भारत में पहली बार आयकर विभाग ने सैटेलाइट इमेज से पकड़ी टैक्स चोरी

प्रधान आयकर निदेशक अमरेंद्र कुमार ने बताया कि सैटेलाइट के जरिए अभी तक की ये पहली कार्यवाही है और आगे भी ऐसी कार्यवाही लगातार होती रहेंगी.

गाजियाबादः टैक्स चोरी को पकड़ने के लिए गाजियाबाद में पहली बार आयकर विभाग की टीम ने सैटेलाइट इमेज का इस्तेमाल किया. इससे 15 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का खुलासा हुआ. पता चला कि एक व्यक्ति ने टैक्स से बचने के लिए कृषि भूमि की रजिस्ट्री कराई, जबकि उस पर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बना लिया.

आयकर विभाग ने देश में पहली बार सैटेलाइट के जरिए करीब 15 करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ी है. मोदी नगर के प्रॉपर्टी कारोबारी ने 3 साल पहले एक व्यवसायिक संपत्ति की रजिस्ट्री में फर्जीवाड़ा कर कृषि भूमि दिखाकर स्टांप के साथ आयकर चोरी की. हैदराबाद की एजेंसी से सैटेलाइट जांच रिपोर्ट में फर्जीवाड़े के खुलासे पर विभाग ने कारोबारी के खिलाफ आयकर जांच शुरू कर दी है. इस मामले में विभाग 90 फीसदी तक जुर्माना वसूलेगा.

प्रधान आयकर निदेशक ने बताया कि जांच शाखा विभाग ने देश में पहली बार हाईटेक तरीके से सैटेलाइट का प्रयोग करके आयकर चोरी पकड़ी है. गाजियाबाद जांच शाखा को जून 2018 में शिकायत मिली थी. इस शिकायत में बताया गया कि मोदी नगर के जलालाबाद की एक जमीन की रजिस्ट्री 3 वर्ष पहले 30 लाख रुपये में की गई थी.

प्रॉपर्टी कारोबारी ने रजिस्ट्री में कृषि भूमि की तस्वीर लगा दी थी. आयकर विभाग ने शिकायत को गंभीरता से लेकर हैदराबाद की जांच एजेंसी एनआरएसए से उस संपत्ति के 3 वर्ष पुरानी वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट मांगी. आयकर निदेशक ने बताया कि हैदराबाद की एजेंसी की रिपोर्ट में उक्त भूखंड पर व्यवसायिक कॉम्पलेक्स बने होने की पुष्टि की गई है.

सैटेलाइट की इन तस्वीरों को आप देख सकते हैं कि किस तरह से कारोबारी ने खाली जमीन दिखाकर कॉम्पलेक्स बनी हुई जमीन की रजिस्ट्री कराई और टैक्स चोरी की गई. विभाग ने इस रिपोर्ट को लखनऊ की एक स्थानीय एजेंसी को भी जांच के लिए भेजा था. लखनऊ की जांच एजेंसी ने भी हैदराबाद की रिपोर्ट को सही बताया. बड़ा सवाल यह उठता है कि प्रशासनिक रिपोर्ट में भी यह मामला पकड़ में नहीं आया, साथ ही स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने जांच में सहयोग नही किया.

जाहिर सी बात है कि प्रशासनिक अधिकारियों की भी इसमें मिलीभगत जरूर हो सकती है. जांच शाखा के अधिकारियों ने बताया कि बीते वर्ष शिकायत मिलने पर प्रशासनिक अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई थी. रिपोर्ट में उक्त भूखंड के खसरा खतौनी नंबर देकर वास्तविक स्थिति के बारे में पूछा गया था लेकिन उन्होंने सही जानकारी नही दी. जांच शाखा अब इन पर भी अपनी कार्रवाई करेगी.

हालांकि प्रधान आयकर निदेशक अमरेंद्र कुमार ने बताया कि इस पूरी कार्यवाही में काफी समय लगा है लेकिन अब कोई भी चोरी नही कर पायेगा. उन्होंने ये भी बताया कि सैटेलाइट के जरिए अभी तक की ये पहली कार्यवाही है और आगे भी ऐसी कार्यवाही लगातार होती रहेंगी.