करगिल विजय दिवस: शहीदों की पहचान कहीं खो न जाए, गांववालों ने बना डाला म्‍यूजियम

हुंदरमान नियंत्रण रेखा का आखिरी गांव है. 1971 के युद्ध से पहले यह गांव पाकिस्तान के कब्जे में था. यह जगह करगिल टाउन से 12 किलोमीटर दूर है.

कश्मीर: 26 जुलाई को देश के उन वीर जवानों को याद किया जाता है जिन्होंने साल 1999 में करगिल युद्ध के दौरान अपने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी थी. वहीं इस दौरान ऐसी कई कहानियां सामने आती हैं, जिन्हें सुनकर सीना गर्व से फूल जाता है.

हाल ही में ड्रास में एक चायवाले नसीम अहमद की कहानी सुनी थी, जिन्होंने जंग के मैदान ड्रास में टिके रहकर भारतीय सेना की सेवा की थी. अब वहीं नियंत्रण रेखा से सटे हुंदरमान गांव के लोगों ने शहीदों की याद को संजोय रखने का एक नायाब तरीका ढूंढ निकाला है.

1971 के भारत-पाक युद्ध और कारगिल संघर्ष से तबाह होने के बावजूद, जम्मू-कश्मीर के करगिल जिले में नियंत्रण रेखा को प्रभावित करने वाले इलाके हुंदरमान के लोगों ने शहीदों की पहचान कहीं खो न जाए इस डर से गांव में म्यूजियम का निर्माण करा डाला है और इस म्यूजियम में 1971 में भारत-पाक युद्ध और करगिल युद्ध से जुड़ी चीजों को संजो कर रखा गया है.

बता दें कि हुंदरमान नियंत्रण रेखा का आखिरी गांव है. 1971 के युद्ध से पहले यह गांव पाकिस्तान के कब्जे में था. यह जगह करगिल टाउन से 12 किलोमीटर दूर है. एक मामूली आबादी और गैर-आर्थिक अर्थव्यवस्था वाले इस गांव ने मोर्टार के टुकड़ों, पाकिस्तानी सैनिकों के सामान को म्यूजियम में संरक्षित करके रखा है.

इसके अलावा 1971 के युद्ध के दौरान पाकिस्तान सेना द्वारा उपयोग किए जाने वाले प्राइमरी मेडिकल बॉक्स, उनके सैन्य उपकरण, पाकिस्तान सेना के सूखे राशन के बक्से भी म्यूजियम में रखे गए हैं. उन्होंने कारगिल युद्ध के सभी बुलेट और मोर्टार के गोले संरक्षित किए हैं जिन्होंने स्थानीय लोगों के घरों को तबाह कर दिया था और उन्हें वहां से कहीं और जाने के लिए मजबूर कर दिया था. 

टीआआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद बकीर इस म्यूजियम की देखभाल करते हैं. बकीर का कहना है कि हर महीने 15 से 20 लोग इस म्यूजियम में विजिट करते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, सैन्य कुली के तौर पर काम कर रहे मोहम्मद बकीर ने कहा, “1971 और करगिल युद्ध दोनों के ही कारण हमारी जिंदगी काफी प्रभावित हुई. 1971 के युद्ध ने हमें पाकिस्तान से अलग कर दिया और करगिल युद्ध ने हमें भविष्य के किसी भी मामले में अधिक तबाही से बचने के लिए वर्तमान स्थान छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया.”

 

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