देश में इस साल पड़ेगी बहुत ज्यादा ठंड, मौसम विभाग ने बताई ये बड़ी वजह

मौसम विभाग (IMD) के डायरेक्टर एम मोहपात्रा ने कहा कि सर्दियों में बंगाल की खाड़ी (Bay Of Bengal) में बार-बार तेजी के साथ ला नीना (La Nina) चक्रवात उठ सकता है, जिसकी वजह से सर्दी बढ़ने का अनुमान जताया जा रहा है.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 2:20 pm, Thu, 15 October 20
मौसम विभाग ने इस साल ज्यादा सर्दी पड़ने का अनुमान जाहिर किया है.

मौसम विभाग (IMD) ने इस साल ज्यादा सर्दी (Cold) पड़ने का अनुमान जाहिर किया है. बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) में अक्टूबर और नवंबर के आसपास तेज हवाओं की वजह से चक्रवात (Cyclone) और भी सक्रिय हो सकता है, सर्दी के मौसम (Winter Season) में तेज और ठंडी हवाएं चल सकती हैं. मौसम विभाग के चीफ एम मोहापात्रा ने कहा कि पूर्वानुमान के मुताबिक बार-बार चक्रवात की वजह से सर्दी के मौसम में तेज और ठंडी हवाएं चल सकती हैं, जिससे सर्दी और ज्यादा बढ़ जाएगी.

मौसम विभाग (IMD) के डायरेक्टर एम मोहपात्रा ने कहा कि सर्दियों में बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) में बार-बार तेजी के साथ ला नीना (La Nina) चक्रवात उठ सकता है. कई अन्य फेक्टर्स सर्दियों को प्रभावित कर सकते हैं. सर्दियों के लिए नवंबर महीने में पूर्वानुमान जारी किया जाएगा, लेकिन अगर सिर्फ ला नीना के प्रभाव पर विचार किया जाए तो यह निश्चित रूप से ठंडी सर्दियों से जुड़ा हुआ है.

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ला नीना के कमजोर होने की वजह से ज्यादा सर्दी का अनुमान

अल नीनो साउथर्न ऑसिलिएशन बुलेटिन में मौसम विभाग ने अक्टूबर के लिए जारी पूर्वानुमान में कहा कि फिलहाल एक्वाटोरियल पेसिफिफ और समुद्री सतह के तापमान पर ला नीना की स्थिति कमजोर चल रही है, यह मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत पर सामान्य से नीचे हैं.

नए पूर्वानुमान के मुताबिक एसएसटी का ठंडा होने की सबसे ज्यादा संभावना जताई जा रही है, आने वाले दिनों में ला नीना की कमजोर स्थिति मीडियम स्थिति में बदल सकती है, जो कि अगले साल की शुरुआत तक रह सकती है. शीत लहर के लिए ला नीना और अल नीनो की परिस्थितियां बड़ी भूमिका निभाती हैं. ला नीना के कमजोर पड़ने से पिछले साल के मुकाबले इस साल ज्यादा ठंड पड़ सकती है.

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अक्टूबर महीने में अब तक किसी भी चक्रवात का विकास नहीं हुआ है, लेकिन नॉर्थ-इंटीरियर कर्नाटक और महाराष्ट्र के आस-पास के क्षेत्रों में अवसाद पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ गया और दक्षिण मध्य महाराष्ट्र पर कम दबाव वाले क्षेत्र में कमजोर हो गया, लेकिन अरब सागर में मिलने के बाद यह एक बार फिर से समुद्र से तजी के साथ उठ सकता है.