युद्ध की आग में बचपन कैसे होते हैं राख, एक ऐतिहासिक तस्वीर का किस्सा

किसी भी चीज़ की अति बुरी होती है, फिर चाहे वो राष्ट्रवाद ही क्यों ना हो. कैसे हिटलर के पागलपन ने बच्चों से बचपन छीन लिए, एक ऐतिहासिक फोटो के ज़रिए बता रहे हैं आज..

जब ‘राष्ट्रवाद’ का इस्तेमाल अपने प्रमोशन के लिए होने लगे तो आदमी हिटलर हो जाता है और देश नाजी जर्मनी.

पिछली सदी के तीस और चालीस के दशक में हिटलर जनित पगलाए राष्ट्रवाद में सारा जर्मनी कूद पड़ा था. जब जर्मन सैनिक एक- एक करके मित्र देशों के हाथों मरने लगे और हिटलर का अविजित रहनेवाला मायाजाल टूटने लगा तो जर्मन सेना ने छोटे-छोटे बच्चों के लिए भी भर्तियां खोल दीं. भर्ती क्या थीं बच्चों को जबरन पकड़कर वर्दी पहनाई जाने लगी. स्कूलों में हिटलर के नाम पर जो कसमें खिलाई गई थीं उनका सच जब इस तरह सामने आया तो सब खौफ से भर गए. आखिरी सांस ले रही नाज़ी सरकार को शर्म नहीं आ रही थी और उसने राष्ट्र के नाम पर बच्चों को हथियार थमाकर आखिरकार युद्ध में मरने के लिए भेज ही दिया. मोर्चे पर ये बच्चे बम इधर उधर ढोने से लेकर खुद गोली चलाने के काम करते थे.

ये तस्वीर सोलह साल के हैन्स जॉर्ज हेंक की है जिसे हथियार देकर लड़ने को कहा गया। वो अपने देश के ही हेसन में जंग करता हुआ पकड़ लिया गया था। जब पकड़ा गया तो ज़ार ज़ार रोने लगा। बच्चा ही तो था, रोना बनता भी था। तभी ये तस्वीर ले ली गई। बेचारे के पिता 1938 में मर गए थे। मां भी 1944 में चल बसी। गुज़ारे के लिए कुछ करना था तो उसने 15 साल की उम्र में जर्मनी की वायु सेना में एंटी एयर स्क्वैड ज्वाइन कर लिया। साल भर लड़ा और फिर जर्मनी युद्ध हार गया तो पकड़ा गया। जंग जीतनेवाली सोवियत सेना ने जर्मनी में घुसकर सबको घेर लिया, वो उन्हीं में से एक था। फोटो अमेरिकी फोटोग्राफर जॉन फ्लोरिया ने लिया था।

हैंस अपने दुखद बचपन की यादों के साथ 1997 तक जिए

हैंस ने आगे चलकर कम्युनिस्ट पार्टी ज्वाइन की और 1997 तक जिए। ये तस्वीर कई भावनाएं उजागर करती है। सबसे बड़ी तो यही कि बच्चे को आप कितना भी राष्ट्रवाद सिखा दें लेकिन दिल से वो बच्चा ही होता है। पकड़े जाने पर वो बच्चे की ही तरह फूट पड़ा। बच्चे को बच्चा ही रहने दें। अपने पागलपन में उनको सनकी नहीं बनाना चाहिए। अपने बच्चों को भी बचाइए अगर आपको लग रहा हो कि वो बचपन में ही बड़ों जैसी बातें कर रहा है.. मरने -मारने, कटने-काटने की..

(लेख में प्रयुक्त विचार लेखक के निजी हैं)

Related Posts