‘भारत बन गया हिंदू राष्ट्र तो दूसरे धर्मों का क्या होगा,’ ये बताएगी संघ प्रचारक सुनील अंबेडकर की किताब

पिछले ढाई दशक में किसी प्रचारक द्वारा संघ के विषय में लिखी गई ये पहली पुस्तक है. इससे पहले संघ के वरिष्ठ प्रचारक और भारतीय मजदूर संघ के फाउंडर दतोपंत ठेंगड़ी ने संघ पर पुस्तक लिखी थी.

भारत अगर हिंदू राष्ट्र बन जाए तो देश में मुस्लिम और दूसरे धर्मों को मानने वालों का क्या होगा? क्या हिंदुत्व के आगे जातिगत राजनीति और व्यवस्था खत्म हो जाएगी? RSS भारतीय इतिहास का पुनर्लेखन किस कदर चाहता है?  21वीं सदी में RSS के सामने आने वाली चुनौतियों और उसको फतह करने के लिए अख्तियार किया जाने वाला रास्ता क्या होना चाहिए. इन्ही विषयों पर आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक और ABVP के राष्ट्रीय संगठन सचिव सुनील अंबेडकर ने नई किताब लिखी है.

पिछले ढाई दशक में किसी प्रचारक द्वारा संघ के विषय में लिखी गई ये पहली पुस्तक है. इससे पहले संघ के वरिष्ठ प्रचारक और भारतीय मजदूर संघ के फाउंडर दतोपंत ठेंगड़ी ने संघ पर पुस्तक लिखी थी. सूत्रों के मुताबिक इस नई किताब में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नजरिए से भारत के भविष्य, विभिन्न धर्मों के बीच आपसी तालमेल, जाति की राजनीति और उसका समाधान के साथ-साथ, LGBTQ के अधिकारों और लिव-इन रिलेशनशिप और थर्ड जेंडर के अधिकार जैसे ज्वलंत और महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा की गई है.

मोहन भागवत करेंगे किताब का विमोचन

किताब का विमोचन RSS प्रमुख मोहन भागवत 1 अक्टूबर को अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में करेंगे. ABVP के राष्ट्रीय संगठन सचिव सुनील अंबेडकर द्वारा लिखी गई किताब ‘‘दि आरएसएस: रोडमैप्स फॉर दि ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी’’ में RSS की कार्यपद्धति, संघ की पहुंच और भविष्य के लिए दृष्टि के बारे में विस्तृत बताया गया है. स्वयंसेवकों के सरकार और सत्ता के शिखर पर पहुंचने के चलते RSS की कार्यपद्धति को लेकर उत्सुकता बहुत बढ़ी है. अब हिंदू राष्ट्र और एकात्मत मानव दर्शन को लेकर संघ के मूल विचार हमारे सामाजिक और राजनीति विमर्श के मुख्य विषय बनने लगे हैं.

अगर भारत हिंदू राष्ट्र बनता है तो देश में इस्लाम अन्य धर्मों का स्थान क्या होगा?

सूत्रों के मुताबिक इस पुस्तक में भारत को लेकर RSS के विचार के साथ-साथ अगर भारत हिंदू राष्ट्र बनता है तो देश में इस्लाम अन्य धर्मों का स्थान क्या होगा? इतिहास लेखन के लिए RSS की परियोजनाएं और ग्लोबलाइजेशन के बाद परिवार के बदलते स्वरूप जैसे तमाम सामाजिक मुद्दों का विश्लेषण किया गया है. किताब में इस बात का भी जिक्र है कि बदलते आधुनिक परिवेश में फैमिली वैल्यू सिस्टम को कैसे बनाये रखा जाए?

शहरीकरण के इस दौर में बढ़ते अपार्टमेंट्स और सोसाइटीज के बीच कैसे भारतीयता और भारतीय मूल्यों को जिंदा रखते हुए संघ की पैठ को भी बरकरार रखा जाए? इसमें ये भी कहा गया है कि अंबेडकर ने भी संघ की आंतरिक कार्य पद्धति, इसकी निर्णय लेने की प्रक्रिया और समन्वय प्रणाली का उल्लेख किया है.

ये भी पढ़ें- इराक: मुहर्रम के जुलूस में भगदड़ मचने से 31 की मौत, सैकड़ों घायल