IAS रविन्द्र कुमार ने माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर दिया ये संदेश, देखें VIDEO

ख्वाब उन्हीं के पूरे होते हैं जो कोशिश करते हैं....ऐसे लोगो के हौसले के सामने ऊंचे से ऊंचे पर्वत भी बौने हो जाते हैं.
ias-ravindra-kumar, IAS रविन्द्र कुमार ने माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर दिया ये संदेश, देखें VIDEO

नई दिल्ली: माउंट एवरेस्ट, दुनिया का सबसे ऊंचा पर्वत. शायद ही ऐसा कोई हो जिसके मन में दुनिया की इस सबसे ऊंची चोटी को फतह करने का खयाल न आता हो. लेकिन अपने इस सपने को पूरा करने के लिए जो हौसला चाहिए वो हर किसी के पास नहीं होता. टीवी9 भारतवर्ष की रिपोर्टर ने बातचीत की यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी रवीन्द्र कुमार से.

रवीन्द्र कुमार अभी एवरेस्ट फतह करके आए हैं. इससे पहले उन्होंने 2013 में एवरेस्ट पर चढ़ने में कामयाबी हासिल की थी. इस तरह दो बार एवरेस्ट पर फतह करने वाले वह देश के पहले आईएएस हैं. आइए उनके रोमांचक अनुभवों से रूबरू होते हैं.

रिपोर्टर: सर, पहले तो आपको बधाई, इस खास कामयाबी पर. कैसा रहा आपका ये रोमांचक सफर. कैसी चुनौतियां सामने आई.
रवीन्द्र कुमार: इस बार बैड वेदर के कारण काफी दिक्कतें हुईं. इसकी वजह से काफी कैजुअलिटी भी हुईं, लेकिन मैं भगवान की कृपा से सुरक्षित वापस आया.

ias-ravindra-kumar, IAS रविन्द्र कुमार ने माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर दिया ये संदेश, देखें VIDEO

रिपोर्टर: 2013 का अभियान ज्यादा कठिन लगा या इस बार का?
रवीन्द्र कुमार: इस बार का सफर ज्यादा कठिन था. इस बार हाई विंड के कारण सफर ज्यादा कठिन रहा. इसकी वजह से माउंटेन के ऊपरी पार्ट से स्नो सारा बह चुकी थी. इसलिए वियर रॉक में चढ़ना पड़ा. इस बार मैं चाइना की तरफ से चढ़ रहा था.

रिपोर्टर: क्या सावधानियों की जरूरत होती है?
रवीन्द्र कुमार: फिजिकल फिटनेस, क्लोथिंग, इक्विपमेंट और वेदर इंफॉर्मेशन. मतलब वेदर फोरकास्ट एकदम सटीक होना चाहिए. रेगुलर अपडेटेड होना चाहिए.

रिपोर्टर: आप कब गए और कब वापस आए. कितना समय लगा?
रवीन्द्र कुमार: 10 अप्रैल को यहां से काठमांडू गया था और 15 अप्रैल को चढ़ाई शुरू कर दी. फिर बेस कैम्प पहुंचकर वहां रुके, ताकि शरीर वहां के वातावरण में अपने को ढाल ले. इसके बाद अभियान शुरू किया. कुल मिलाकर दो हफ्ते लगे. आज मैं लौटा हूं.

ias-ravindra-kumar, IAS रविन्द्र कुमार ने माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर दिया ये संदेश, देखें VIDEO

रिपोर्टर: इस सफर की शुरुआत कब हुई. मेरा मतलब है माउंटेनियरिंग का ख्याल कैसे आया.
रवीन्द्र कुमार: यह सिक्किम कैडर का गिफ्ट है. मैं 2011 बैच का आईएएस हूं. जनवरी 2012 में सिक्किम कैडर घोषित हुआ. सिक्किम के बारे में जानकारी लेने के दौरान मुझे पता चला कि 2011 में वहां पर भूकंप आया था. मुझे लगा कि मैं भी ट्रेनिंग ले लूं, ताकि ऐसी आपदाओं के दौरान कोई मदद कर सकूं. इसलिए मैंने माउंटेनियरिंग की ट्रेनिंग शुरू की. इसके बाद 2013 में एवरेस्ट चढ़ा.

रिपोर्टर: आईएएस तो काफी व्यस्त रहते हैं. ऐसे में कैसे आप वक्त निकाल पाए.
रवीन्द्र कुमार: जहां चाह वहां राह. अगर किसी चीज को ठान लेते हैं तो समय निकल ही जाता है. ये मेरी कोई पर्सनल हॉबी नहीं थी, ये मेरी प्रोफेशनल ट्रेनिंग का हिस्सा था. मुझे लगा कि पानी का एक बड़ा हिस्सा वेस्ट हो जाता है. मुझे लगा कि इस बारे में मैं सबसे ऊंचे पर्वत की चोटी पर जाकर कोई संदेश दूंगा तो अच्छा रहेगा.

ias-ravindra-kumar, IAS रविन्द्र कुमार ने माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर दिया ये संदेश, देखें VIDEO

रिपोर्टर: आप वहां गंगा जल लेकर गए थे?
रवीन्द्र कुमार: गंगा जल मैंने वहां चढ़ाया भी. हालांकि गंगा आइस कह सकते हैं, क्योंकि -45 से -50 डिग्री सेल्सियस पर क्या जल बचेगा. जो भी बचा मैं उसे वहां ऑफर करके आया और पानी बचाने का संदेश दिया, ताकि आने वाली पीढ़ी को पानी की कमी न झेलनी पड़े. मैं ‘स्वच्छ भारत’ और ‘नमामि गंगे’ का फ्लैग भी लेकर गया था. उसे भी वहां डिस्प्ले किया.

रिपोर्टर: माउंटेनियरिंग पर जाने से पहले काफी ट्रेनिग लेनी पड़ती है. उस ट्रेनिग के बारे में कुछ हमारे दर्शकों को बताइए?
रवीन्द्र कुमार: मेरा मानना है कि यह फिजिकल और मेंटल दोनों ही ट्रेनिंग की जरूरत होती है. इसके अलावा पॉजिटिव विजुअलाइजेशन बहुत जरूरी है. मतलब सक्सेस की सीनरी अपने दिमाग में रखिये.

रिपोर्टर: आपने एक किताब लिखी है ‘मैनी एवरेस्ट’, उसके बारे में हमारे दर्शकों को कुछ बताइए?
रवीन्द्र कुमार: 2013 में जब हमारी जर्नी पूरी हुई तो काफी लोगों ने कहा कि मैं इसे डॉक्यूमेंटाइज करूँ. इसलिए मैंने ये किताब लिखी. ये किताब खासकर छात्रों के लिए ‘सक्सेस की’ है.

Related Posts