नरेंद्र मोदी के वो 5 दांव, जिन्‍होंने BJP को पहुंचाया 300 सीटों के पार

नरेंद्र मोदी पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद दोबारा सत्ता में वापसी करने वाले भारत के तीसरे प्रधानमंत्री हैं.

नई दिल्‍ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और मनमोहन सिंह जैसे नेताओं की जमात में आ चुके हैं. 48 साल बाद ऐसा हुआ है जब कोई पार्टी लगातार दूसरी बार बहुमत हासिल करने में सफल रही हो. 1971 में इंदिरा ने लगातार दूसरी बार बहुमत हासिल किया था. उससे पहले नेहरू भी ऐसी जीत पा चुके हैं. मोदी पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं जिन्‍हें यह उपलब्धि हासिल हुई है.

मोदी 5 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद दोबारा सत्ता में वापसी करने वाले भारत के तीसरे प्रधानमंत्री हैं. इससे पहले नेहरू और मनमोहन सिंह पूर्ण कार्यकाल के बाद लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बने थे. मोदी ने पहले कार्यकाल के दौरान दूसरे कार्यकाल की जमीन तैयार की. आइये एक नजर डालते हैं उन फैक्‍टर्स पर जिन्‍होंने मोदी की दोबारा जीत की पटकथा लिखी.

ब्रांड मोदी: चुनाव शुरू होने से पहले बीजेपी के लिए बड़ी चिंता थी कि सांसदों के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी से कैसे निपटा जाए. इसकी काट निकाली गई ब्रांड मोदी से. हर सीट पर स्‍थानीय उम्‍मीदवार की बजाय मोदी को ही कैंडिडेट के रूप में प्रोजेक्‍ट किया गया. ‘मोदी नहीं तो कौन’ सवाल उछाल विपक्ष को ‘महामिलावट’ करार देकर जनता के बीच भुनाने की कोशिश काम आई.

‘मोदी है तो मुमकिन है’ और ‘आएगा तो मोदी ही’ जैसे नारों में रिवर्स साइकोलॉजी का बेहतरीन इस्‍तेमाल हुआ. वोटर्स को विश्‍वास दिलाया गया कि मोदी सरकार दोबारा चुनी जा रही है.

जनता से सीधा संवाद: 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी ने केंद्र की सत्‍ता संभाली थी. परंपरागत मीडिया से अलग मोदी ने संचार के नए तरीकों का बखूबी इस्‍तेमाल किया. सोशल मीडिया पर चर्चा के अलावा वह जमीन पर भी पब्लिक से सीधे बात करते रहे. पिछले 5 साल में मोदी ने एक हजार से ज्‍यादा रैलियों या सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्‍सा लिया है. जनता के बीच जाकर उनसे जुड़ने का मोदी ने कोई मौका नहीं गंवाया. रेडियो पर ‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिए हर माह के अंत में पूरे देश को संबोधन भी मोदी का जनता से संवाद स्‍थापित करने में मददगार रहा.

ओबीसी कमीशन और सवर्ण आरक्षण: सामाजिक समीकरण साधने भी नरेंद्र मोदी सरकार सफल रही. अन्‍य पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देकर मोदी ने साफ संदेश दिया. वहीं जैसे ही मांग उठी, सवर्णों के बीच अपनी पैठ मजबूत करने को मोदी सरकार ने सवर्ण आरक्षण लागू करने में बिल्‍कुल भी देरी नहीं की.

राष्‍ट्रीय सुरक्षा: 2019 के लोकसभा चुनाव में यह मुद्दा बेहद अहम रहा. मोदी से लेकर बीजेपी के तमाम नेता चुनावी रैलियों में बालाकोट एयर स्‍ट्राइक का जिक्र करते रहे. लोगों को यह एहसास दिलाया गया कि बीजेपी सरकार ने राष्‍ट्रीय सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं किया.

उज्‍जवला, डायरेक्‍ट ट्रांसफर, टॉयलेट स्‍कीम: मोदी सरकार की दो बड़ी योजनाएं जिसने ग्रामीण अंचलों में BJP को मजबूत किया. कई राज्‍यों में बीजेपी सरकार होने का फायदा भी मिला कि योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू हो सकीं. डायरेक्‍ट ट्रांसफर स्‍कीम का प्रचार-प्रसार भी असरदार रहा. किसानों के खाते में छह हजार रुपये देने का फायदा भी चुनावों में मिला. गांव-गांव में शौचालय बनने से महिलाओं के बीच एक वोटबैंक विकसित हुआ.

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