ड्रग्स के मामलों में NCB कैसे करती है जांच? क्या है NDPS एक्ट और कैसे मिलती है सजा? जानें सब कुछ

नशीले पदार्थों (Drugs) के सेवन पर एनडीपीएस एक्ट (NDPC Act) के तहत कार्रवाई होती है, तो हम आपको बताते हैं कि एनडीपीएस एक्ट होता क्या है? इसके तहत खास तौर से तीन तरह की सजाएं होती हैं.

  • फरीद अली
  • Publish Date - 5:52 pm, Thu, 24 September 20

सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) मामले में ड्रग्स कंजम्पशन को लेकर बॉलीवुड के कई बड़े सितारों पर शिकंजा कसता जा रहा है. रिया चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty) पर ड्रग्स लेने और दिलवाने का आरोप लगा, तो नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने एनडीपीएस एक्ट के तहत FIR भी दर्ज करके गिरफ्तारी की. बताया गया कि रिया की मैरिजुआना, एलएसडी और MDMA जैसी प्रतिबंधित नशीली दवाओं को लेकर चैट सामने आई थी.

नशीले पदार्थों के सेवन पर एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई होती है, तो हम आपको बताते हैं कि एनडीपीएस एक्ट होता क्या है?

नशीले पदार्थों के बेचने, बनाने और सेवन को लेकर, जो कानून है. इसका नाम है नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985. शॉर्ट फॉर्म में इसे NDPS एक्ट कहते हैं. इस एक्ट में दो तरह की दवाएं आती हैं- नारकोटिक और साइकोट्रोपिक. बहुत से नशीले पदार्थ ऐसे होते हैं, जिनका उत्पादन जरूरी होता है, लेकिन इन पर कड़ी निगरानी भी रखनी जरूरी है, नहीं तो ज्यादा उत्पादन किया जाएगा और लोगों में नशे की लत बढ़ जाएगी. ऐसे में सरकार एनडीपीएस एक्ट के तहत नशीले पदार्थों पर नियंत्रण करती है.

समय-समय पर भेजी जाती है सरकार को प्रतिबंधित दवाओं की लिस्ट

एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रतिबंधित दवाओं की एक लिस्ट केंद्र सरकार जारी करती है. ये लिस्ट समय-समय पर राज्य सरकारों की सलाह या सिफारिश पर बदलती रहती है. नारकोटिक यानी नींद लाने वाले ड्रग्स नैचुरल होते हैं या प्राकृतिक चीजों से बनते हैं. जैसे- चरस, गांजा, अफीम, हेरोइन, कोकेन, मॉर्फीन वगैरह.

साइकोट्रोपिक यानी दिमाग पर असर डालने वाली ड्रग्स केमिकल बेस्ड होती है, या फिर इन्हें दो-तीन तरह के केमिकल मिलाकर बनाया जाता है, जैसे- एलएसडी, एमएमडीए, अल्प्राजोलम वगैरह.

ये दवाएं या नशीले पदार्थ दवा के तौर पर जीवनरक्षक हैं. लेकिन ज्यादा मात्रा में लेने पर नशा होता है और जान भी जा सकती है. जैसे- अल्प्राजोलम दवा नींद न आने पर दी जाती है, लेकिन इसका ज्यादा सेवन जानलेवा होता है.

क्या है NCB?

एनडीपीएस एक्ट के तहत पुलिस भी कार्रवाई कर सकती है. साथ ही केंद्र और राज्यों में अलग से नारकोटिक्स विभाग बने होते हैं. यह नशीले पदार्थों की तस्करी और इसके अवैध तरीके से इस्तेमाल पर नजर रखते हैं. नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में कार्रवाई करने वाली सबसे बड़ी जांच एजेंसी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो है, जो नशीले पदार्थों का मामला होने पर देश में कहीं भी जांच कर सकती है. इसकी स्थापना 17 मार्च, 1986 को हुई थी.

एनडीपीएस एक्ट के तहत खास तौर से तीन तरह की सजाएं होती हैं. ये सजा प्रतिबंधित पदार्थों की मात्रा के आधार पर होती है.

  • अगर नशीली ड्रग्स का सेवन कम मात्रा में किया गया है, तो एक साल कैद की सजा या 10 हजार रुपए तक का जुर्माना हो सकता है. फिर दोनों हो सकते हैं. हालांकि, इसमें आसानी से जमानत भी मिल जाती है, लेकिन बार-बार पकड़े जाने पर जमानत मिलना मुश्किल हो सकता है.
  • कमर्शियल क्वांटिटी यानी खरीद-फरोख्त के मकसद से नशीले पदार्थ रखने पर एनडीपीएस एक्ट के तहत 10 से 20 साल तक की सजा और एक से दो लाख रुपए तक जुर्माना हो सकता है. इस मामले में पकड़े जाने पर जमानत नहीं मिलती.
  • अगर कम मात्रा और कमर्शियल क्वांटिटी के बीच की मात्रा में किसी के पास ड्रग्स मिलने पर 10 साल तक की सजा या एक लाख रुपए तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं. ऐसे मामलों में जमानत मिलना या न मिलना पकड़े गए नशीले पदार्थ और पुलिस की धाराओं पर निर्भर करता है.

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इसमें पेंच ये है कि नशीले पदार्थों की कम मात्रा या कमर्शियल मात्रा अलग-अलग हो सकती है, जैसे एक किलो गांजा और 2 ग्राम कोकेन, दोनों अल्प मात्रा वाले अपराध में आते हैं. नशे के टाइप के हिसाब से मात्रा तय की जाती है. तो अब ये भी जान लीजिए कि कौनसी ड्रग्स की कितनी मात्रा कमर्शियल या अल्प मात्रा मानी जाती है.

  • 100 ग्राम तक चरस अल्प मात्रा में और 1 किलो कमर्शियल मात्रा में आती है.
  • दो ग्राम कोकेन अल्प मात्रा में और 100 ग्राम कमर्शियल में आती है.
  • एक किलो गांजा अल्प मात्रा है तो 20 किलो गांजे को कमर्शियल माना जाता है. CBD Oil गांजे के तेल को ही कहते हैं.
  • पांच ग्राम तक हेरोइन अल्प मात्रा में और 250 ग्राम कमर्शियल क्वांटिटी में शामिल किया गया है.
  • पांच ग्राम मॉर्फिन कम मात्रा में जबकि 250 ग्राम मॉर्फिन कमर्शियल में आती है.
  • 25 ग्राम अफीम की अल्प मात्रा है तो 2.5 किलो अफीम की कमर्शियल मात्रा है.
  • 10 ग्राम कोडिन को अल्प मात्रा तो 1 किलो कोडिन कमर्शियल माना जाता है.
  • वहीं आधा ग्राम MDMA या म्याऊं की अल्प मात्रा है और 10 ग्राम म्याऊं कमर्शियल माना जाता है.

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