‘भारत ने नहीं भेजा पाकिस्तान को बातचीत का संदेश, अपनी सरकार की विफलता छिपा रहे इमरान के NSA’

भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि आतंकवाद का समर्थन और पाकिस्तानी नेतृत्व के नफरत भरे भाषणों के बीच दोनों देशों के संबंध सामान्य नहीं हो सकते हैं.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव (FILE)

भारत ने गुरुवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) के सहयोगी के उस दावे को गलत बताया, जिसमें उन्होंने कहा था कि नई दिल्ली ने बातचीत के लिए संदेश भेजे थे. भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि आतंकवाद का समर्थन और पाकिस्तानी नेतृत्व के नफरत भरे भाषणों के बीच दोनों देशों के संबंध सामान्य नहीं हो सकते हैं.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने एक साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान इमरान खान के NSA मोईद यूसुफ के दावों को खारिज करते हुए कहा, “जैसा कि कथित संदेश है, मैं स्पष्ट कर दूं कि हमारी तरफ से ऐसा कोई संदेश नहीं भेजा गया था.” श्रीवास्तव ने भारत के आंतरिक मामलों पर यूसुफ की टिप्पणियों को पाकिस्तान की तरफ से वर्तमान सरकार की घरेलू विफलताओं से ध्यान भटकाने और भारत को दैनिक आधार पर सुर्खियों में खींचकर अपनी जनता को गुमराह करने का प्रयास बताया.

उन्होंने यूसुफ से भारत की घरेलू नीति पर टिप्पणी नहीं करने के लिए कहा. उन्होंने कहा, “उनकी तरफ से दिए गए बयान असल में मौजूद तथ्यों के विपरीत, भ्रामक और काल्पनिक हैं.”

भारत के सामने रखी बातचीत की पांच शर्तें

दरअसल इमरान के NSA मोईद यूसुफ ने एक इंटरव्यू में इस तरह का दावा किया था कि भारत ने पाकिस्तान के साथ बातचीत के संकेत दिए हैं. साथ ही उन्होंने इसके लिए अपनी तरफ से भारत के सामने पांच शर्तें भी रखीं, जिसमें कश्मीर और अनुच्छेद 370 का मुद्दा भी शामिल था.

‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की खबर के मुताबिक भारतीय पत्रकार करण थापर से पीएम इमरान खान के विशेष सहायक (राष्ट्रीय सुरक्षा) डॉ. मोईद यूसुफ (Dr. Moeed Yusuf) ने एक इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तान, भारत के साथ शांतिपूर्ण संबंध चाहता है और बातचीत के माध्यम से सभी मुद्दों को हल करना चाहता है.

ये थीं पाकिस्तान की वो पांच शर्तें

यूसुफ ने उन 5 शर्तों को गिनाते हुए कहा, ”दोनों पड़ोसियों के बीच होने वाली किसी भी सार्थक बातचीत के लिए, भारत को कश्मीर में सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करना होगा, अमानवीय नाकाबंदी और प्रतिबंधों को समाप्त करना होगा, अधिवास कानून को रद्द करना होगा जो गैर-कश्मीरियों को विवादित क्षेत्र में बसने की अनुमति देता है, पाकिस्तान पर मानवाधिकारों का हनन जैसे आरोप लगाना बंद करना होगा और स्टेट टेररिज्म बंद करना होगा.”

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