अजीम प्रेमजी: पढ़ाई छोड़ पुश्‍तैनी कारोबार संभाला, तेल बेचने वाली Wipro को बनाया टॉप की IT फर्म

2013 में अजीम प्रेमजी ने वादा किया था कि वह कम से कम अपनी आधी संपत्ति दान कर देंगे.

नई दिल्‍ली: देश की सबसे बड़ी IT फर्म्‍स में से एक, Wipro Technologies के चेयरमैन अजीम प्रेमजी ने रिटायरमेंट की घोषणा कर दी है. 73 साल की उम्र में जब वह Wipro को अलविदा कहेंगे तो कुकिंग ऑयल बनाने वाली एक कंपनी को देश की टॉप IT फर्म के रूप में स्‍थापित करने का वह सफर जेहन में जरूर होगा. जैसा अक्‍सर कारोबारी घरानों में होता है, अजीम प्रेमजी के बाद उनके बेटे रिशद प्रेमजी Wipro की कमान संभालेंगे.

अजीम प्रेमजी ने पढ़ाई बीच में छोड़कर कारोबार संभाला था. जिस उम्र में आकर बच्‍चे यह तय करते हैं कि भविष्‍य किस क्षेत्र में बनाना है, अजीम प्रेमजी यह देख रहे थे कि वह किस सेक्‍टर में कारोबार के लिए उतरना है. एक सामान्‍य कंपनी के मालिक से लेकर 21.5 अरब डॉलर की संपत्ति वाले व्‍यक्ति के रूप में अजीम प्रेमजी का 53 साल का ये सफर ‘स्‍टार्ट-अप कल्‍चर’ वाले युवाओं के लिए प्रेरणा है.

पिता ने ठुकराया था जिन्‍ना का ऑफर

Planning for Pakistan: The Planning Committee of the All India Muslim League 1943-46 नाम की किताब में इतिहासकार इयान टैलबोट लिखते हैं कि पाकिस्‍तान में जब नई सरकार बनी तो मोहम्‍मद अली जिन्‍ना ने अजीम प्रेमजी के पिता हाशिम प्रेमजी को अपना वित्‍त मंत्री बनाने की पेशकश की. प्रेमजी ने जिन्‍ना का ऑफर ठुकरा दिया और भारत में रहकर अपने व्‍यापार को बढ़ाने का फैसला किया.

1945 में मोहम्‍मद हाशिम प्रेमजी ने महाराष्‍ट्र के जलगांव में वेस्‍टर्न इंडिया वेजिटेबल प्रोडक्‍ट्स लिमिटेड (WIPRO) की नींव डाली. यह कंपनी सनफ्लावर वनस्‍पति के नाम से खाद्य तेल बनाती थी. ब्रिटिश राज से आजाद भारत के दूसरे दशक में प्रवेश करने तक, कारोबार ठीक-ठाक चल रहा था. 1966 में हाशिम प्रेमजी अचानक गुजर गये तो पूरे कारोबार का भार संभालने उनके बेटे, अजीम प्रेमजी को बुलाया गया.

अजीम प्रेमजी उस समय अमेरिका की स्‍टैनफर्ड यूनिवर्सिटी में इलेक्‍ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे. सिर्फ 21 साल की उम्र में, पिता के बिजनेस की जिम्‍मेदारी उनके कंधों पर आ गई. पहली जनरल मीटिंग हुई तो एक शेयरहोल्‍डर ने अजीम प्रेमजी की काबिलियत पर सवाल उठाए. उन्‍हें सलाह दी कि अपना हिस्‍सा किसी अनुभवी मैनेजमेंट को बेच दें. अजीम प्रेमजी को शायद यह बात लग गई और वह Wipro को सफल बनाने की कोशिश में जुट गए.

उस समय तक Wipro कुकिंग ऑयल के अलावा, साबुन, बेकरी फैट्स, हेयर केयर उत्‍पाद, हॉइड्रॉलिक सिलेंडर्स और टॉयलेट से जुड़े सामान बनाती थी. इस वक्‍त तक कंपनी 7 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार करती थी. अजीम प्रेमजी ने तय किया कि वह सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में उतरेंगे.

1977 में कंपनी का नाम बदलकर Wipro Products Limited कर दिया गया. 1980 में कंपनी ने IT क्षेत्र में प्रवेश किया. अजीम प्रेमजी ने पाया कि IBM के भारत से जाने के बाद इस क्षेत्र में अपार संभावनाए हैं.

साबुन से सॉफ्टवेयर तक

Wipro ने अमेरिकन कंपनी Sentinel के साथ मिलकर मिनी-कंप्‍यूटर बनाने शुरू कर दिए. अब तक कंपनी का फोकस साबुन के धंधे से हटकर सॉफ्टवेयर पर हो चुका था. 90 के दशक में Wipro ने IT सेक्‍टर में अपनी पहचान बनानी शुरू की. 1994-95 में Wipro की पांच यूनिट्स को ISO 9001 सर्टिफिकेशन मिला. साल 2000 में Wipro न्‍यूयॉर्क स्‍टॉक एक्‍सचेंज में लिस्‍ट हुई. 1997-2002 के बीच Wipro पैसा बनाने के मामले में सबसे आगे रही.

फरवरी 2002 में Wipro भारत की पहली ऐसी सॉफ्टवेयर टेक्‍नोलॉजी एंड सर्विसेज कंपनी बनी, जिसे ISO 14001 सर्टिफिकेट मिला. 2004 में कंपनी ने एक अरब डॉलर से ज्‍यादा का पूंजीकरण हासिल किया. इसी दौरान Wipro ने ऊर्जा के क्षेत्र में भी उतने का फैसला किया. 2005 में अजीम प्रेमजी को उनके योगदान के लिए पद्म भूषण से अलंकृत किया गया था. 2011 में उन्‍हें पद्म विभूषण मिला जो कि देश का दूसरा सर्वोच्‍च नागरिक सम्‍मान है.

अजीम प्रेमजी को संपत्ति से कोई लगाव नहीं. वह पहले भारतीय हैं जिन्‍होंने बिल गेट्स और वारेन बफेट द्वारा शुरू की गई The Giving Pledge ली है. 2013 में उन्‍होंने वादा किया था कि वह कम से कम अपनी आधी संपत्ति दान कर देंगे. उसी साल उन्‍होंने बताया था कि वह अपनी संपत्ति का 25 फीसदी से ज्‍यादा दान कर चुके हैं. जुलाई 2015 में उन्‍होंने Wipro में अपनी 18% हिस्‍सेदारी छोड़ दी थी. उन्‍होंने मई 2019 के अंत तक अजीम प्रेमजी भारत की दूसरी सबसे रईस शख्सियत हैं.

अजीम प्रेमजी को TIME मैगजीन दो बार (2011, 2004) दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली व्‍यक्तियों की सूची में शामिल कर चुकी है. उन्‍हें ‘भारतीय आईटी इंडस्‍ट्री का सम्राट’ कहकर पुकारा जाता रहा है.

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