VIDEO: टूरिस्ट गाड़ी और अंधेरी रात, देखिए कमलनाथ के करीबियों पर आईटी ने कैसे कसा शिकंजा

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जिस तरीके से रेड मारी है वो जानना बेहद दिलचस्प है. इस पूरे घटनाक्रम में जब हम नजर डालते हैं तो ये रेड पूरी फिल्मी नजर आती है लेकिन ये फिल्मी नहीं हकीकत है.

भोपाल: 2019 लोकसभा चुनाव के लिए 11 अप्रैल को होने जा रहे पहले चरण के मतदान से ठीक चार दिन पहले इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने रविवार को मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ के सहयोगी और उनके करीबियों के कई ठिकानों पर छापेमारी की. धन कुबेरों पर इनकम टैक्स का छापा कोई नई बात नहीं है, लेकिन आयकर विभाग ने जिस तरह रेड मारी वो अचंभित करने वाला है. प्लानिंग के तहत 15 अफसरों ने रात 3 बजे कमलनाथ के ओएसडी और करीबी प्रवीण कक्कड़ के आवास पर रेड मारी. यहां विजय नगर स्थित शोरूम, बीएमसी हाइट्स स्थित ऑफिस, शालीमार टाउनशिप और जलसा गार्डन, भोपाल स्थित आवास पर जांच की गई.

ये सारी छापेमारी मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों पर की गई है. इसमें खासतौर पर उनके भांजे रतुल पुरी, ओएसडी और सहयोगी प्रवीण कक्कड़ और पूर्व राजनीतिक सलाहकार राजेंद्र मिगलानी को घेरा गया है. इन तीनों में भी जिस शख्स की चर्चा सबसे ज़्यादा है वो प्रवीण कक्कड़ हैं.

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जिस तरीके से रेड मारी है वो जानना बेहद दिलचस्प है. इस पूरे घटनाक्रम में जब हम नजर डालते हैं तो ये रेड पूरी फिल्मी नजर आती है लेकिन ये फिल्मी नहीं हकीकत है. अब हम आपको शनिवार रात 12 बजे से शुरु हुई इस कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट बता रहे हैं. आयकर विभाग ने इस पूरी कार्रवाई को बेहद गोपनीय ढंग से अंजाम दिया. गोपनीयता इतनी बरती गई कि मध्य प्रदेश शासन के किसी भी ऑफिसर को इसकी कानोंकान खबर नहीं हुई.

पहली खास बात
शनिवार रात तकरीबन 12 बजे आयकर के अधिकारी एक प्राइवेट टूरिस्ट कार हायर करते हैं. ताकि किसी को इस रेड की जानकारी न हो सके. ऐसा इसलिए किया गया क्यों कि आयकर विभाग नहीं चाहता था कि इस सुपर सीक्रेट मिशन की भनक उनके ऑफिसयली ड्राइवरों को भी हो. गाड़ी हायर करने के बाद रात 12 बजे से तीन बजे तक रेड की योजना बनाई गई. योजना तो पहले से ही तय हो गई थी लेकिन आयकर अधिकारियों ने उस योजना को ग्राउंड में अपनाने के लिए ब्लू प्रिंट तैयार किया.

दूसरी खास बात
आयकर विभाग के अधिकारियों ने हर स्थिति से निपटने के लिए अलग-अलग प्लान तैयार किए और पूरी प्लानिंग के साथ सबसे पहले करीब तीन बजे मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ के पूर्व ओएसडी प्रवीण कक्कड के आवास पर छापा मारा. खास बात ये थी कि इसमें मध्य प्रदेश की किसी ऑफिसर को इसकी जानकारी नहीं थी. आम तौर पर जब आयकर विभाग कहीं पर छापा मारता है तो वहां के लोकल प्रशासन को साथ लेता है. वहां के पुलिस बल को भी साथ लेता है लेकिन इस कार्रवाई में एमपी पुलिस को भनक तक नहीं लगी.

तीसरी खास बात
आयकर विभाग ने इस कार्रवाई में लोकल एडमिनिस्ट्रेशन का साथ ना लेना तो समझ आता है लेकिन विभाग ने राज्य इनकम टैक्स के अधिकारियों को भी नहीं बताया. यानि ये रेड इतनी गोपनीय थी कि उनको ये भी आभास था कि यदि वो राज्य सरकार के किसी भी अधिकारियों को इसकी सूचना देते हैं या उनसे मदद की मांग करते हैं तो ये रेड प्रभावित हो सकती है. इसलिए इस रेड में सारे अधिकारी वही थे जिन्होंने इस रेड की पूरी प्लानिंग की थी.

चौथी खास बात
इनकम टैक्स ने ये रेड महज एक या दो जगह नहीं की बल्कि एक ही समय के अंतराल में पचान ठिकानों में रेड मारी. किसी को भी कुछ समझने का या इनफॉर्मेशन भेजने का मौका ही नहीं दिया गया. इस पूरी कार्रवाई में 500 अधिकारियों ने हिस्सा लिया. जो कि अपने आपनें ही एक चौंकाने वाली बात है. इतने बड़े पैमाने में जो प्लानिंग की गई उससे साफ जाहिर होता है कि आयकर विभाग को इसकी जानकारी बहुत पहले से थी और वो मौके की तलाश में थे.

पांचवी खास बात
ये बात सबसे खास बताई जा रही है. जब भी आयकर विभाग रेड करता है तो दिल्ली पुलिस को साथ लेता है और जहां भी रेड मारनी होती है वहां की लोकल पुलिस साथ होती है. लोकल पुलिस को ये पहले ही बता दिया जाता है गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जाए. यहां ऐसा कुछ नहीं हुआ. पहली बार इस रेड को मारने के लिए सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स) की मदद ली गई.

छठवीं खास बात
ये कार्रवाई एक सूचना मिलने के बाद की गई. सीएम के ओएसडी के घर से आठ करोड़ कैश बरामद हुआ है. रेड में बड़े कैश मिलने के बाद आयकर विभाग ने और सघन तलाशी ली. बताया जा रहा है कि जब्त हुई राशि का प्रयोग लोकसभा चुनावों में होना था.

उरी ऑपरेशन की तरह बरती गई गोपनीयता
आपने उरी सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में खूब सुना होगा. इस स्ट्राइक में सबसे चौंकाने वाली बात जो थी वो थी इस ऑपरेशन की जानकारी मजह पांच लोगों को होना. इतना बड़ा ऑपरेशन भी हो गया और इसकी भनक उनको भी नहीं हुई जो खुद पीएम मोदी के साथ हर पल साए की तरह रहते थे. ठीक उसी प्रकार इस रेड को भी अंजाम दिया गया. ठीक उसी प्रकार इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया.

कौन हैं प्रवीण कक्कड़
प्रवीण कक्कड़ 1983 बैच के आईपीएस रहे हैं. कक्कड़ ने जीवाजी विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए किया था. वो गोल्ड मेडलिस्ट रहे. उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है. पुलिस अधिकारी रहने के दौरान ही वो कई मामले में चर्चित रहे. कांतिलाल भूरिया, दिग्विजय सिंह और कमलनाथ से उनकी नज़दीकियां पुरानी हैं. साल 2004 में नौकरी छोड़कर कक्कड़ ने अपना व्यापार शुरू किया था. इसी दौरान वो कांग्रेस नेता भूरिया के ओएसडी बन गए. भूरिया 2004 से 2011 तक केंद्रीय मंत्री थे. पिछले साल दिसंबर महीने में सीएम कमलनाथ ने भी उन्हें अपना ओएसडी नियुक्त किया. उनसे पहले भूपेंद्र गुप्ता कमलनाथ के ओएसडी थे.

कौन हैं राजेंद्र मिगलानी
मिगलानी करीब 30 वर्ष से कमलनाथ से जुड़े हैं. जब कमलनाथ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने मिगलानी को अपना सलाहकार नियुक्त किया. लेकिन लोकसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद आचार संहिता लगते ही उन्होंने इस पद इस्तीफा सौंप दिया. सीएम से इनके रिश्तों का आकलन इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री से कौन- कब मिलेगा इसके साथ ही उनके अन्य कामों को भी मिलगानी ही संभालते हैं. आयकर विभाग ने मिगलानी के दिल्ली में ग्रीन पार्क कॉलोनी स्थित घर पर कार्रवाई की है.

कौन हैं प्रतीक और अश्विन
प्रतीक जोशी और अश्विन शर्मा भोपाल के आर्म्ड डीलर हैं. दोनों आपस में रिश्तेदार भी हैं. आयकर विभाग ने घर से नौ करोड़ रुपए मिलने की पुष्टि की है. दोनों की सीएम हाउस तक सीधे पहुंच थी. बताया जा रहा है कि प्रवीण कक्कड़ इन्हीं के माध्यम से डीलिंग करता था. अश्विन शर्मा की कई भाजपा नेताओं से भी नजदीकी की बात सामने आई है.