काम करेगा.

निवेश: यह नई कैबिनेट समिति बुनियादी ढांचे और विनिर्माण से जुड़े 1,000 करोड़ रुपये या ज्‍यादा के निवेश वाले मुख्‍य प्रोजेक्‍ट्स की पहचान करेगी. समिति अप्रूवल और मंत्रालयों के क्लियरेंस की समय-सीमा तय करेगी. ऐसे प्रोजेक्‍ट्स की मॉनिटरिंग भी यही समिति करेगी.

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