इधर मारी फूंक और उधर Covid-19 टेस्ट रिपोर्ट तैयार, जानें किस टेक्नोलॉजी से होगा ये संभव

भारत और इजरायल (Israel) के वैज्ञानिक और डॉक्टर संयुक्त रुप से इस तकनीक पर रिसर्च कर रहे हैं, जिससे महज वाइस सैम्पल और फूंक मारने से ही आप कोरोना (Covid-19) का पता लगा सकते हैं.
india israel research on four new techniques, इधर मारी फूंक और उधर Covid-19 टेस्ट रिपोर्ट तैयार, जानें किस टेक्नोलॉजी से होगा ये संभव

कोरोना (Coronavirus) का संक्रमण देश में 6 महीने से उपर हो चुका है. इसको लेकर नित नए प्रयोग भी हो रहे हैं. हाल ही में एक प्रकार का नया वैज्ञानिक प्रयोग किया गया है, जिसमें यह दावा किया गया है कि मरीज की आवाज यह बता देगा कि वह कोरोना संक्रमित है या नहीं. भारत और इजरायल (Israel) के वैज्ञानिक और डॉक्टर संयुक्त रुप से इस बात पर रिसर्च कर रहे हैं, जिससे महज वाइस सैम्पल से ही आप कोरोना का पता लगा सकते हैं.

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गांगाराम अस्पताल के वाय़रॉलॉजि डिपार्टमेंट के प्रमुख डॉ. एसपी बायोत्रा ने Tv9 भारतवर्ष से बातचीत में बताया कि कई तरह से कोरोना संक्रमण का पता लगया जा सकता है, उनमें से एक वाइस सैम्पल भी है. उन्होंने बताया कि इंडो इजरायल टीम (जिसमें DRDO भी शामिल है) के डॉक्टरों ने इसपर शोध किया है, जिसके परिणाम महज एक महीने के भीतर आने की संभावना है.

इंडियन मेडिकल एसोशिएशन (IMA) के संयुक्त सचिव डॉ. अनिल गोयल ने Tv9 भारतवर्ष से बातचीत में बताया कि वाइस सैम्पल के अतिरिक्त ब्रीथिंग से भी पता चल पाएगा कि कोरोना का संक्रमण है अथवा नहीं. हालांकि उन्होंने कहा कि अभी ट्रायल हो रहा है और लगभग 10000 लोगों पर ट्रायल होने के बाद ही कुछ भी खुलकर कहा जा सकता है.

आपकी आवाज से होगी कोरोना का जांच

इस तकनीक में किसी भी मरीज की आवाज को सुनकर पता लगाया जा सकता है कि वह संक्रमित है या नहीं. डॉक्टरों की राय यह है कि कोविड हमारे रेस्पेरेट्री सिस्टम पर हमला करता है. ऐसे में हमारी आवाज में परिवर्तन आता है. यही परिवर्तन यह बताता है कि संक्रमण है या नहीं.

दिल्ली में इन जगहों पर हो रहे ट्रायल

Tv9 भारतवर्ष को मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली (Delhi) के तीन बड़े अस्पताल, जिसमें राम मनोहर लोहिया, सर गंगाराम और LNJP अस्पताल हैं, यहा पर बड़ी तेजी से ट्रायल चल रहा है और लगभग पूरा हो चुका है. सबसे अधिक नमूने गंगाराम अस्पताल में 3232 लिए गए हैं. जिन मरीजों पर ट्रालय हुआ है, उनकी रिपोर्ट का एनालिसिस किया जा रहा है, जिससे कि परिणाम तक पहुंचा जा सके.

वैक्सीन आने से पहले की चुनौती

डॉ. अनिल गोयल ने बताया कि जबतक कोरोना का वैक्सीन (Coron Vaccine) नहीं आता तब तक हमें इस बिमारी से लड़ने के लिए नित प्रतिदिन नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में इजरायल और DRDO का संयुक्त प्रयास एक अच्छा परिणाम ला सकता है. खासकर तब जब तक यह बिमारी खत्म नहीं होती, तब तक तेजी से जांच के हर तरीके को आजमाना चाहिए, जिससे कि संक्रमित मरीजों को आइसोलेट किया जा सके और उसे समय पर इलाज मुहैया किया जा सके.

सांस के जरिए कैसे होगा टेस्ट?

इस प्रकार के टेस्ट को ब्रेथ एनलाइजर भी कहते हैं, जैसे यदि कोई शराब पीकर गाड़ी चला रहा होता है, तो फूंक मारकर पुलिस पता लगाती है वैसे ही इस जांच में मरीज को एक ट्यूब में फूंक मारनी होती है और टैरा हर्टज वैक्स के माध्यम से यह पता चलता है कि वह कोरोना संक्रमित है या नहीं.

दूसरा माध्यम आईसोथर्म टेस्ट है, इसमें लार के नमूने से वायरस का पता लगाया जाता है. मरीज के ओठ पर लगी लाह को भिगोकर जांच की जाती है कि और पता लगाया जाता है कि मरीज संक्रमित है अथवा नहीं. तीसरे माध्यम में पॉलिअमीनो टेस्ट के माध्यम से Covid-19 से संबंधित प्रोटीन को अलग किया जाता है, जिसमें मरीज के थूक के सैम्पल से ही कोरोना का पता लगाया जाता है.

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