राजस्थान: IAS अधिकारियों पर गैरकानूनी तरीके से जमीन आवंटित करने का आरोप

राजस्थान सरकार के उद्योग मंत्री प्रसादी लाल मीणा ने कहा कि थाने में एफआईआर की जांच होगी. यदि कुछ गैरकानूनी पाया गया, मामले में कोई अनियमितता हुई तो विभागीय स्तर पर इसकी जांच कराई जाएगी.

जयपुर: राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (RIICO) की बेशकीमती जमीन के मामले में अधीनस्थ अदालत के आदेश पर दर्ज एफआईआर में ओम मेटल्स इंफोटेक के पांच निदेशकों को आरोपी बनाया गया है. साथ ही तत्कालीन रीको चैयरमेन राजीव स्वरूप और राजस्थान वित्त निगम की प्रबन्ध निर्देशक उर्मिला राजोरिया सहित अन्य अधिकारियों के नाम भी इसमें शामिल हैं.

पुलिस का बयान
पुलिस के अनुसार, धोखाधड़ी का मामला अंबाबाड़ी निवासी सीताराम अग्रवाल ने दर्ज करवाया है. रिपोर्ट में बताया कि 10 फरवरी 1981 को रीको ने मैसर्स प्रताप राजस्थान कॉपर फॉइल्स एंड लेमिनेट्स लिमिटेड को विश्वकर्मा औघोगिक क्षेत्र में कारखाना स्थापित करने के लिए भूखंड आवंटित किया.

नियमानुसार फर्म ने कोई कार्य नहीं किया. वर्ष 2006-2007 तक भूखंड पर न तो कोई निर्माण हुआ और न ही उत्पादन हुआ. रीको ने भूखंड का आवंटन निरस्त करने की बजाय कानून के विरुद्ध जाकर 56,690 वर्गमीटर जमीन को मैसर्स ओम मेटल्स इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड को हस्तांतरित कर दिया.

फर्म ने रीको के अधिकारियों से मिलीभगत करके इक्विटी, बकाया लोन, रिटेंशन चार्जेज के करोडों रुपए जमा नहीं करवाए. यह राशि मूल आवंटित फर्म से वसूली जानी थी. यहां तक कि वसूली की भूखंड से संबधित मूल पत्रावलियां रीको से गायब करवा दी गईं.

रीको के अधिकारियों ने फर्म संचालकों को लाभ पहुंचाने के लिए उक्त भूखंड को विभाजित करने के लिए मिलीभगत की. इसके तहत अवैध रूप से भूखंड विभाजित कराने के लिये योजनाबद्व तरीके से 8 अक्टूबर को रीको की आइडीसी की मीटिंग में भी मामला रखा गया.

शिकायकर्ता का आरोप
शिकायतकर्ता सीताराम अग्रवाल ने बताया कि मैसर्स ओम मेटल्स के निदेशक सीपी कोठारी साल 2002 में गहलोत सरकार के दौरान राजनैतिक नियुक्ति पर रीको बोर्ड में डायरेक्टर थे. उन पर रीको के अधिकारियों ने फायदा पहुंचाने का आरोप है.

सीपी कोठारी ने मैसर्स प्रताप कॉपर फाइल्स एण्ड लेमिनेट्स लिमिटेड फर्म के प्लाट में से 56 हजार वर्गमीटर जमीन को नियम के विरोध जाकर खरीदा. उस प्लाट पर आज तक कोई निर्माण व उत्पादन नहीं हुआ है.

शिकायकर्ता ने आरोप लगाया कि कोठारी को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से संरक्षण मिला है. इसलिये रीको के तत्कालीन चैयरमैन और राजस्थान सरकार के एसीएस राजीव स्वरूप ने हमारी शिकायत के बावजूद भी भूखण्ड का उपविभाजन कर दिया, जिसमें करोड़ो रूपये की लेन-देने हुई है.

अग्रवाल ने कहा कि राजीव स्वरूप को गहलोत सरकार का राजनैतिक संरक्षण पहले भी मिला था और अब भी है.

वकील के अनुसार
वकील सुनील वशिष्ठ शिकायतकर्ता की ओर से मामले की पैरवी कर रहे है. उन्होंने बताया कि मामले में परिवादी सीताराम अग्रवाल ने कोर्ट में शिकायत पेश की थी, जिस पर कोर्ट ने 156-3 आईपीसी के तहत मामले में पुलिस थाने विश्वकर्मा को भेजा.

इस पर एफआईआर दर्ज हो गयी है. वकील के अनुसार 420, 406, 409, 380, 166 व 120बी आईपीसी में मामला दर्ज हुआ. एडवोकेट वशिष्ठ ने बताया कि इन धाराओं में आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है.

आरोपी राजीव स्वरूप ने क्या कहा 
गृह विभाग के एसीएस राजीव स्वरूप ने बताया कि इस प्रकरण में जो भी कार्रवाई की गई है, वह नियमों के अंतर्गत की गई थी. ये शिकायत रीको में कार्रवाई से पहले भी आई थी, जिसका हमने पूरा परीक्षण किया और प्रत्येक आपत्ति निराधार पाई गई थी.

समिति द्वारा निर्णय लेने से पहले नियमों की वास्तुस्थिति का ध्यान रखा गया. लेकिन स्वरूप ने माना कि फर्म की पत्रावलियां रीको से गायब थीं. लेकिन उनका कहना था कि वो पुरानी वाली फर्म की पत्रावलियां हैं.

उद्योग मंत्री ने ये कहा
राजस्थान सरकार के उद्योग मंत्री प्रसादी लाल मीणा ने कहा कि थाने में एफआईआर की जांच होगी. यदि कुछ गैरकानूनी पाया गया, मामले में कोई अनियमितता हुई तो विभागीय स्तर पर इसकी जांच कराई जाएगी.

वहीं, फर्म की पत्रावलियां गायब होने के सवाल पर प्रसादी लाल मीणा ने राजनैतिक अंदाज में जवाब दिया. उन्होंने कहा कि फाइल तो राफेल की भी जानबूझकर गायब हुई थी और अगर इसकी भी जानबूझकर हुई है तो इसकी भी जांच हो जाएगी.

जब मंत्री से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के राजनैतिक संरक्षण को लेकर सवाल किया गया तो उन्होने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है.

नहीं हुआ संपर्क
आरोपी IAS उर्मिला राजोरिया से उनका पक्ष जानने के लिये संपर्क करने का प्रयास किया गया. लेकिन उनका फोन कवरेज से बाहर जा रहा था. अब इस पूरे हाई प्रोफाइल मामले की जांच राजस्थान की जयपुर पुलिस को करनी है. लेकिन इस जांच की निष्पक्षता पर अभी से सवाल उठने लेग हैं.