आर्टिकल 370 में संशोधन करते हुए भारत ने कैसे UN प्रस्ताव का रखा ख़्याल

पाकिस्तान मांग करता रहा है कि वहां जनमत संग्रह कराए, इसके जवाब में भारत का कहना है कि वो गिलगित बल्तिस्तान वाले इलाकें से अपनी फ़ौज़ हटाए.

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लिए जाने और अनुच्छेद 370 में संशोधन किए जाने के भारत सरकार के फैसले को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने गैर-कानूनी बताया और कहा कि इससे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा नष्ट हो जाएगी.

इमरान ने यह बयान अपने मलेशियाई समकक्ष महाथिर बिन मोहम्मद के साथ जम्मू एवं कश्मीर की वर्तमान स्थिति पर बातचीत के दौरान दिया.

बातचीत के दौरान इमरान ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर की स्थिति में बदलाव संयुक्त राष्ट्र संकल्पों का उल्लंघन है.

जियो न्यूज के अनुसार, इमरान ने मलेशियाई प्रधानमंत्री से कहा, “भारत के इस कदम से परमाणु संपन्न पड़ोसियों के बीच संबंध और बिगड़ेंगे.”

मलेशियाई प्रधानमंत्री महाथिर बिन मोहम्मद ने कहा कि मलेशिया स्थिति पर नजर बनाए हुए है और पाकिस्तान के संपर्क में है.

इसके पहले भारत सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370 में बदलाव किया, जो जम्मू एवं कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा प्रदान करता था.

भारत के इस निर्णय की पाकिस्तान ने निंदा की है और घोषणा की है कि इस मुद्दे को देश में दौरे पर आ रहे अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ बैठकों के दौरान उठाया जाएगा.

सवाल यह उठता है कि पाकिस्तान जिस संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के उल्लंघन की बात करता है वो है क्या?
भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1948 में पहली बार इस विवाद की शुरुआत हुई थी.

साल 1947 में जब पाकिस्तान के लड़ाके अपनी ताक़त के बल पर जम्मू-कश्मीर पर अपना अधिकार जमाने की कोशिश कर रहे थे तो महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ विलय संधि पर हस्ताक्षर किया. जिसके बाद भारत ने अपनी फ़ौज की मदद से उन आक्रमणकारियों को खदेड़ा.

हालांकि इस संघर्ष के बाद कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के पास रह गया जिसे Pok (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) कहते हैं. जबकि तीन हिस्सा- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख बारत के हिस्से में आया.

भारत ने इस मसले को साल 1948 में पहली बार संयुक्त राष्ट्र परिषद में रखा. तभी संयुक्त सुरक्षा परिषद में यह मैटर प्रस्ताव नंबर 38 के रूप में अंकित था. बाद में प्रस्ताव 39, प्रस्ताव 47 और प्रस्ताव 51 के रूप में तीन और प्रस्ताव आए. से सभी प्रस्ताव उसी साल लाया गया था.

ये था वो तीन प्रस्ताव

1. 17 जनवरी 1948 को प्रस्ताव 38 लाया गया जिसमें दोनों पक्षों से स्थिति को बेहतर बनाए रखने को कहा गया. हालांकि इस प्रस्ताव में सुरक्षा परिषद के सामने भारत-पाकिस्तान के बीच सीधी बात-चीत कराने को कहा गया था.

2. इसके तीन दिन बाद यानी कि 20 जनवरी 1948 को प्रस्ताव संख्या 39 आया. इसमें सुरक्षा परिषद ने तीन सदस्यीय आयोग बनाने का फ़ैसला किया. फ़ैसले के मुताबिक एक सदस्य भारत से एक पाकिस्तान से और एक दोनों पार्टी मिलकर चुनेंगे. इस तीन सदस्यीय आयोग को मौक़े पर पहुंचकर तुरंत तथ्यों की जांच करने को कहा गया था.

3. इसके बाद 21 अप्रैल 1948 को प्रस्ताव संख्या 47 में जनमत संग्रह कराने को कहा गया. प्रस्ताव के अनुसार जम्मू-कश्मीर पर नियंत्रण के मुद्दे को लेकर भारत और पाकिस्तान दोनों को जनमत संग्रह कराना होगा. यानी कौन कहां जाएगा इसपर विचार स्वतंत्र और निष्पक्ष लोकतांत्रित तरीक़े से होना चाहिए. हालांकि इसमें शर्त यह थी कि Pok में तैनात पाकिस्तानी फ़ौड को वापस भेजा जाए.

प्रस्ताव पास होने के बाद भी जब पाकिस्तान ने Pok से अपनी फ़ौज़ नहीं हटाई तो भारत ने साल 1950 के दशक में इस प्रस्ताव से दूरी बना ली. तब से लेकर अब तक भारत-पाकिस्तान के बीच इसी मुद्दे को लेकर आरोप प्रत्यारोप चलता रहा और नतीजतन संयुक्त राष्ट्र के उन प्रस्तावों को अब तक अमल में नहीं लाया जा सका.

पाकिस्तान मांग करता रहा है कि वहां जनमत संग्रह कराए, इसके जवाब में भारत का कहना है कि वो गिलगित बल्तिस्तान वाले इलाकें से अपनी फ़ौज़ हटाए.

1972 में तय किया गया कि इस मुद्दे पर तीसरे दल की मध्यस्थता नहीं होगी

साल 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ. इसी युद्ध के बाद बांगलादेश एक अलग देश बना था. इस जंग के बाद दोनों देशों के बीच साल 1972 में शिमला समझौता हुआ.

इस समझौते में तय कर दिया गया कि कश्मीर से जुड़ा विवाद दोनों देशों का अंदरूनी मामला है और इसपर संयुक्त राष्ट्र सहित किसी भी तीसरे पक्ष का दखल मंज़ूर नहीं होगा.

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