अब कम दाम में होगा कोरोना का RT-PCR टेस्ट, IISc की डायग्नोस्टिक किट को मिली मंजूरी

इससे पहले, DCGI ने भारत के पहले क्लस्टर रेगुलरली इंटरसेप्टर शॉर्ट पालिंड्रोमिक रिपीट (CRISPR) टेस्ट किट को कोरोनावायरस (Coronavirus) की जांच में सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी थी. इस किट को टाटा ग्रुप और CSIR-IGIB ने मिलकर तैयार किया था.

कोविड-19 टेस्ट (File Pic)

कोरोनावायरस (Coronavirus) का कहर पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले चुका है. लगभग सभी देश इसका इलाज ढूढ़ने में लगे हुए हैं. जब तक वैक्सीन लोगों के हाथ नहीं आ जाती, तब तक सभी की कोशिश यही है कि शुरुआत में ही इसके लक्षणों का पता लगा लिया जाए जिससे ज्यादा कारगर तरीके से इलाज किया जा सके. भारत भी अपनी टेस्टिंग कैपेसिटी को लगातार बढ़ाने में लगा हुआ है. इसी क्रम में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने भारत में बनी एक और कोरोना RT-PCR डायग्नोस्टिक किट के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है.

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) से जुड़ी एक स्टार्टअप कंपनी इक्विन बायोटेक (Equine Biotech) ने किफायती दामों वाली RT-PCR टेस्ट किट तैयार की है, जिसे GlobalTM डायग्नोस्टिक किट नाम दिया गया है. ICMR ने इस किट को डायग्नोस्टिक लैब में इस्तेमाल के लिए मंजूरी दे दी है.

केवल डेढ़ घंटे में आ जाता है रिजल्ट

कंपनी के डायरेक्टर और IISc विभाग में प्रोफेसर ने बताया कि इस किट से लगभग डेढ़ घंटों में मरीज के सैंपल्स में कोरोनावायरस की मौजूदगी का पता लगाया जा सकता है. इस किट को बनाने वालों का दावा है कि वर्तमान में इस्तेमाल की जा रहीं किट्स की तुलना में यह कहीं ज्यादा किफायती और विश्वसनीय है. डायरेक्टर ने कहा कि उनका स्टार्टअप कई सालों से कोरोनावायरस की जांच किट पर काम कर रहा है और उनके अनुभवों से ही उन्हें यह किट बनाने में मदद मिली है.

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स्टार्टअप कंपनी के मुताबिक इस किट को इस्तेमाल करना बहुत आसान है और बाजार में उपलब्ध अन्य किट्स की तुलना में ज्यादा तेजी से रिजल्ट देती है. उन्होंने कहा कि इक्विन बायोटेक बड़े पैमाने पर इस किट को बनाने और इसे बेचने के लिए लाइसेंस लेना चाहती है.

इससे पहले CRISPR टेस्ट किट को दी थी मंजूरी

इससे पहले, ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने भारत के पहले क्लस्टर रेगुलरली इंटरसेप्टर शॉर्ट पालिंड्रोमिक रिपीट (CRISPR) टेस्ट किट को कोरोनावायरस की जांच में सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी थी. इस किट को टाटा ग्रुप और CSIR-IGIB (इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी) ने मिलकर तैयार किया था. इसे लेकर विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा था कि यह किट सही नतीजे देने में पारंपरिक RT-PCR टेस्ट के बराबर है. यह सस्ती है और जांच में समय भी कम लेती है.

इस किट में होता है CAS9 प्रोटीन का इस्तेमाल

इसमें SARS-CoV-2 वायरस के जीनोमिक अनुक्रम (genomic sequence) का पता लगाने के लिए स्वदेशी CRISPR टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है. कंपनी का कहना है कि टाटा क्रिस्पर किट CAS9 प्रोटीन का इस्तेमाल कर कोरोना संक्रमण फैलाने वाले वायरस की सफलतापूर्वक पहचान करने वाली दुनिया में पहली किट है. इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भविष्य में अन्य महामारियों की जांच करने के लिए भी किया जा सकता है.

भारत में कोरोना टेस्ट की संख्या 7 करोड़ के पार

भारत में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने के साथ-साथ कोरोना टेस्ट की संख्या भी बढ़ी है. देश में टेस्टिंग कैपेसिटी हर दिन 14 लाख से ज्यादा हो गई है. देश में अब तक 7 करोड़ से ज्यादा कोरोना टेस्ट किए जा चुके हैं. वहीं, पिछले 24 घंटों में भारत में 85,365 नए पॉजिटिव मामले सामने आए हैं. इसी के साथ पिछले 24 घंटों में देश में 93,420 मरीज इस बीमारी से ठीक हो चुके हैं और इसी के साथ अब तक ठीक हुए कुल मरीजों की संख्या शनिवार को 48,49,584 तक पहुंच गई है.

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