आखिर कब तक भारत को UN की निर्णय प्रक्रिया से अलग रखा जाएगा: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने आज संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 75 वें सत्र को संबोधित किया.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 7:40 pm, Sat, 26 September 20

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने आज संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 75 वें सत्र को संबोधित किया. प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की दावेदारी पर जोर दिया. पीएम मोदी ने सुरक्षा परिषद में भारत की भूमिका को लेकर संयुक्त राष्ट्र की ईकाई से पूछा कि संयुक्त राष्ट्र की फैसला लेने वाली इकाई से भारत को आखिर कब तक दूर रखा जाएगा. पीएम मोदी ने वैश्विक संस्था से पूछा ‘हमें कब तक इंतजार करना होगा? भारत को संयुक्त राष्ट्र की निर्णय प्रक्रिया से दूर कब रखा जाएगा?’

प्रधानमंत्री ने कहा कि एक ऐसा देश जो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है जहां विश्व की 18 प्रतिशत से ज्यादा जनसंख्या रहती है, एक ऐसा देश जहां सैकड़ों भाषाएं हैं, सैकड़ों बोलियां हैं अनेकों पंथ हैं, अनेक विचारधाराएं हैं. जिस देश ने वर्षों तक वैश्विक अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करने और वर्षों की गुलामी, दोनों को जिया है, जिस देश में हो रहे परिवर्तनों का प्रभाव दुनिया के बहुत बड़े हिस्से पर पड़ता है, उस देश को आखिर कब तक इंतजार करना पड़ेगा?

‘भारत के लोग इंतजार में हैं’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रियाओं, व्यवस्थाओं, स्वरूप में बदलाव आज समय की मांग है. भारत के लोग संयुक्त राष्ट्र के सुधारों को लेकर जो प्रक्रिया चल रही है, उसके पूरा होने का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं. भारत के लोग चिंतित हैं कि क्या ये प्रक्रिया कभी अपने सही अंत तक पहुंच पाएगी. पीएम ने कहा कि आखिर कब तक भारत को संयुक्त राष्ट्र की निर्णय प्रक्रिया से अलग रखा जाएगा.

पीएम मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में सुधार समय की जरूरत. भारत अगर किसी देश की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाता है तो वह किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं होता.जब भारत ने अपनी विकास भागीदारी मजबूत की तो इसका मकसद किसी को आश्रित या मजबूर बनाना नहीं है.

क्या आज भी संयुक्त राष्ट्र का स्वरूप प्रासंगिक है?

पीएम मोदी ने कहा कि ये बात सही है कि कहने को तो तीसरा विश्व युद्ध नहीं हुआ, लेकिन इस बात को नकार नहीं सकते कि अनेकों युद्ध हुए, अनेकों गृहयुद्ध भी हुए। कितने ही आतंकी हमलों ने खून की नदियां बहती रहीं. इन युद्धों में, इन हमलों में, जो मारे गए, वो हमारी-आपकी तरह इंसान ही थे.

पीएम मोदी ने सवाल किया कि वो लाखों मासूम बच्चे जिन्हें दुनिया पर छा जाना था, वो दुनिया छोड़कर चले गए। कितने ही लोगों को अपने जीवन भर की पूंजी गंवानी पड़ी, अपने सपनों का घर छोड़ना पड़ा। उस समय और आज भी, संयुक्त राष्ट्र के प्रयास क्या पर्याप्त थे?

उन्होंने कहा कि आज पूरे विश्व समुदाय के सामने एक बहुत बड़ा सवाल है कि जिस संस्था का गठन तब की परिस्थितियों में हुआ था, उसका स्वरूप क्या आज भी प्रासंगिक है?

पीएम ने कहा अगर हम बीते 75 वर्षों में संयुक्त राष्ट्र की उपलब्धियों का मूल्यांकन करें, तो अनेक उपलब्धियां दिखाई देती हैं। अनेक ऐसे उदाहरण भी हैं, जो संयुक्त राष्ट्र के सामने गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता खड़ी करते हैं.

संयुक्त राष्ट्र में पीएम मोदी का यह रिकॉर्डेड भाषण था.इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र में पीएम मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई की भी मांग  की.

मालूम हो कि 2019 में पीएम मोदी जब 23 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र के क्लाइमेट एक्शन समिट को संबोधित कर रहे थे, तो उनका भाषण सुनने के लिए खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सामने बैठे थे.