कोरोना काल में मनरेगा के तहत काम मांगनेवाले बढ़े, 52 प्रतिशत रही महिलाओं की हिस्सेदारी

कोरोना काल में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (NREGS) ने किस तरह लोगों को रोजगार दिलाने में मदद की है इसका आंकड़ा सामने आया है.

NREGS

कोरोना काल में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (NREGS) ने किस तरह लोगों को रोजगार दिलाने में मदद की है इसका आंकड़ा सामने आया है. पता चला है कि अप्रैल से अबतक 4.3 करोड़ महिलाओं को इससे रोजगार मिला है. लेकिन नौकरी छूटने की वजह से काफी पुरुषों को भी मनरेगा की तरफ रुख करना पड़ रहा है. ऐसे में देखना होगा कि सामाजिक-आर्थिक कारक और लैंगिक पक्षपात की वजह से महिलाओं को मिल रहे काम पर कितना असर होगा.

ग्रामीण विकास मंत्रालय की तरफ से यह आंकड़ा दिया गया है. पिछले 5 सालों से तुलना करें तो यह नंबर काफी ज्यादा है. 2019-20 (27 फरवरी तक) 3.9 करोड़ महिलाओं को मनरेगा से काम मिला था. 2018-19 में यह संख्या 4 करोड़, 2017-18 और 2016-17 में यह 3.9-3.9 करोड़ ही रही.

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महिलाओं के लिए इन दिनों काम मिलना वैसे आसान भी नहीं रहा. क्योंकि सीधा कम्पटीशन पुरुषों से होता था जिनकी कोरोना काल में नौकरी गई और वे मनरेगा के तहत काम करने को मजबूर हुए.

8.8 लाख परिवारों ने पूरे किए काम के 100 दिन

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल से सितंबर 2020 तक कुल 8.4 करोड़ लोगों को काम मिला. इसमें 4.3 करोड़ महिलाएं थीं. प्रतिदिन औसतन हर शख्स को 198 रुपये का वेतन मिला. पता चला है कि 8.8 लाख परिवारों ने काम के 100 दिन पूरे कर भी लिए हैं. ऐसा कोरोना काल में और कोई काम-धंधा ना होने की वजह से भी हुआ है. मनरेगा के तहत इस वक्त में 4.8 लाख दिव्यांग लोगों को भी काम मिला है.

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