महाबली तोप, महाशक्तिशाली टैंक और भारत की शूरवीर सेना पलक झपकते ही पहुंचेंगे बैरक से बॉर्डर

करगिल हो या लद्दाख, भारत देश के दो दुश्मनों से घिरा है. LAC पर घोखेबाज चीन है और LOC पर धूर्त पाकिस्तान. लिहाजा जोजिला टनल को भी जल्द से जल्द पूरा करना किसी चुनौती से कम नहीं.

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भारतीय सेना (FILE)

किसी भी देश से चीन पहले मनोवैज्ञानिक लड़ाई लड़ता है और अब ये साफ हो चुका है कि भारत ने ये मनोवैज्ञानिक लड़ाई जीत ली है. चीन ने सोचा था कि उसकी चकाचौंध से घबराकर भारत पीछे हट जाएगा और सीमा पर स्ट्रक्चर तैयार करना छोड़ देगा, लेकिन भारत ने चीन के डर से जिस सरहदी इलाकों को फटेहाल छोड़ रखा था. वहां चीन की चिढ़ के बावजूद चमचमाती सड़कें बना दी. एक से एक मजबूत पुल बना दिए. यहां तक कि अटल टनल बना दी और आज एक और टनल के लिए सेरेमनी ब्लास्ट हो गया. जाहिर है ये धमाका जिनपिंग के कानों तक गूंज रहा होगा.

अटल टनल से बौखलाया चीन और सहमा हुआ पाकिस्तान अब जोजिला टनल बनाने में होने वाले हर धमाके से अंदर तक हिल जाएंगे, क्योंकि जल्द ही भारतीय सेना न सिर्फ लेह-लद्दाख तक बल्कि करगिल तक सुपर स्पीड से पुहंचेगी. भारत के महाबली तोप, महाशक्तिशाली टैंक, गोला-बारूद और उसकी शूरवीर सेना पलक झपकते ही बैरक से बॉर्डर तक पहुंच जाएगी और ये बीजिंग वाले बादशाह की सेना उसके चेले बाजवा के फौजियों के लिए काउंटडाउन साबित होगा.

एशिया के सबसे लंबे जोजिला टनल से चीन-पाकिस्तान का दम निकलना तय है. सरहद की सुरक्षा बढ़ेगी और हिंदुस्तान की सेना का अंदाज बुलंद होगा. ऐसा हम यूं ही नहीं कह रहे. 11 हजार फीट की ऊंचाई पर बर्फ की सफेद चादर में लिपटी पहाड़ की बुलंदियां हड्डियां गला देने वाली सर्द हवाएं, जिंदगी जहां कुदरत की मोहताज है. देश के उसी दुर्गम इलाके में हिंदुस्तान नया इतिहास लिखने को तैयार है.

अटल बिहारी का सपना पूरा करने की शुरुआत

अब इन्हीं पहाड़ों का सीना चीरती बड़ी-बड़ी मशीनें, तेज धमाके और घुप्प अंधेरी सुरंग में गूंजती आवाजें सुनाई देंगी. ये शुरुआत होगी. उस सपने को पूरा करने की, जिसे भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ने देखा था और जिसे आखिरी मुकाम तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचाएंगे.

देश को अटल टनल की सौगात देने के बाद मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर में सामरिक महत्व की एक और टनल जोजिला का निर्माण शुरू कर दिया है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के जरिए इस सुरंग के निर्माण के लिए पहला ब्लास्ट किया.

जोजिला टनल को पूरा करने की चुनौती

करगिल हो या लद्दाख, भारत देश के दो दुश्मनों से घिरा है. LAC पर घोखेबाज चीन है और LOC पर धूर्त पाकिस्तान. लिहाजा जोजिला टनल को भी जल्द से जल्द पूरा करना किसी चुनौती से कम नहीं. इसीलिए सेना और सिविल इंजीनियरों की टॉप टीम जोजिला-दर्रे के पहाड़ों को काट कर ये सुरंग तैयार करेगी.

जोजिला टनल सिर्फ एक सुरंग नहीं है. ये वो जरिया है, जिससे देश की सरहद तो महफूज होगी ही लेह, करगिल और लद्दाख के लाखों लोगों के लिए जिंदगी की राह भी आसान हो जाएगी, कैसे? इसे ऐसे समझिए.

लेह से करगिल की दूरी करीब 217 किलोमीटर है. मौजूदा वक्त में इस सफर को तय करने में करीब 5 घंटे या उससे ज्यादा का वक्त लगता है. बरसात और बर्फबारी के दौरान ये रास्ता तय करना और मुश्किल हो जाता है. जोजिला टनल शुरू होने के बाद इस सफर में करीब करीब 3 घंटे की बचत होगी.

कुतुब मीनार की ऊंचाई से पाच गुना होगी टनल की ऊंचाई

जहां जोजिला टनल बनाई जा रहा है, वहां तापमान माइनस 45 डिग्री तक जाता है और सिर्फ 6 महीने में ही रास्ते खुलते हैं. लिहाजा 14.15 किलोमीटर लंबी टनल बनने के बाद करगिल और लेह-लद्दाख के बीच आवाजाही 12 महीने खुली रहेगी. यही नहीं हर मौसम में टनल को पार करने में सिर्फ 15 मिनट ही लगेंगे. कुतुब मीनार की ऊंचाई से 5 गुना अधिक ऊंचाई पर ये टनल 11,575 फीट पर बनेगा, जो बेहद आधुनिक होगा. 14.15 किलोमीटर टनल बनाने में 6,809 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे.

इस टनल में 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन गुजर सकेंगे. हाई-टेक कॉम्युनिकेशंस समेत तमाम जरूरी सेफ्टी फीचर्स भी उपलब्ध होंगे.

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