जानें, कैसे भारत चीन की हर युद्धनीति को नाकाम कर सकता है

सरहद पर चीनी सेना (PLA) पीछे हटने का नाम नहीं ले रही है.मिलिट्री और डिप्लोमैटिक लेवल की बातचीत में चीन (china) ने ये भरोसा जरूर दिया है कि LAC पर सैनिकों की तैनाती नहीं बढ़ाई जाएगी.

सरहद पर चीनी सेना (PLA) पीछे हटने का नाम नहीं ले रही है.मिलिट्री और डिप्लोमैटिक लेवल की बातचीत में चीन (china) ने ये भरोसा  जरूर दिया है कि LAC पर सैनिकों की तैनाती नहीं बढ़ाई जाएगी.लेकिन आशंका ये भी जताई जा रही है कि रोज-रोज रंग बदलने वाला ड्रैगन सीमा पर लिमिटेड वॉर को अंजाम दे सकता है.अगर ऐसा हुआ तो क्या होगा, कैसे भारत की आर्मी और एयरफोर्स चीन की हर युद्धनीति को नाकाम कर सकती है. पेश है एक रिपोर्ट…

क्या सर्दियों से पहले चीन लद्दाख में जंग छेड़ सकता है? क्या सीमा पर 50 हजार सैनिक तैनात करने चीन किसी बड़े दुस्साहस को अंजाम दे सकता है? एलएसी पर डिसइनगेजमेंट और डिएस्केलेशन की संभावनों को सिरे से खारिज करने वाली चीनी सरकार की नई चाल क्या हो सकती है?

ये वो सवाल हैं जो 130 करोड़ हिंदुस्तानियों के जेहन में घूम रहे हैं. सवाल ये भी है कि जंग के हालात में ड्रैगन का दम निकालने की हमारी तैयारी क्या है? लद्दाख में तैनात 50 हजार चीनी सैनिकों को सबक सिखाने के लिए हमारी स्ट्रैटजी क्या होगी?

लद्दाख में जंग हुई तो रूस की युद्धनीति होगी हावी

जानकार बताते हैं कि अगर लद्दाख में लड़ाई हुई तो दोनों देशों पर रूस की युद्धनीति हावी होगी, क्योंकि जिनपिंग की रणनीति पर रूसी वॉर गेम की छाप दिख रही है, और भारत की सेना भी उसी नीति से चीन को मात देने की तैयारी कर चुकी है.

बताया जा रहा है कि चीन अगर जंग छेड़ता है तो सबसे पहले रेड आर्मी तोप और रॉकेट से हमला कर सकती है, जबकि जमीन से आसमान में मार करने वाली मिसाइलों से ड्रैगन आर्मी भारतीय वायु सेना के हमलों से अपने सैन्य ठिकानों को बचाने की कोशिश करेगी.

इसे जंग की पुरानी रूसी नीति कहा जाता है जिसके तहत चीन लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल से 320 किमी दूर होटान एयरबेस से अपनी सेना को एयर-डिफेंस मुहैया करा सकता है.

चीन के इस जंगी प्लान को नाकाम करने के लिए इंडियन एयर फोर्स डिस्पर्स, एब्जॉर्ब, रिकूप एंड रिटैलिएट की रणनीति अपना सकती है. जिसके तहत एयरफोर्स के जंगी विमान पहले तो आसमान में फैल कर दुश्मन के ठिकानों की टोह लेते हैं.फिर टारगेट फिक्स कर एक साथ हमले को अंजाम देते हैं.2018 के गगन शक्ति युद्धाभ्यास में भारतीय वायुसेना इस वॉर गेम की झलक दिखा चुकी है.

भारतीय हमले की जद में होगा चीन

सबसे बड़ी बात ये है कि जंग के हालात में एलएसी पर तैनात चीनी सैनिकों को एयर डिफेंस मिलने से पहले ही इंडियन एयरफोर्स के लड़ाकू विमान उसके सैन्य ठिकानों को तबाह कर सकते हैं. क्योंकि होटान, ल्हासा या काशगर में मौजूद चीनी एयरबेस से उड़ान भर कर जितनी देर में पीएलए एयरफोर्स के लड़ाकू विमान वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पहुंचेगी उससे कहीं ज्यादा तेज रफ्तार में सीमा से लगे एयरबेस पर तैनात भारत के फाइटर जेट हमले को अंजाम दे देंगे. चीनी एयरडिफेंस मिसाइल सिस्टम के नेस्तनाबूद होने पर तिब्बती मरुस्थल में तैनात चीन के तोप, रॉकेट और ट्रुप भारतीय हमले की जद में आ जाएंगे.

पहाड़ी इलाकों में रेड आर्मी के लिए आसान नहीं होगा टक्कर देना

इससे भी बड़ी बात ये कि 1999 के करगिल युद्ध में अपना दमखम दिखा चुकी भारतीय सेना को पहाड़ी इलाकों में टक्कर देना रेड आर्मी के लिए आसान नहीं होगा.खासकर तब जब पैंगोग त्सो के उत्तरी और दक्षिणी इलाकों में भारतीय सेना सामरिक अहमियत वाली चोटियों पर अपना ठिकाना बना चुकी है.एयरडिफेंस के अभाव में सर्दियों में इन चोटियों पर टिके भारतीय जांबाजों से निपटना चीनी सेना के लिए नामुमिकन होगा.

10 दिन के भीषण युद्ध के लिए भारत पूरी तरह तैयार

रक्षा सूत्रों के मुताबिक भारत की सेना सरहद पर 10 दिन के भीषण युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है. उरी और बालकोट स्ट्राइक के बाद तोपों और मिसाइलों की खरीदारी कर सरकार सेना के लिए हर तरह की तैयार कर चुकी है.माना जा रहा है कि भारत और चीन के बीच अगर जंग छिड़ी तो दस दिनों के अंदर विश्व के दूसरे देश भी इसमें शरीक हो सकते हैं.हालांकि खुद भारत के पास 60 दिनों के लगातार जंग का पूरा साजोसामान मौजूद है.

अगले महीने फ्रांस से भारत पहुंच कर पांच और राफेल फाइटर्स अंबाला स्क्वॉड्रन में शामिल हो जाएंगे, जिससे चीन की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं. मतलब साफ है एलएसी पर जिन इलाकों में चीन की सेना ने भारत का रास्ता रोक रखा है. वहां से उसे पीछे धकेलने के लिए बातचीत का रास्ता तो खुला है, लेकिन बात से बात नहीं बनी तो बात आगे भी बढ़ सकती है.

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