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अगले हफ्ते हो सकती है भारत-चीन कोर कमांडर्स की 8वीं बैठक, जानें- कहां फंस रहा है पेंच

सातवी बैठक के बाद दोनों पक्ष (India China) बातचीत के जरिए गतिरोध को सुलझाने के लिए राजी हुए थे और आगे भी सैन्य और राजनयिक चैनलों के जरिए संवाद करने को लेकर सहमति जताई थी.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 3:11 pm, Sun, 18 October 20
अगले हफ्ते होगी भारत-चीन कॉर्प्स कमांडर बैठक (File Photo)

पूर्वी लद्दाख (East Ladakh) में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन के बीच पिछले पांच महीने से जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए भारत-चीन सैन्य और कूटनीतिक स्तर की बातचीत का आठवां दौर अगले हफ्ते तक होने की उम्मीद है. इस दौरान दोनों देशों की सेनाएं 1,597 किमी लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बर्फ और सर्दियों की तैनाती के लिए तैयार हैं. दोनों पक्षों ने सैन्य कमांडर और राजनयिक दोनों स्तरों पर संवाद चैनलों को खुला रखने का फैसला किया है.

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने प्रस्ताव दिया है कि दोनों पक्ष हथियार और आर्टिलरी इकाइयों को वापस लें, उसके बाद पैदल सेना इन बिंदुओं से पीछे हटाई जाए. भारतीय पक्ष इस बात पर ज़ोर दे रहा है कि अर्टिलरी यूनिट्स को तब तक पीछे नहीं हटाया जा सकता जब तक पैदल सेना पीछे नहीं हटती, क्योंकि ऐसी स्थिति में दूसरा पक्ष लाभ ले सकता है.

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एक वरिष्ठ सैन्य कमांडर के मुताबिक मुद्दा यह है कि पैंगॉन्ग त्सो के उत्तर और दक्षिण दोनों किनारों पर भारतीय सेना का का मानना है कि यहां पीछे हटने पर चीन फायदा ले सकता है. ये ऊंचे पहाड़ी दर्रों से होकर गुज़रते हैं, ऐसे में एक साथ इन प्वॉइन्ट्स से ध्यान नहीं हटाया जा सकता. 17,590 फीट चांग ला और 18,314 फीट मार्सिमिक ला दोनों ही महत्वपूर्ण हैं. लेह से पैंगॉन्ग त्सो के दक्षिणी तट पर स्थित मार्सिमिक ला, झील और कोंग्का ला के बीच के उत्तरी तट के बीच स्थित है. कोंगो-ला के पास गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स से जाने वाली सड़क पंगोंग त्सो, मार्सिमिक ला के साथ है.

अगर हथियार बंद यूनिट्स पहले वापस हुईं तो होगा नुकसान

अगर भारत चांग ला से या मार्सिमिक ला से अलग पंगोंग त्सो के दक्षिण से अपनी हथियार बंद यूनिट्स वापस लेते हैं तो वह दोबारा उन जगहों पर आसानी से नहीं पहुंच सकते. अप्रैल से भारी बर्फ दोनों रास्तों को बंद कर देगी. ऐसे में मार्सिमिक ला और कोंगका ला दोनों से 10 किलोमीटर दूर छह लेन का काशगर-ल्हासा राजमार्ग है जो कि चीन के लिए फायदेमंद साबित होगा.

चीन ने पहले भी की है हरकत

पीएलए ने इस साल अप्रैल-मई में गाल्वन घाटी, गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स और पैंगॉन्ग त्सो के उत्तरी किनारे पर आक्रमण शुरू किया. अगस्त के आखिरी सप्ताह के बाद से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, क्योंकि अक्साई चिन के साथ-साथ चेंग्दू और काशगर तक के गहन क्षेत्रों में पीएलए पूरी तरह से तैनात है. पीएलए की वायु सेना पास के एयरबेस के साथ सक्रिय क्षेत्र में अपने लड़ाकू विमानों से गश्त कर रही है.

7वीं बैठक में ये हुआ तय

12 अक्टूबर को कॉर्प्स कमांडर स्तर की सातवीं बैठक चुशूल में आयोजित की गई. इसको लेकर भारत और चीन ने जॉइंट प्रेस रिलीज की. जिसमें उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच भारत चीन बॉर्डर यानी LAC से सैनिकों को पीछे हटाए जाने की बात पर गहन और ठोस विचार विमर्श किया.

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दोनों देशों द्वारा जारी किए गए बयान के मुताबिक भारत और चीन के बीच हुई बैठक और बातचीत सकारात्मक और रचनात्मक थी और इससे दोनों देशों को एक दूसरे की स्थिति को समझने में मदद मिलती है. बयान में बताया गया है कि दोनों पक्ष बातचीत के जरिए गतिरोध को सुलझाने के लिए राजी हैं और आगे भी सैन्य और राजनयिक चैनलों के जरिए संवाद करने को लेकर सहमत हैं. दोनों पक्ष दोनों देशों के नेतृत्व द्वारा विवाद को न बढ़ाने और बॉर्डर से जुड़े इलाकों में शांति और समृद्धि बरकरार रखने के लिए बनी समझ को ईमानदारी से बरकरार रखेंगे.