Fact Check: इंडिया गेट पर लिखे गए शहीदों के नाम पर क्या ओवैसी का दावा सच है!

ओवैसी ने पीएम नरेंद्र मोदी और आरएसएस पर हमला करते हुए ओवैसी कहते हैं कि इंडिया गेट पर लिखे नामों में 65 फीसदी मुसलमान हैं. इतना ही नहीं फेसबुक और ट्विटर पर भी यही दावा किया गया है.

asaduddin owaisi

नई दिल्ली: एआईएमआईएम (AIMIM) पार्टी के अध्यक्ष और हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी के एक बयान ने एक नई बहस को जन्म दिया है. पिछले दिनों मुंबई की एक रैली में एआईएमआईएम पार्टी के अध्यक्ष ओवैसी ने दावा किया था कि इंडिया गेट पर 95300 स्वतंत्रता सेनानियों के नाम लिखे हैं जिनमें 61945 मुसलमान हैं.

ओवैसी का दावा- “जब मैं इंडिया गेट गया तो मैंने वहाँ उन नामों की फ़ेहरिस्त को देखा जिन्होंने हिन्दुस्तान की आज़ादी के लिए अपनी जान गंवा दी. उस इंडिया गेट पर 95,300 लोगों के नाम लिखे हुए हैं. आपको ये जानकर ख़ुशी होगी कि उनमें से 61,945 सिर्फ़ मुसलमानों के नाम हैं. यानी 65 फ़ीसदी सिर्फ़ मुसलमानों के नाम हैं.

इस बात का जब फैक्ट चैक किया गया तो इंडिया गेट पर जिन शहीदों के नाम दर्ज हैं वो दरअसल ब्रिटिश सेना के सिपाही थे और उन्होंने विश्व युद्ध में अपनी शहादत दी थी न कि भारत की आजादी के आंदोलन में. फेसबुक पर इस दावे के साथ ये वीडियो वायरल है, कई यूजर्स जैसे “I Support Aimim Party” और रेणु आनंद ने दावे के साथ लिखा ‘क्रांतिकारी जय भीम.


दिल्ली के इंडिया गेट पर कुल 95,300 स्वतंत्रता सेनानियों के नाम हैं. जिनमें मुसलमान -61395 सिक्ख- 8050 पिछड़े वर्ग के – 14480. दलित -10777 सवर्ण- 598 संघी मतलब आरएसएस वाले- 00. दिल्ली पर्यटन विभाग के मुताबिक इंडिया गेट की नींव ड्यूक ऑफ कनॉट ने 1921 में रखी गई, इसका डिजाइन इडविन लुटियन ने किया था और 10 साल बाद वायसराय लॉर्ड इरविन ने इसका उद्घाटन किया.

विश्व युद्ध के दौरान हजारों भारतीयों ने ब्रिटिश फौज की ओर से जंग लड़ी. इंडिया गेट एक युद्ध स्मारक है जो विश्व युद्ध के दौरान मारे गए 70000 भारतीयों की याद में बनाया गया था.
इंडिया गेट के टॉप पर ‘INDIA’ शब्द गुदा है. उसके दोनों तरफ रोमन में तारीखें लिखीं हैं (1914) और (1919) on the right. साथ ही ये भी लिखा है.

इसमें कोई शक नहीं कि आजादी की लड़ाई में मुसलमानों ने अपनी जान न्यौछावर की लेकिन एक कौम विशेष पर अपनी छाप बनाने के लिए असद्दुदीन ओवैसी और कुछ और लोगों का ये दावा गलत है कि इंडिया गेट पर आजादी के सिपाहियों के नाम खुदे हैं. इंडिया गेट पर सिपाहियों ने नाम लिखे हैं जो विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना की ओर से शहीद हुए. इनकी कुल संख्या 13220 है न कि 95300 जैसा कि दावा किया जा रहा है.

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