चीन-PAK तो भाग खड़े हुए, सैयद अकबरुद्दीन ने UN में बजाया भारतीय लोकतंत्र का डंका- देखें VIDEO

पत्रकार ने पूछा था- क्‍या कश्‍मीर में ऐसे प्रतिबंधों से भारत के एक खुले लोकतंत्र होने की छवि कमजोर नहीं पड़ती? पढ़ें सैयद अकबरुद्दीन का जवाब.

संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में चीन-पाकिस्‍तान को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा. जम्‍मू-कश्‍मीर से अनुच्‍छेद 370 के प्रावधान हटाने पर UNSC में बंद दरवाजों के पीछे चर्चा हुई थी. इसमें पाकिस्‍तान को चीन के अलावा किसी का साथ नहीं मिला. शर्मिंदगी की हद तो तब हो गई जब प्रेस कॉन्‍फ्रेंस से चीनी और पाकिस्‍तानी राजदूत भाग खड़े हुए. जैसे ही पत्रकारों ने सवाल दागने शुरू किए, UN में चीन और पाकिस्‍तान के स्‍थायी प्रतिनिधि खिसक लिए. तब सवाल पूछने वाले एक पत्रकार को UN में भारत के स्‍थायी सदस्‍य सैयद अकबरुद्दीन ने लोकतंत्र का पाठ पढ़ाया.

कश्‍मीर में लगाए गए प्रतिबंधों पर सवाल का जवाब देते हुए सैयद अकबरुद्दीन कह रहे थे कि ‘हमें थोड़ा समय दीजिए, हालात सामान्‍य होंगे.’ इसके बाद अकबरुद्दीन जाने लगे तो किसी पत्रकार ने पूछ लिया कि “क्‍या ऐसे प्रतिबंधों से भारत के एक खुले लोकतंत्र होने की छवि कमजोर नहीं पड़ती?” सवाल ऐसा था कि अकबरुद्दीन वापस आए और पूरी दुनिया की मीडिया के सामने भारत के लोकतंत्र का डंका बजा गए.

लोकतंत्र की परिभाषा समझा गए सैयद अकबरुद्दीन

सैयद अकबरुद्दीन ने माइक पर आते ही कहा, “हमारे सवालों का किसी ने जवाब नहीं दिया. जो लोग (चीनी और पाकिस्‍तानी राजदूत) यहां आए थे, वो ऐसे ही चले गए. एक खुले लोकतंत्र के प्रतिनिधि के रूप में मैं (सवालों के) जवाब देने को तैयार हूं.” इसके बाद कोइ दूसरा पत्रकार बीच में टोकता है तो अकबरुद्दीन उसे रोककर कहते हैं, “प्‍लीज… प्‍लीज… पहले मुझे इस सवाल का जवाब देने दीजिए.”

UNSC में भारत की इस जीत के हीरो अकबरुद्दीन ने आगे कहा, “लोकतंत्र फले-फूले, इसके लिए शांति बरकरार रहना बेहद जरूरी है. इसलिए जायज प्रतिबंध लगाए गए हैं, हम मानते हैं कि ये प्रतिबंध हैं. हम उनमें ढील दे रहे हैं. हमें यहां नहीं तय करना चाहिए कि इसे कितनी तेजी से और कैसे करना है. हमारी दिशा और चाल तय है. हो सकता है आप इस स्‍पीड से खुश न हों, ऐसे और भी लोग हो सकते हैं, लेकिन जमीन पर ऐसे लोग काम कर रहे हैं जो समर्पित हैं और लोकतांत्रिक ढंग से चुने गए प्रतिनिधियों के मातहत काम कर रहे हैं, वही इस बारे में तय करेंगे. और मैं आपको फिर से भरोसा दिलाऊं कि भारत एक जीवंत, संपन्‍न लोकतंत्र है और हम रोज इसे जीते हैं.”

अकबरुद्दीन ने कहा कि भारत का यह रुख है कि अनुच्छेद 370 पूरी तरह से भारत का आंतरिक मसला है और इसमें किसी प्रकार की बाहरी जटिलता नहीं है.

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